गहलोत का हमला- भजनलाल जी, आपका नाम लोकतंत्र की हत्या करने वाले CM के रूप में दर्ज हुआ
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में सोमवार को निकाय प्रमुख चुनाव के नतीजे आए।
- 301 निकायों में से 197 में भाजपा के मेयर-चेयरमैन जीते।
- कांग्रेस के 94, निर्दलीय 7 और आप, सीपीएम, के एक-एक अध्यक्ष बने।
- सात नगर निगम में से 6 में भाजपा का महापौर चुना गया है।
- अशोक गहलोत ने सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
Jaipur: राजस्थान में सोमवार को मेयर, सभापति और पालिका अध्यक्ष के नतीजों में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की। अब तक घोषित 301 निकाय प्रमुखों के चुनावों में भाजपा ने 197 और कांग्रेस ने 94 पद जीते। 7 जगह निर्दलीय जीते। आम आदमी पार्टी, माकपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) को एक-एक पद मिला। 7 नगर निगमों में भी 6 मेयर भाजपा के बने, जबकि बीकानेर में कांग्रेस का महापौर जीता।
इन नतीजों के बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि निकायों में बोर्ड बनाने के लिए सत्ता और सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल किया गया। गहलोत ने पार्षदों को पैसे का लालच देने, पुलिस-प्रशासन के जरिए दबाव बनाने और कार्रवाई का डर दिखाने जैसे आरोप लगाए। हालांकि भाजपा इन आरोपों से इनकार करती रही।
भाजपा ने बोर्ड बनाने के लिए कानून की उड़ाई धज्जियां: गहलोत
गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट कर निकाय प्रमुखों के चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने अपने बोर्ड बनाने के लिए नियम-कानून और राजनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया।
उन्होंने दावा किया कि पुलिस, प्रशासन और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बनाया गया। गहलोत ने इसे जनमत को प्रभावित करने की कोशिश बताया।
गहलोत का आरोप- पार्षदों को 2-2 करोड़ के ऑफर मिले
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आरोप लगाया कि कुछ जगह एक-एक पार्षद के लिए दो करोड़ रुपए तक का ऑफर दिया गया। इससे पहले भी उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्षदों को दो-दो करोड़ रुपए का लालच दिए जाने का आरोप लगाया था।
उनका दावा है कि कांग्रेस पार्षदों पर अलग-अलग तरीके से दबाव बनाया गया। किसी को मकान अवैध होने का नोटिस दिया गया तो कहीं प्रतिष्ठानों को सील करने की कार्रवाई हुई। कुछ पार्षदों को मुकदमों में पुलिस के सामने पेश होने के नोटिस दिए जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया। गहलोत ने यह भी दावा किया कि बाड़ेबंदी में मौजूद पार्षदों तक पुलिस पहुंची और उन्हें वहां से ले जाने की कोशिश की गई।
न्याय के लिए कांग्रेस को जाना पड़ा हाईकोर्ट
गहलोत ने चुनाव से पहले राजस्थान हाईकोर्ट में हुई देर रात की सुनवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे सरकार की कार्रवाई से जोड़ते हुए कहा कि हालात ऐसे बने कि हाईकोर्ट को रात में चुनाव से जुड़े मामलों पर सुनवाई करनी पड़ी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने रविवार देर रात विशेष सुनवाई में हनुमानगढ़ और बीकानेर से जुड़े मामलों में पार्षदों को अंतरिम राहत दी थी। अलग मामले में कुचेरा के तेजपाल मिर्धा को भी अंतरिम सुरक्षा मिली थी।
गहलोत ने अदालत से मिली राहत को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। हालांकि अदालत की अंतरिम राहत को सरकार के खिलाफ अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस पार्षदों को यूपी और हरियाणा पुलिस ने भी किया परेशान
गहलोत ने आरोप लगाया कि मामला राजस्थान की पुलिस तक सीमित नहीं रहा। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस का भी इस्तेमाल राजस्थान के निर्वाचित पार्षदों को प्रभावित करने के लिए किया गया। उन्होंने इसकी तुलना दूसरे राज्यों में सामने आए हॉर्स ट्रेडिंग और एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोपों से की।
गहलोत ने मथानिया, पावटा, तिजारा, कुचेरा, हनुमानगढ़, गंगानगर, अलवर और निम्बाहेड़ा के घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन जगहों पर सामने आए घटनाक्रम चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। गहलोत ने आशंका जताई कि आने वाले पंचायत चुनाव में भी सरकारी तंत्र का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
CM भजनलाल पर गहलोत ने साधा निशाना
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को मुख्यमंत्री से इस तरह के काम की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। साथ ही नौकरशाही और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
गहलोत ने कहा कि सरकारी अधिकारियों ने संविधान की शपथ ली है। ऐसे में उन्हें सोचना चाहिए कि राजनीतिक मामलों में उनकी भूमिका क्या होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय आने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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