आंगनवाड़ी आंदोलन जयपुर पहुंचा, 1 सप्ताह से हड़ताल, सरकार को अल्टीमेटम

Jageshwar prasad | Jul 08, 2026, 18:21 IST
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभाग का किया घेराव, महापड़ाव की चेतावनी
राजस्थान में 1 सप्ताह से आंदोलनरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बुधवार को जयपुर में महिला एवं बाल विकास निदेशालय का घेराव किया। MP में 15 हजार की तुलना में यहां 6-10 हजार मानदेय पर नाराजगी। महापड़ाव की चेतावनी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन जयपुर पहुंचा।
  • विभाग का घेराव, सरकार ने नहीं मानी मांग तो होगा महापड़ाव।
  • 6-10 हजार मानदेय पर गुजारा, मध्यप्रदेश में 15 हजार।
  • राज्य सरकार के बजट में घोषित ग्रेच्युटी अब तक नहीं मिली।
  • नियमितीकरण व 20-26 हजार न्यूनतम मजदूरी की मांग।

राजस्थान में एक सप्ताह से अधिक समय से आंदोलनरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का आक्रोश अब राजधानी जयपुर तक पहुंच गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी महिला कर्मचारियों ने जयपुर स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय का घेराव किया। कार्यकर्ताओं ने विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।



अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक मांगों पर सम्मानजनक समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर जयपुर में प्रदेशव्यापी महापड़ाव आयोजित किया जाएगा।



1 जुलाई से जारी है आंदोलन

संघ के संस्थापक संरक्षक छोटीलाल बुनकर ने बताया कि कार्यकर्ताओं ने 1 जुलाई से 6 जुलाई तक कार्य बहिष्कार किया था। 7 जुलाई से अनिश्चितकालीन ताला बंदी और आम हड़ताल शुरू हो गई है। इससे प्रदेशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताले लटके हैं और बच्चों की पढ़ाई-पोषण प्रभावित हो रहा है।



BJP का वादा याद दिलाया

छोटीलाल बुनकर ने कहा कि भाजपा (Bharatiya Janata Party) ने चुनावी घोषणा पत्र में मध्यप्रदेश मॉडल के आधार पर मानदेय बढ़ाने का वादा किया था।



लेकिन आज भी राजस्थान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मात्र 6 हजार से 10 हजार रुपए तक मानदेय मिल रहा है। जबकि मध्यप्रदेश में यह राशि बढ़ाकर 15 हजार रुपए की जा चुकी है।



प्रमुख मांगें क्या हैं?

संघ की मांगों में नियमितीकरण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट नीति बनाना, नियमितीकरण तक न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप 20 हजार से 26 हजार रुपए मासिक मानदेय देना शामिल है।



इसके अलावा 2025 के बजट में घोषित सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी लागू करने, परियोजनाओं में ठेका प्रथा समाप्त करने, गैर-आईसीडीएस (Integrated Child Development Services) कार्यों पर रोक लगाने और लंबित प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग भी है।



खुद की जेब से देना पड़ रहा है भवन का किराया

संघ की प्रदेशाध्यक्ष रचना शर्मा ने बताया कि कई स्थानों पर आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन का किराया भी कर्मचारियों को अपनी जेब से देना पड़ रहा है। मानदेय समय पर नहीं मिलता और जब मिलता है तो किस्तों में। इससे आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है।



नौकरी जाने की धमकी पर भड़का आक्रोश

छोटीलाल बुनकर ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बजाय कार्मिकों को सेवा से पृथक करने की धमकी देकर आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों में और अधिक आक्रोश बढ़ रहा है। महिला कर्मचारियों का शांतिपूर्ण धरना उनका संवैधानिक अधिकार है।



महापड़ाव की चेतावनी

संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार उच्च स्तर पर वार्ता कर सम्मानजनक समाधान नहीं निकालती तो प्रदेशभर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का जयपुर में महापड़ाव आयोजित किया जाएगा और आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा।



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