फ्रीज बैंक खातों के लिए शुरू हुआ GRM मॉड्यूल, अब नहीं काटने होंगे बैंक और पुलिस के चक्कर

Jageshwar prasad | May 19, 2026, 15:31 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान पुलिस ने साइबर ठगी में फ्रीज हुए बैंक खातों के लिए ऑनलाइन समाधान GRM मॉड्यूल शुरू किया है। अब खाताधारकों को बैंक और पुलिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। तीन स्तरों पर जिम्मेदारी तय की गई है। इसमें अपील की भी सुविधा होगी।

News In Short

  • साइबर ठगी में फ्रीज बैंक खातों के लिए शुरू हुआ ऑनलाइन समाधान।
  • GRM मॉड्यूल के तहत अब नहीं लगाने पड़ेंगे बैंक-पुलिस के चक्कर।
  • पहले बैंक शाखा में आवेदन, फिर ऑनलाइन होगी पूरी कार्रवाई।
  • थाना स्तर पर शिकायत खारिज होने पर अपील की भी व्यवस्था।
  • राज्य, जिला और थाना स्तर पर पुलिस व बैंक की तय हुई जिम्मेदारी।

News In Detail

डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर ठगी के साथ-साथ एक बड़ी समस्या यह भी सामने आ रही थी कि किसी फ्रॉड का पैसा गलती से किसी निर्दोष व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर होने पर पुलिस पूरा बैंक अकाउंट ही फ्रीज कर देती थी। इससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।



इस जटिल समस्या को स्थाई रूप से खत्म करने के लिए राजस्थान साइबर पुलिस ने एक बेहद पारदर्शी और जवाबदेह ऑनलाइन सिस्टम लागू किया है। इस सिस्टम का नाम GRM (Grievance Redressal Mechanism) मॉड्यूल है, जिसे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने विकसित किया है।



क्या है यह नया ?

एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह के अनुसार, GRM (शिकायत निवारण प्रणाली) एक अत्याधुनिक ऑनलाइन मॉड्यूल है। यह नेशन



GRM मॉड्यूल

ल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के समन्वय से काम करता है।



इसका मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों की निष्पक्ष जांच करते हुए उन वास्तविक और निर्दोष खाताधारकों को तुरंत वित्तीय राहत पहुंचाना है, जिनका खाता किसी तकनीकी या संदिग्ध वजह से लॉक हो गया है।



पहले क्या होता था?

जब कोई व्यक्ति ठगी का शिकार होता है, तो पुलिस जांच के दौरान उस ट्रांजैक्शन से जुड़े कई बैंक खातों को फ्रीज या लियन (रोक) कर देती है। इनमें कई बार ऐसे लोगों के खाते भी शामिल होते हैं जिनका उस ठगी से कोई लेना-देना नहीं होता। उनका खाता सिर्फ इसलिए फ्रीज हो जाता है क्योंकि ठगी का पैसा उनके खाते में आया या गया।



पहले ऐसे निर्दोष खाताधारकों को बैंक, पुलिस स्टेशन और कई अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। महीनों तक उनका पैसा फंसा रहता था।



अब क्या होगा?

एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि अब यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब खाताधारकों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है।



GRM मॉड्यूल कैसे काम करता है?

यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इसे समझने के लिए इन चरणों को देखें:



चरण 1 - बैंक में आवेदन


सबसे पहले खाताधारक अपनी बैंक शाखा में जाकर खाता अनफ्रीज करने का आवेदन देता है। (बाकी प्रक्रिया ऑनलाइन है)



चरण 2 - बैंक का सत्यापन


बैंक व्यक्ति के केवाईसी (KYC) और ट्रांजैक्शन की जांच करता है।



चरण 3 - GRM पोर्टल पर शिकायत


सत्यापन के बाद बैंक GRM पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है और एक Grievance ID जनरेट करता है। यह आईडी आपको ट्रैकिंग के लिए मिल जाएगी।



चरण 4 - पुलिस जांच


यह शिकायत संबंधित थाने के जांच अधिकारी को भेज दी जाती है। पुलिस ट्रांजैक्शन ट्रेल, संदिग्ध गतिविधियों और ठगी में संलिप्तता की जांच करती है। जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉल से भी खाताधारक का पक्ष सुना जा सकता है।



चरण 5 - फैसला और सूचना


जांच पूरी होने पर पुलिस तय करती है कि खाता अनफ्रीज करना है, लियन हटाना है या शिकायत खारिज करनी है। यह निर्णय बैंक को सूचित कर दिया जाता है।



अगर शिकायत खारिज हो जाए?

अगर थाना स्तर पर शिकायत खारिज हो जाती है, तो खाताधारक जिला स्तर और फिर राज्य स्तर के ग्रीवेंस रिड्रेसल ऑफिसर (GRO) के समक्ष अपील कर सकते हैं। इस व्यवस्था में किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही को रोकने के लिए पुलिस और बैंक दोनों स्तरों पर जवाबदेही के तीन-तीन स्तर (Tier) तय किए गए हैं:





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पुलिस की सलाह

राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपना ओटीपी, बैंकिंग जानकारी और पासवर्ड कभी किसी के साथ साझा न करें। अगर आपका खाता बिना किसी कारण फ्रीज हो जाए और आप निर्दोष हैं, तो तुरंत अपनी बैंक शाखा से संपर्क कर GRM प्रक्रिया शुरू करवाएं।



साइबर ठगी की सूचना के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।



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