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Photograph: (the sootr)
News In Short
- वर्ष 2025 के लिए प्रॉपर्टी रिटर्न नहीं भरने वालों पर होगा एक्शन।
- 2,60,775 कर्मचारियों ने अब तक नहीं दिया प्रॉपटी् का विवरण।
- प्रदेश में कुल 10.58 लाख कर्मचारी-अधिकारी सरकारी सेवा में।
- 7.97 लाख कर्मचारी-अधिकारी भर चुके हैं सालाना प्रॉपर्टी रिटर्न।
- ​नियमों का 'चाबुक' रोक सकता है सैलरी और तरक्की का रास्ता।
News In Detail
​Jaipur: राजस्थान में प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले वाले कर्मचारी और अधिकारी पर सख्त एक्शन हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि डेडलाइन बीते एक महीना हो चुका है, लेकिन प्रदेश के 2,60,775 राज्य कर्मचारियों ने अब तक अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा सरकार को नहीं दिया है। संपत्ति का विवरण नहीं देने वालों में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं है, बल्कि 36 हजार 861 जिम्मेदार अधिकारी भी हैं।
इतने कर्मचारी-अफसरों ने भरी रिटर्न
राजस्थान में राज्य कर्मचारियों के लिए प्रॉपर्टी रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जनवरी है। इस समय प्रदेश में कुल 10 लाख 58 हजार 450 कर्मचारी हैं। इनमें से प्रॉपर्टी रिर्टन भरने वालों की स्थिति देखी जाए तो 2025 के लिए 31 जनवरी तक प्रदेश में 7 लाख 97 हजार 675 कर्मचारी-अधिकारियों ने रिटर्न दाखिल की है। इनमें एक लाख 25 हजार 726 गैजेटेड अधिकारी शामिल हैं।
यह रिर्टन वर्ष 2025 के लिए भरी जानी है।
कुल कर्मचारी: 10, 58, 450
​कुल डिफाल्टर कार्मिक: 2,60,775
​राजपत्रित अधिकारी: 36,861
​अराजपत्रित कर्मचारी: 2,23,914
​
31 जनवरी की अंतिम तिथि गुजरने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में रिटर्न फाइल न होना सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
नियमों का 'चाबुक': रुक सकती है सैलरी और तरक्की
कार्मिक विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि संपत्ति का ब्यौरा देना पारदर्शिता की पहली सीढ़ी है। इसे नजरअंदाज करना न सिर्फ अनुशासनहीनता है, बल्कि यह भविष्य के लाभों से खुद को वंचित करने जैसा है। प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल करना कोई 'विकल्प' नहीं बल्कि एक अनिवार्य ड्यूटी है। जो कर्मचारी इसमें कोताही बरत रहे हैं, उनके लिए आने वाले दिन मुश्किलों भरे हो सकते हैं।
नियमों के तहत डिफाल्टर कर्मचारी-अधिकारियों को पदोन्नति से वंचित किया जा सकता है। यानी जब तक ब्यौरा जमा नहीं होता, कर्मचारी की तरक्की की फाइल आगे नहीं बढ़ेगी। इसी तरह समय पर रिटर्न न भरने वालों की इंक्रीमेंट रोकी जा सकती है। किसी भी विभागीय जांच या सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली विजिलेंस क्लीयरेंस भी अटक सकती है। बार-बार चेतावनी के बावजूद पोर्टल पर जानकारी अपडेट न करने पर चार्जशीट तक दी जा सकती है।
​क्यों जरूरी है IPR दाखिल करना
​भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और सार्वजनिक जीवन में शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार हर साल कर्मचारियों से उनकी अचल संपत्ति (मकान, दुकान, जमीन आदि) का विवरण मांगती है। इसे ऑनलाइन पोर्टल SSO ID के माध्यम से राजकाज सॉफ्टवेयर पर भरना होता है। लेकिन, लाखों कर्मचारियों द्वारा इस प्रक्रिया से दूरी बनाना विभाग की सख्ती पर भी सवाल उठाता है।
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​अब आगे क्या
सूत्रों के अनुसार कार्मिक विभाग अब इन 2.6 लाख कर्मचारियों की सूची तैयार कर संबंधित विभागों के अध्यक्षों को भेज रहा है। अब गेंद विभागों के पाले में है-क्या वे अपने कर्मचारियों को एक और मौका देंगे या सीधे कार्रवाई का डंडा चलाएंगे?
​फिलहाल, इन सवा दो लाख से ज्यादा कर्मचारियों के लिए वेट एंड वॉच वाली स्थिति है। अगर समय रहते इन्होंने अपनी संपत्ति का हिसाब नहीं दिया, तो अगले महीने की सैलरी स्लिप में मिलने वाली 'खुशखबरी' गायब हो सकती है।
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