ट्रांसफर के लिए बना फर्जी डिप्टी CM, अधिकारियों को घुमाया फोन, जांच में खुली पोल

Jageshwar prasad | Jun 25, 2026, 11:01 IST
खुद को डिप्टी सीएम बताकर अधिकारियों पर बनाया तबादले का दबाव
राजस्थान के अजमेर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक नर्सिंग ऑफिसर ने अपना ट्रांसफर कराने के लिए कॉल पर खुद को राज्य का उप मुख्यमंत्री बताया। विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अजमेर में नर्सिंग ऑफिसर का अनोखा और हैरान करने वाला कारनामा।
  • खुद को डिप्टी सीएम बताकर अधिकारियों पर बनाया तबादले का दबाव।
  • ट्रांसफर की सेटिंग के चक्कर में खुली फर्जीवाड़े की पोल।
  • चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों को फोन करना पड़ा भारी।
  • पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर नर्सिंग कर्मी के खिलाफ जांच शुरू।

राजस्थान के अजमेर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और अनोखा प्रशासनिक फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। यहां चिकित्सा विभाग में तैनात एक नर्सिंग ऑफिसर ने अपना मनचाहा ट्रांसफर (तबादला) करवाने के लिए प्रशासनिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया।



इस नर्सिंग कर्मी ने विभाग के उच्च अधिकारियों को फोन करके खुद को राज्य का उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) प्रेमचंद बैरवाबताया और एक विशिष्ट नर्सिंग कर्मी के ट्रांसफर के लिए कड़ा दबाव बनाया।



शुरुआत में अधिकारियों को फोन कॉल पर कुछ अजीब लगा, जिसके बाद संदर्भ की सत्यता जांचने के लिए जब उप मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों से संपर्क किया गया, तो पता चला कि ऐसा कोई निर्देश या फोन वहां से नहीं किया गया था।



पोल खुलते ही चिकित्सा विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।



तबादले की सेटिंग के लिए रची साजिश

अजमेर के इस नर्सिंग ऑफिसर को लंबे समय से अपने पसंदीदा स्थान पर ट्रांसफर की दरकार थी। सामान्य प्रक्रिया से काम न बनता देख उसने सीधे शीर्ष स्तर का फर्जी स्वांग रचने की साजिश रची।



उसने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के आधिकारिक नंबरों पर कॉल किया और बेहद रौबदार आवाज में खुद को डिप्टी सीएम के रूप में पेश किया।



उसने फोन पर अधिकारियों को डांटते और निर्देश देते हुए कहा कि अजमेर के अमुक नर्सिंग अधिकारी का तबादला तुरंत प्रभाव से सूची में शामिल कर दिया जाए। फोन करने वाले का अंदाज बिल्कुल राजनेता और शीर्ष स्तर के मंत्री जैसा था, जिसके चलते एक बार तो अधिकारी भी असमंजस में पड़ गए।



ऐसे खुली फर्जी डिप्टी सीएम की पोल

उच्च अधिकारियों को जब फोन कॉल के लहजे और बार-बार आ रहे दबाव पर संदेह हुआ, तो उन्होंने कॉल करने वाले नंबर की अंदरूनी जांच शुरू करवाई।



नंबर को सर्विलांस और तकनीकी सेल के जरिए ट्रैक किया गया, तो सामने आया कि यह नंबर किसी मंत्री या सचिवालय का नहीं, बल्कि अजमेर में ही कार्यरत एक नर्सिंग ऑफिसर का है। नर्सिंग अधिकारी ने खुद ही डिप्टी सीएम बनकर अपने ही ट्रांसफर की सिफारिश के लिए स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों को फोन घुमाए थे।



इस सनसनीखेज खुलासे के बाद आरोपी नर्सिंग कर्मी के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने, फर्जी नाम का उपयोग करने और अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप में विभागीय और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।



ये भी पढ़ें:-

वीआईपी वाहनों के नाम पर फर्जी फ्यूल बिल, स्टेट मोटर गैराज में बड़ा घपला



एसीबी को बीज निगम के निदेशक से मिले 1.59 करोड़, भांजे से 85 लाख बरामद



फलोदी विधायक के पीए ने किसे दिए 60 लाख, एसीबी अब खोलेगी राज



बीज में रिश्वतखोरी: रिमांड के बाद आरोपियों को भेजा जेल, एसीबी को मिले अहम सबूत





Tags:
  • प्रेमचंद बैरवा
  • डिप्टी सीएम
  • अजमेर
  • चिकित्सा विभाग
  • फर्जी डिप्टी सीएम