अकाल पर सियासत, किरोड़ी का गहलोत पर पलटवार-नियमों से होगा सर्वे,अफवाहों से नहीं चलेगी सरकार

Mukesh Sharma | Oct 21, 2026, 18:53 IST
किरोड़ी और गहलोत आमने-सामने
राजस्थान में सूखे और अकाल के हालातों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। इस पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि सर्वे के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे। गहलोत ने केंद्र से मदद मांगने का सुझाव दिया है, ताकि किसानों को राहत मिल सके।

Jaipur: राजस्थान में सूखे और अकाल के हालातों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भजनलाल सरकार पर अनदेखी के तीखे आरोप लगाने के बाद राज्य के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पलटवार किया है।



बुधवार को भाजपा मुख्यालय (BJP Office) में मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बिना किसी प्रशासनिक रिपोर्ट और नियम-कायदों के जल्दबाजी में कदम नहीं उठा सकती। सर्वे पूरा होते ही नियमानुसार अकाल घोषित कर तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। उन्होंने पूर्व सीएम को संवेदनशील मुद्दों पर भ्रम न फैलाने की सलाह भी दी। उन्होंने साफ किया कि प्रदेश के करीब आठ से दस जिलों में कम बारिश से सूखे के हालात बने हुए हैं। हालात की पूरी मॉनिटरिंग हो रही है।



सर्वे की प्रक्रिया जारी

कृषि मंत्री ने बताया कि जिला कलेक्टरों और संबंधित अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर रहे हैं। राजस्व विभाग इसकी औपचारिक प्रक्रिया को पूरा कर रहा है। सर्वे का काम पूरा होने और रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार अकाल घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके तुरंत बाद प्रभावित किसानों और पशुपालकों के लिए राहत कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।



भ्रम न फैलाने की हिदायत

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तत्काल कार्रवाई की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही कदम उठाती है और यह काम प्रक्रियाधीन है। इसलिए बेहतर होगा कि गहलोत इस संवेदनशील मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश न करें।



पूर्व मुख्यमंत्री के आरोप और मांग

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में सूखे और अकाल के हालात को लेकर भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला था। गहलोत ने कहा था कि सरकार को अंदाजा तक नहीं है कि इस बार राजस्थान में कितना भयंकर सूखा पड़ा है। गांवों में लोग परेशान हैं और बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर सहित कई इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है।



भाषण से नहीं चलेगा काम, तुरंत हो गिरदावरी

गहलोत ने कहा था कि उन्होंने बीकानेर का दौरा किया है और वहां हालात चिंताजनक हैं। जैसलमेर में हजारों गायों की मौत का दावा करते हुए उन्होंने कहा था कि पशुधन के लिए चारे का कोई समुचित प्रबंध नहीं है और चारा करीब 20 रुपए किलो तक पहुंच गया है। प्रदेश में पेयजल संकट भी लगातार बढ़ रहा है।



पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को चेताते हुए कहा कि समय रहते मुख्यमंत्री स्तर पर सूखे की मॉनिटरिंग नहीं की गई तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ेगी। सरकार को जमीनी हकीकत पता करनी चाहिए और जहां गिरदावरी पूरी नहीं हुई है, वहां इसे तत्काल पूरा करवाना चाहिए।




पहले से तैयारी जरुरी

गहलोत ने कहा था कि अकाल होने पर तुरंत राहत नहीं मिलती। इसलिए पहले से तैयारी जरूरी है। सरकार को चारे, पेयजल और रोजगार की व्यवस्था करनी होगी। राज्य सरकार को केंद्र सरकार से भी तत्काल मदद मांगनी चाहिए।




केंद्र से मदद क्यों नहीं मांग रही सरकार

उन्होंने कहा था कि उनके कार्यकाल में सूखा होने पर केंद्र से मदद लेकर गांवों में अकाल राहत के काम करवाए गए थे। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते काम के बदले अनाज योजना के जरिए भी राहत पहुंचाई गई थी। अब जब राजस्थान में डबल इंजन की सरकार है तो राज्य सरकार केंद्र से सूखे के लिए मदद की मांग क्यों नहीं कर रही है ?



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