5वीं और 8वीं कक्षा के छात्र भी हो सकते हैं फेल, लाने होंगे न्यूनतम अंक, जानें पूरा नियम

राजस्थान में 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा में पास होने के लिए अब छात्रों को न्यूनतम अंक लाना जरूरी होगा। न्यूनतम अंक नहीं लाने पर छात्र फेल हो जाएंगे। नए नियम 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होंगे।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

News In Short 

  • राजस्थान में 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा में अब न्यूनतम अंक लाना अनिवार्य है।
  • छात्रों को हर विषय में कम से कम 32 अंक प्राप्त करने होंगे।
  • यदि छात्र पहली बार में कम अंक प्राप्त करता है, तो उसे सप्लीमेंट्री परीक्षा का मौका मिलेगा।
  • स्कूल प्रशासन को फेल होने वाले छात्रों की जिम्मेदारी उठानी होगी।
  • शिक्षा विभाग ने इस बदलाव से छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी बढ़ाने का उद्देश्य बताया।

News In Detail

राजस्थान में 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र अब फेल भी हो सकते हैं। छात्रों के लिए अब एग्जाम में न्यूनतम अंक लाना अनिवार्य होगा। सरकार ने अब 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा में अनिवार्य पास होने के नियम हटा दिए हैं। इससे छात्रों को पहले से ज्यादा मेहनत करनी होगी। शिक्षा विभाग ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के नियमों में संशोधन किया है। उसने ऑटोमेटिक प्रमोशन व्यवस्था को बंद कर दिया है। यह नया नियम आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा।

नए नियमों के मुताबिक 32 अंक लाना होगा जरूरी

नए नियमों के अनुसार, छात्रों को अब हर विषय में कम से कम 32 अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अगर किसी छात्र को किसी विषय में 32 अंक से कम मिलते हैं तो उसे सीधे फेल नहीं किया जाएगा। लेकिन उसे पुनः परीक्षा देने का अवसर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत, छात्रों को पहले विशेष कक्षा में 45 दिन तक पढ़ाया जाएगा, फिर उनकी दोबारा परीक्षा ली जाएगी।

सप्लीमेंट्री परीक्षा का प्रावधान

अगर कोई छात्र पहली बार परीक्षा में न्यूनतम अंक प्राप्त करने में विफल रहता है तो उसे विशेष कक्षा में पढ़ाई के बाद दोबारा परीक्षा दी जाएगी। यह एक प्रकार से सप्लीमेंट्री परीक्षा होगा। यदि छात्र इस परीक्षा में निर्धारित न्यूनतम अंक (32 अंक) प्राप्त कर लेता है तो उसे अगली कक्षा में प्रवेश मिल जाएगा। दूसरी बार भी अगर वह न्यूनतम अंक नहीं ला पाता तो उसे फेल कर दिया जाएगा।

स्कूलों की जिम्मेदारी

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अगर किसी निजी स्कूल में 5वीं और 8वीं कक्षा में छात्र फेल होता है तो उसकी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होगी। प्रशासन से पूछा जाएगा कि छात्र क्यों फेल हुआ। यह कदम स्कूलों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई में गंभीर बनाना है। नए नियमों से केवल छात्रों की ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। शिक्षा विभाग का कहना है कि अब बच्चों की पढ़ाई की नियमित निगरानी होगी। शिक्षक बच्चों की प्रगति पर अधिक ध्यान देंगे और माता-पिता भी बच्चों की पढ़ाई में रुचि लेंगे। इससे स्कूलों में बच्चों का शैक्षणिक स्तर बेहतर होगा।

बोर्ड परीक्षा का नियम एक नजर में 

राजस्थान में 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा में छात्रों को प्रत्येक विषय में कम से कम 32 अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अगर छात्र न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर पाता तो उसे दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा, लेकिन अगर वह दूसरी बार भी सफल नहीं होता, तो उसे फेल कर दिया जाएगा। यदि किसी स्कूल में 5वीं या 8वीं में कोई छात्र फेल होता है, तो उस स्कूल के प्रशासन को इसके कारणों का स्पष्टीकरण देना होगा।

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