आयुर्वेद विश्वविद्यालय में मंत्र चिकित्सा, अब बीमारियों का ऐसे होगा इलाज

Purshottam Kumar Joshi | Jan 20, 2026, 11:56 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने मंत्र चिकित्सा से बीमारियों के इलाज की पहल की है। इसमें आईआईटी से मदद मिलेगी। बताया जाता है कि रात्रिसूक्तम मंत्र के परिणाम उत्साहजनक मिले हैं।

News In Short

  1. राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में मंत्र चिकित्सा से बीमारियों का इलाज शुरू।
  2. विश्वविद्यालय में मंत्र चिकित्सा केंद्र की स्थापना की जाएगी।
  3. IIT जोधपुर से मदद लेकर मंत्र चिकित्सा के प्रभाव पर वैज्ञानिक शोध किया जाएगा।
  4. रात्रिसूक्तम मंत्र का प्रयोग कर आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने क्लीनिकल ट्रायल किए।
  5. विश्वविद्यालय में आयुर्वेदिक उत्पादों का व्यवसायीकरण शुरू करने की योजना।

News In Detail

राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने अब मंत्र चिकित्सा के माध्यम से बीमारियों के इलाज की पहल की है। विश्वविद्यालय में मंत्र चिकित्सा केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसमें विभिन्न मंत्रों का प्रयोग करके क्लीनिकल ट्रायल किए जाएंगे। इसके लिए आईआईटी जोधपुर से मदद ली जाएगी, ताकि मंत्र चिकित्सा के प्रभाव को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया जा सके। हाल ही में विश्वविद्यालय ने रात्रिसूक्तम मंत्र पर सकारात्मक क्लीनिकल ट्रायल किए हैं। अब इस दिशा में और शोध की उम्मीदें बढ़ गई हैं।



मंत्री चिकित्सा का आगाज

राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने बीमारियों के इलाज में मंत्र चिकित्सा की शुरुआत की है। इसके तहत, विश्वविद्यालय में मंत्र चिकित्सा केंद्र खोला जाएगा, जहां मरीजों पर मंत्र चिकित्सा के क्लीनिकल ट्रायल किए जाएंगे। विश्वविद्यालय ने इस पहल में आईआईटी जोधपुर से भी मदद लेने की योजना बनाई है ताकि मंत्र चिकित्सा के प्रभाव को वैज्ञानिक प्रमाण मिले।



मंत्र चिकित्सा केंद्र की स्थापना

राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में अब एक नया कदम बढ़ाया गया है, जिसमें मंत्रों के जरिए बीमारियों का इलाज किया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय में एक मंत्र चिकित्सा केंद्र की स्थापना की जाएगी, जहां विभिन्न मंत्रों का उपयोग करके क्लीनिकल ट्रायल किए जाएंगे। इस प्रयोग का उद्देश्य मंत्र चिकित्सा के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन करना है।



आयुर्वेद की तीन चिकित्सा पद्धतियां

आयुर्वेद में तीन प्रमुख चिकित्सा पद्धतियां होती हैं:



  1. युक्ति व्यपाश्रय: इसमें पंचकर्म, शल्यकर्म और दवाइयां दी जाती हैं।
  2. देव व्यपाश्रय: इसमें मंत्र चिकित्सा, उपवास, ध्वनि थैरेपी, अनुष्ठान आदि शामिल हैं।
  3. सत्वावजय: इसमें मानसिक शांति और संकेंद्रण के जरिए चिकित्सा की जाती है।

विवि ने दूसरी पद्धति, मंत्र चिकित्सा और उपवास को चुनने का निर्णय लिया है और इसे और बेहतर बनाने के लिए एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार की जा रही है।



रात्रिसूक्तम मंत्र का सफल प्रयोग

हाल ही में आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने रात्रिसूक्तम मंत्र पर क्लीनिकल ट्रायल किया था, जिसमें छह मरीजों पर इसके प्रभाव का परीक्षण किया गया। इस ट्रायल में सकारात्मक परिणाम सामने आए, जिससे विश्वविद्यालय को अन्य मंत्रों पर भी शोध करने की प्रेरणा मिली। अब विश्वविद्यालय इस दिशा में और शोध करने का विचार कर रहा है और यह उम्मीद जताई जा रही है कि मंत्र चिकित्सा के माध्यम से कई बीमारियों का इलाज संभव हो सकता है।



आयुर्वेद के उत्पादों का व्यवसायीकरण

आयुर्वेद विश्वविद्यालय में रसायनशाला (Pharmacy) के व्यवसायीकरण पर भी काम चल रहा है। कुलगुरु प्रो. गोविंद सहाय शुक्ल की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई, जिसमें चूर्ण, वटी, सीरप, तेल, और कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण और विपणन पर सहमति बनी। यह पहल विश्वविद्यालय को आत्मनिर्भर बनाने और गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उत्पादों को आमजन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



मुख्य बिंदु :

  • आयुर्वेद के उपचार :राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में मंत्र चिकित्सा का प्रयोग मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल के माध्यम से किया जाएगा, और इसके प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।
  • आईआईटी जोधपुर विश्वविद्यालय की मदद करेगा ताकि मंत्र चिकित्सा के प्रभाव को वैज्ञानिक प्रमाण मिल सकें और इस विषय में और शोध किया जा सके।
  • आयुर्वेद विश्वविद्यालय चूर्ण, वटी, सीरप, तेल, और कॉस्मेटिक उत्पादों का व्यवसायीकरण करेगा, जिससे यह विश्वविद्यालय आत्मनिर्भर बनेगा और आमजन को प्रमाणित आयुर्वेदिक औषधियां उपलब्ध हो सकेंगी।

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