पुष्कर में हैरान करने वाला मामला: जिसका अंतिम संस्कार किया, वह 4 दिन बाद जिंदा मिला
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 07, 2026, 11:02 IST
मौत के बाद जिंदा मिला
नाथू रैगर का अंतिम संस्कार उनके परिवार ने तब किया जब उन्हें मृत समझा गया था। लेकिन जब पुलिस ने एक लावारिस शव खोजा, तो उसमें नाथू का नाम सामने आया। चार दिन बाद नाथू जिंदा मिले, जिससे सभी स्तब्ध हैं। वर्तमान में पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है, ताकि मृतक की पहचान DNA परीक्षण के मार्ग से सुनिश्चित की जाए।
अजमेर। पुष्कर में एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने परिवार के साथ-साथ पुलिस को भी उलझा दिया है। जिस व्यक्ति को मृत समझकर परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया, वह चार दिन बाद जिंदा मिला। मामला नाथू रैगर से जुड़ा है। परिवार ने जिस शव की पहचान नाथू के रूप में की थी, उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था। लेकिन चार दिन बाद नाथू खुद मजदूरी करते हुए मिल गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिस शव का नाथू समझकर अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था? पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है और मृतक की वास्तविक पहचान के लिए DNA जांच का सहारा लिया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, 20 सितंबर को पुष्कर के सरकारी अस्पताल के पीछे एक युवक का शव मिला था। शव की तलाशी के दौरान पुलिस को एक अस्पताल की पर्ची मिली, जिस पर नाथू पुत्र शंकर रैगर का नाम लिखा था।
पर्ची पर मोबाइल नंबर भी दर्ज था। पुलिस ने उस नंबर पर संपर्क किया। इसके बाद नाथू की पत्नी से बात हुई। पत्नी ने पुलिस को बताया कि उसकी अपने पति से पिछले दो-तीन साल से अनबन चल रही है और उसका नाथू से कोई सरोकार नहीं है। इसके बाद मामले में नाथू के परिवार से संपर्क किया गया।
21 सितंबर को नाथू का भाई और उसका बेटा पुष्कर थाने पहुंचे। इसके बाद उन्हें मोर्चरी में रखा शव दिखाया गया। परिजनों ने शव की पहचान नाथू के रूप में कर दी। शव का पोस्टमार्टम कराया गया और इसके बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार शव को अपने साथ ले गया और नाथू समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
नाथू की पत्नी मनभर देवी के अनुसार, 20 सितंबर की सुबह उन्हें पुष्कर थाने से पति की मौत की सूचना मिली थी। पुलिस ने बताया था कि एक लावारिस शव मिला है और उसकी जेब से नाथू के नाम की पर्ची बरामद हुई है। पर्ची में नाथू का नाम, गांव का नाम और मोबाइल नंबर लिखा हुआ था।
मनभर देवी अपने बेटे त्रिलोक और कुछ ग्रामीणों के साथ अस्पताल पहुंचीं। उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें शव का चेहरा नहीं दिखाया। पुलिस की ओर से बताया गया कि शव काफी खराब हो चुका है और उसमें से दुर्गंध आ रही है। इसके बाद परिजन शव को अपने साथ ले गए और उसे नाथू का शव मानकर अंतिम संस्कार कर दिया।
नाथू के अंतिम संस्कार के बाद परिवार में मातम का माहौल था। परिवार ने शोक की रस्में पूरी कीं। तीसरे की बैठक के बाद घर में बारहवें की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान परिजनों को जानकारी मिली कि नाथू जिंदा है और कहीं मजदूरी कर रहा है। यह जानकारी मिलते ही परिवार के लोग बताए गए स्थान पर पहुंचे। वहां उन्होंने नाथू को जिंदा देखा। इसके बाद परिवार नाथू को अपने साथ घर ले आया।
जिस घर में कुछ दिन पहले मौत का मातम था, वहां अचानक खुशी का माहौल हो गया। लेकिन दूसरी ओर पुलिस के सामने एक नई और गंभीर पहेली खड़ी हो गई—जिस व्यक्ति का शव नाथू समझकर परिजनों को सौंपा गया था, वह आखिर कौन था?
पुलिस की पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि नाथू भवन निर्माण से जुड़ा मजदूर है और पहले भी कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहता था। उसके लंबे समय तक घर से दूर रहने के कारण परिवार को उसकी गैरमौजूदगी की आदत थी। इसी वजह से जब पुलिस ने शव की जानकारी दी और उसके पास नाथू के नाम की पर्ची मिली, तो परिजनों ने शव की पहचान नाथू के रूप में कर दी। अब नाथू के जिंदा मिलने के बाद पूरे मामले की तस्वीर बदल गई है और शव की वास्तविक पहचान पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस युवक का शव पुष्कर के सरकारी अस्पताल के पीछे मिला था, उसके पास नाथू के नाम की अस्पताल की पर्ची कैसे पहुंची। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मृत युवक कौन था और उसकी जेब से नाथू के नाम की पर्ची मिलने की वजह क्या थी। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शव की पहचान नाथू के रूप में होने के पीछे कोई गलती हुई या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी।
पुष्कर थाना पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, परिजनों ने शव की पहचान नाथू के रूप में की थी और पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया था। इसके चार दिन बाद नाथू के जिंदा मिलने की जानकारी सामने आई। अब मृतक की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए DNA जांच कराई जाएगी। पुलिस ने DNA जांच के लिए सैंपल सुरक्षित रखा है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि मृत युवक के पास नाथू के नाम की पर्ची किस तरह पहुंची और आखिर वह युवक कौन था। DNA रिपोर्ट आने के बाद इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद है।
फिलहाल, एक तरफ नाथू के परिवार में उसके जिंदा मिलने से खुशी है तो दूसरी तरफ पुलिस के सामने उस शव की पहचान करने की चुनौती है, जिसका नाथू समझकर अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिस शव का नाथू समझकर अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था? पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है और मृतक की वास्तविक पहचान के लिए DNA जांच का सहारा लिया जा रहा है।
अस्पताल के पीछे मिला था अज्ञात युवक का शव
पर्ची पर मोबाइल नंबर भी दर्ज था। पुलिस ने उस नंबर पर संपर्क किया। इसके बाद नाथू की पत्नी से बात हुई। पत्नी ने पुलिस को बताया कि उसकी अपने पति से पिछले दो-तीन साल से अनबन चल रही है और उसका नाथू से कोई सरोकार नहीं है। इसके बाद मामले में नाथू के परिवार से संपर्क किया गया।
भाई और बेटे ने शव की पहचान की
चेहरा दिखाए बिना परिजनों को सौंपा गया शव
मनभर देवी अपने बेटे त्रिलोक और कुछ ग्रामीणों के साथ अस्पताल पहुंचीं। उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें शव का चेहरा नहीं दिखाया। पुलिस की ओर से बताया गया कि शव काफी खराब हो चुका है और उसमें से दुर्गंध आ रही है। इसके बाद परिजन शव को अपने साथ ले गए और उसे नाथू का शव मानकर अंतिम संस्कार कर दिया।
अंतिम संस्कार के चार दिन बाद सामने आया बड़ा राज
जिस घर में कुछ दिन पहले मौत का मातम था, वहां अचानक खुशी का माहौल हो गया। लेकिन दूसरी ओर पुलिस के सामने एक नई और गंभीर पहेली खड़ी हो गई—जिस व्यक्ति का शव नाथू समझकर परिजनों को सौंपा गया था, वह आखिर कौन था?
नाथू के लंबे समय तक बाहर रहने की थी आदत
शव के पास नाथू के नाम की पर्ची कैसे पहुंची?
DNA जांच से खुलेगा पूरा राज
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि मृत युवक के पास नाथू के नाम की पर्ची किस तरह पहुंची और आखिर वह युवक कौन था। DNA रिपोर्ट आने के बाद इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद है।
फिलहाल, एक तरफ नाथू के परिवार में उसके जिंदा मिलने से खुशी है तो दूसरी तरफ पुलिस के सामने उस शव की पहचान करने की चुनौती है, जिसका नाथू समझकर अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
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