राजस्थान में सूखे से फसलें बर्बाद, अफसर चुनाव में व्यस्त, गिरदावरी और मुआवजे पर सवाल, किसान नेता बोले- चुनाव सरकार का बहाना

Raghvendra Singh Rathore | Oct 19, 2026, 20:57 IST
राजस्थान में गिरदावरी पर सवाल, अफसर चुनाव में व्यस्त; रामपाल जाट ने सरकार पर लगाए आरोप
राजस्थान में सूखे से फसल खराबे के बीच गिरदावरी और मुआवजे पर सवाल उठ रहे हैं। द सूत्र से बातचीत में कई अधिकारियों ने पंचायत चुनाव में व्यस्त होने की बात कही। किसान नेता रामपाल जाट ने इसे सरकार का बहाना बताते हुए समय पर गिरदावरी नहीं कराने का आरोप लगाया। उन्होंने पुराने नियमों में सुधार और किसानों को जल्द राहत देने की मांग की।

राजस्थान में सूखे से परेशान किसानों के सामने अब सरकारी व्यवस्था की परेशानी भी खड़ी हो गई है। पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में बारिश की कमी से फसलों को नुकसान होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों को राहत देने के लिए फसल खराबे का सही आकलन जरूरी है, लेकिन जिन अधिकारियों से जानकारी मांगी गई, उनमें से कई ने चुनावी काम में व्यस्त होने की बात कही हैं।



द सूत्र ने फसल खराबे की गिरदावरी, सरकारी राहत और मुआवजे की स्थिति जानने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। बातचीत में अधिकारियों की ओर से बार-बार पंचायत चुनाव के काम में व्यस्त होने की बात सामने आई।



सवाल यह है कि जब सरकारी अधिकारी चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं, तो सूखे से प्रभावित किसानों की फसलों का नुकसान कौन देख रहा है? कितने गांवों में गिरदावरी हुई, कितनों में बाकी है और कितने किसानों को राहत मिली, इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी नहीं मिल पाया है।



इस मामले में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत चुनाव को बहाना बनाकर किसानों का काम टाला जा रहा है।



अधिकारियों से पूछा गिरदावरी का हाल, जवाब मिला- चुनाव में व्यस्त हैं

राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इसका असर दूसरे सरकारी कामों पर कितना पड़ रहा है, यह सवाल अब किसानों की गिरदावरी और राहत व्यवस्था को लेकर भी उठ रहा है।



द सूत्र ने जब फसल खराबे की स्थिति जानने के लिए अधिकारियों से बातचीत की, तो कई अधिकारियों ने पंचायत चुनाव के काम में व्यस्त होने की बात कही।



कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फसल बीमा से जुड़ा काम उनके विभाग के पास है, जबकि गिरदावरी और फसल खराबे से जुड़ी सरकारी राहत की प्रक्रिया राजस्व और संबंधित विभागों के माध्यम से आगे बढ़ती है।आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से भी संपर्क किया गया। वहां से भी चुनाव संबंधी काम में व्यस्त होने की बात सामने आई।



चुनाव सरकार का बहाना, तीन दिन में हो सकती है एक गांव की गिरदावरी: रामपाल जाट

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने द सूत्र से बातचीत में सरकार पर जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया।



उन्होंने कहा, "चुनाव सरकार का बहाना है। एक गांव में गिरदावरी करने में तीन दिन से ज्यादा समय नहीं लगता। फसल जुलाई में बोई गई थी। जब सरकार को पता था कि पंचायत चुनाव आने वाले हैं, तो गिरदावरी पहले क्यों नहीं कराई गई?"



जाट ने कहा कि सरकार चुनाव का हवाला देकर किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। फसल खराब होने के बाद समय पर उसका आकलन नहीं होगा, तो किसानों को राहत मिलने में भी परेशानी होगी।



उनका आरोप है कि सरकार किसानों के मामले में गंभीर नहीं है। चुनाव की तैयारियां पहले से चल रही थीं, इसलिए गिरदावरी और दूसरे जरूरी काम समय पर पूरे कराने की व्यवस्था भी पहले ही की जानी चाहिए थी।



1956 का कानून, 1957 के नियम; फसल का समय बदला, गिरदावरी की तारीखें वही

राजस्थान में फसलों की गिरदावरी राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 के तहत बने भू-अभिलेख नियम, 1957 के अनुसार होती है। इन नियमों के नियम 58 में खरीफ की नियमित गिरदावरी के लिए 16 सितंबर से 15 अक्टूबर तक का समय तय है।



रामपाल जाट ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले कई फसलों को पकने में करीब 120 दिन लगते थे, लेकिन अब कम समय में तैयार होने वाली फसलें भी हैं। कई फसलें करीब 60 दिन में तैयार हो जाती हैं।



जाट के अनुसार, ऐसी फसलों की कटाई गिरदावरी शुरू होने से पहले हो सकती है। जब खेत से फसल कट चुकी हो, तो उसके नुकसान का सही आकलन करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को फसलों की बदलती अवधि के अनुसार गिरदावरी की व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।



नियम में 15 दिन पहले गिरदावरी की छूट, फिर भी देरी क्यों?

राजस्थान भू-राजस्व (भू-अभिलेख) नियम, 1957 के नियम 58 में जल्दी पकने वाली फसलों के लिए विशेष व्यवस्था भी है। इसके अनुसार, फसल सामान्य समय से पहले तैयार होने पर जिला कलेक्टर गिरदावरी का काम तय समय से 15 दिन पहले शुरू कराने की अनुमति दे सकते हैं।



यानी नियम में पहले गिरदावरी कराने की गुंजाइश मौजूद है। अब सवाल यह है कि खरीफ 2026 में कितने जिलों में इस व्यवस्था का इस्तेमाल हुआ? क्या जल्दी तैयार होने वाली फसलों का आकलन समय पर किया गया?



गहलोत ने भी उठाए सूखे पर सवाल, सरकार से राहत कार्य शुरू करने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पश्चिमी राजस्थान में सूखे के हालात को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। 18 अक्टूबर को जैसलमेर दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और जोधपुर सहित कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं।



पानी और चारे की कमी से पशुपालकों को परेशानी हो रही है। गहलोत ने सरकार पर हालात की गंभीरता नहीं समझने का आरोप लगाते हुए जल्द गिरदावरी कराने, प्रभावित किसानों को राहत देने और पशुओं के लिए पानी व चारे की व्यवस्था करने की मांग की।



फसल खराबे का सर्वे सैटेलाइट और ड्रोन से क्यों नहीं?

रामपाल जाट ने गिरदावरी की पुरानी व्यवस्था के साथ फसल नुकसान के आकलन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार सैटेलाइट और ड्रोन की मदद से फसलों की स्थिति का आकलन कर सकती है। इससे कम समय में बड़े इलाके की जानकारी जुटाई जा सकती है।



जाट का आरोप है कि सरकार फसल खराबे की जांच को आधुनिक बनाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रही है। हालांकि, ड्रोन और सैटेलाइट से मिले आंकड़ों के आधार पर हर खेत के नुकसान का अंतिम फैसला करना हमेशा संभव नहीं होता। कई मामलों में जमीन पर जांच भी जरूरी होती है।



राजस्थान के किसी जिले में आदान अनुदान नहीं मिला: रामपाल जाट

रामपाल जाट ने किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान के किसी भी जिले में अभी तक किसानों को फसल खराबे के बदले कृषि आदान अनुदान नहीं मिला है।



कृषि आदान अनुदान वह सहायता है, जो प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर पात्र किसानों को तय सरकारी नियमों के अनुसार दी जाती है। जाट का कहना है कि किसानों को नुकसान के बाद समय पर राहत मिलनी चाहिए, लेकिन सरकारी व्यवस्था में देरी हो रही है।



गांव में बने समिति, किसान भी हो शामिल: जाट

रामपाल जाट ने फसल खराबे की जांच और राहत प्रक्रिया में सुधार के लिए गांव स्तर पर समिति बनाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इस समिति में पटवारी, कृषि पर्यवेक्षक, सरपंच, ग्राम सेवा सहकारी समिति के प्रतिनिधि और एक प्रभावित किसान को शामिल किया जाना चाहिए।



जाट के अनुसार, पटवारी खेत और खसरे का रिकॉर्ड देख सकता है। कृषि पर्यवेक्षक फसल के नुकसान का आकलन कर सकता है। सरपंच किसानों और प्रशासन के बीच संपर्क का काम कर सकता है।



इसी तरह ग्राम सेवा सहकारी समिति के प्रतिनिधि को गांव के किसानों की जानकारी होती है। प्रभावित किसान को समिति में रखने से नुकसान झेल रहे लोगों की बात सीधे सामने आ सकेगी। जाट का कहना है कि ऐसी व्यवस्था से गिरदावरी और राहत की प्रक्रिया में किसानों की भागीदारी बढ़ सकती है।



सरकार चंदादाताओं की, किसान सिर्फ मतदाता: रामपाल जाट

रामपाल जाट ने सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह सरकार चंदादाताओं की है, किसान सिर्फ मतदाता है।" जाट का आरोप है कि सरकार किसानों को समय पर राहत देने के बजाय उनके काम में देरी कर रही है।



उन्होंने गिरदावरी की व्यवस्था में सुधार करने और फसल खराबे का जल्द आकलन कराने की मांग की। उनका कहना है कि जब सरकार को चुनाव की जानकारी पहले से थी, तो किसानों के जरूरी काम समय पर पूरे करने की जिम्मेदारी भी उसी की थी।



अब सरकार को बताना होगा- कितनी गिरदावरी हुई, कितने किसानों को राहत मिली?

राजस्थान में नियमित गिरदावरी का काम राजस्व विभाग के माध्यम से होता है। वहीं, प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर राहत और कृषि आदान अनुदान की प्रक्रिया में आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग की भूमिका रहती है। फसल बीमा से जुड़े मामलों में कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की अलग जिम्मेदारी होती है।



द सूत्र की बातचीत में अधिकारियों ने पंचायत चुनाव के काम में व्यस्त होने की बात कही है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि सभी जिलों में गिरदावरी चुनाव के कारण ही रुकी है।

Tags:
  • गिरदावरी
  • रामपाल जाट
  • किसान महापंचायत
  • पंचायत चुनाव
  • फसल खराबा
  • राजस्व विभाग
  • किसान मुआवजा
  • Rajasthan Girdawari 2026
  • Rampal Jat
  • Rajasthan Drought