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Photograph: (the sootr)
News In Short
—एसीबी को पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के खिलाफ जांच की मंजूरी मिली।
—मामला आंजना के कार्यकाल में सहकारी विभाग में हुए नियुक्ति घोटाले का।
—आरोप है कि जिला स्तर पर नियुक्तियों में नियमों को रखा ताक पर।
—जांच में 1100 से अधिक नियुक्तियों में भारी भ्रष्टाचार के सबूत मिले।
—एसीबी जल्द ही इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करने की तैयारी में।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान की राजनीति में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर फिर गर्माहट आ गई है। जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल पर एक्शन के बाद अब भ्रष्ट्राचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का शिकंजा पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना पर कसता दिख रहा है। राज्य सरकार ने सहकारी विभाग में हुए नियुक्तियों के बड़े घोटाले में आंजना के खिलाफ जांच की मंजूरी दे दी है।
​क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला ग्राम सेवा सहकारी समितियों में प्रबंधकों की नियुक्ति में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 2022-23 के दौरान प्रदेश भर के जिला और खंड स्तर पर बनी स्क्रीनिंग कमेटियों ने नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को व्यवस्थापक और सहायक व्यवस्थापक के पदों पर तैनात कर दिया।
जांच में धांधली की पुष्टि
जांच में सामने आया है कि नियुक्ति के दौरान तय पात्रता मानदंडों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। ऐसे कई लोगों को नियुक्त किया गया, जो संबंधित पद के लिए आवश्यक योग्यता ही पूरी नहीं करते थे। प्राथमिक जांच के अनुसार 1100 से अधिक नियुक्तियों में भारी भ्रष्टाचार और धांधली के सबूत मिले हैं।
एफआईआर दर्ज करने की तैयारी​
​सहकारी विभाग ने आंतरिक जांच के आधार पर पहले ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दे दी थी। हालांकि, पूर्व मंत्री के खिलाफ जांच के लिए प्रक्रिया थोड़ी लंबी रही। एसीबी ने पहले इस संबंध में एक प्रस्ताव राजभवन भेजा था, जिसे तकनीकी आधार पर वापस भेज दिया गया था।
​इसके बाद एसीबी ने विभाग के माध्यम से विधिवत प्रस्ताव तैयार कर दोबारा भेजा। अब विभाग की हरी झंडी मिलने के बाद मामला एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है और एसीबी जल्द ही इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करने की तैयारी में है।
​राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई
​इधर, पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों पर इस मामले में आरोप लगे थे, उन्हें पहले ही कोर्ट से राहत मिल चुकी है। उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए संकेत दिया है कि यदि एसीबी कोई कदम उठाती है तो वे न्याय के लिए फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
कई अधिकारी आ सकते हैं जद में
भ्रष्टाचार के इस मामले में न केवल नेता, बल्कि जिला स्तर की स्क्रीनिंग कमेटियों में शामिल कई रसूखदार अधिकारी भी जांच की जद में आने वाले हैं। यदि 1100 नियुक्तियों में धांधली साबित होती है, तो यह प्रदेश के सहकारिता ढांचे में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
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