राजस्थान में बीटी कपास उगाने की तैयारी, 34 कंपनियों को मिली हरी झंडी, सख्त नियमों का करना होगा पालन
News In Short
- राजस्थान में खरीफ सीजन 2026 से बीटी कपास के हाइब्रिड बीजों की बिक्री को हरी झंडी।
- 34 कंपनियों को मिली बीटी कपास बेचने की अनुमति, सख्त नियमों का पालन अनिवार्य।
- बीटी कपास के लिए रिफ्यूज बीज अनिवार्य, खेती में फसल बीमारी की रोकथाम की योजना।
- किसानों के लिए बीज गुणवत्ता मानक सुनिश्चित करने के लिए QR कोड और फिक्स कीमतें।
- बीटी कपास के हाइब्रिड बीजों की बिक्री पर निगरानी, 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में खेती से जुड़ी बड़ी खबर है। केंद्र सरकार की अनुमति के बाद राज्य में खरीफ सीजन 2026 से बीटी कपास (Bt Cotton) के हाइब्रिड बीजों की बिक्री का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, दावा है कि इस बार सरकार मुनाफे से ज्यादा मजबूती पर जोर दे रही है। कृषि विभाग ने 34 बड़ी बीज कंपनियों को अनुमति दी है, लेकिन उनके लिए नियमों की एक ऐसी फेहरिस्त तैयार की है, जिससे लापरवाही की गुंजाइश को खत्म किया जा सके।
GEAC की मुहर के बाद शुरू होगी सप्लाई
नियमों के मुताबिक, किसी भी राज्य में बीटी कपास की कमर्शियल खेती के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) की सिफारिश अनिवार्य होती है। राजस्थान कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार खरीफ-2026 के लिए औपचारिक अनुमति जारी कर दी गई है।
ट्रायल के बिना एंट्री नहीं
सरकार ने साफ कर दिया है कि हर बीज का पहले टेस्ट होगा। कंपनियों को 30 अप्रैल 2026 तक बीज जमा कराने होंगे, जिनका कृषि फार्मों पर ट्रायल चलेगा। केवल उन्हीं बीजों को दोबारा टेस्ट से राहत मिलेगी, जिनका पिछले दो सालों से सफल परीक्षण चल रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को वही बीज मिले जो राजस्थान की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल हों।
श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के लिए 'स्पेशल नो'
उत्तरी राजस्थान की कपास बेल्ट यानी श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर के लिए सरकार बेहद सतर्क है। सफेद मक्खी (White Fly) और कॉटन लीफ कर्ल वायरस (CLCuD) के प्रति संवेदनशील होने के कारण बीजों की बिक्री इन जिलों में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। सरकार नहीं चाहती कि फसल में बीमारी लगने से किसानों को आर्थिक घाटा हो।
कंपनियों को बनना होगा टीचर
एक अधिकारी के अनुसार सिर्फ बीज बेचना ही कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि उन्हें किसानों को तीन चरणों में ट्रेनिंग देनी होगी:
बुवाई से पहले: बीजों का चयन और जमीन की तैयारी।
फसल की वृद्धि के दौरान: खाद और उर्वरक का सही प्रबंधन।
कटाई के समय: फसल की सुरक्षा और अधिकतम पैदावार के तरीके।
रिफ्यूज बीज (Refuge Seeds) पर सख्त नजर
गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) जैसी बीमारियों से बचने के लिए रिफ्यूज बीज (20% या खेत के किनारे 5 कतारें लगाना) अनिवार्य है। कंपनियां और विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि रिफ्यूज बीज सही मात्रा में हों। रिफ्यूज बीज वे बीज होते हैं जो खासतौर पर कीटों से बचाव के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ये बीज कीट प्रतिरोधी बीजों के पास उगाए जाते हैं ताकि कीटों का नियंत्रण बना रहे और कीट प्रतिरोधी बीजों का असर कम न हो।
पैक पर QR कोड और फिक्स दाम
धोखाधड़ी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने डिजिटल हथियार अपनाया है:
QR कोड: हर पैकेट पर QR कोड और कंपनी का नंबर होगा, जिससे किसान बीज की असलियत जान सकेंगे।
कीमत पर लगाम: कोई भी कंपनी सरकार द्वारा तय की गई अधिकतम सीमा से ज्यादा दाम नहीं वसूल पाएगी।
सहकारी संस्थाओं का रोल: छोटे किसानों को आसानी से बीज मिले, इसके लिए 15-20% बीज KVSS, GSS और FPOs के जरिए बांटे जाएंगे।
कंपनियों को देनी होगी हर 15 दिन में रिपोर्ट
बीज कंपनियों को जिलेवार अपनी बिक्री योजना बतानी होगी और हर 15 दिन में सरकार को प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। विभाग न केवल बीज की क्वालिटी पर नजर रखेगा, बल्कि फसल कटाई के बाद भी एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी ताकि भविष्य की नीतियां बेहतर बनाई जा सकें।
क्या है बीटी कपास?
बीटी कपास (Bt Cotton) एक प्रकार का कपास है, जिसे जेनेटिकली इंजीनियर किया गया है। इसमें एक खास प्रकार का जीन डाला जाता है। इसे Bacillus thuringiensis नामक बैक्टीरिया से लिया जाता है। यह जीन कपास के पौधों को कीटों से बचाव करने की क्षमता देता है, खासकर उन कीटों से जो कपास की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
बीटी कपास की फसल में कीटों के कारण होने वाली क्षति कम होती है, जिससे फसल की उपज बेहतर होती है। साथ ही बीटी कपास के प्रयोग से किसानों को कम कीटनाशक छिड़काव की आवश्यकता होती है, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। लेकिन लंबे समय तक बीटी कपास की खेती से कुछ कीटों में प्रतिरोध विकसित हो सकता है। इसका उपयोग जैविक विविधता को भी प्रभावित कर सकता है। अतः इसके नफा और नुकसान दोनों हैं।
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