स्कूलों की आई रैंकिंग, झुंझुनूं-हनुमानगढ़ सिरमौर, जयपुर रह गया फिसड्डी
Purshottam Kumar Joshi | Feb 09, 2026, 17:47 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था सुधारने और गुणवत्ता लाने के लिए जनवरी–2026 की जिला एकेडमिक मंथली रैंकिंग जारी कर दी है। इसमें कई जिले पूरी तरह से फिसड्डी साबित हुए है। झुंझुनूं प्रथम और हनुमानगढ़ द्वितीय रहे।
News in Short
- राजस्थान शिक्षा विभाग ने जनवरी 2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी की।
- झुंझुनूं और हनुमानगढ़ ने शिक्षा गुणवत्ता में शीर्ष स्थान हासिल किया।
- जयपुर सहित कई जिले शिक्षा की गुणवत्ता के क्षेत्र में पिछड़े।
- रैंकिंग पूरी तरह डेटा आधारित है, जिसमें CBA, ORF और बोर्ड परिणाम शामिल हैं।
- बांसवाड़ा और जैसलमेर निचले पायदान पर, विशेष सुधार योजनाएं लागू होंगी।
News in Detail
शिक्षा रैंकिंग में गुणवत्ता को प्राथमिकता
शैक्षणिक रैंकिंग में शीर्ष स्थान
कमजोर जिलों के लिए सुधार योजनाएं
रैंकिंग का डेटा आधारित दृष्टिकोण
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बयान
10 कारणों से आई रैंकिंग में बदलाव
| 1 | जनवरी 2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी |
| 2 | झुंझुनूं और हनुमानगढ़ टॉप पर |
| 3 | चूरू ने तीसरा स्थान हासिल किया |
| 4 | सीखने के परिणामों को पहली बार प्राथमिकता |
| 5 | CBA, ORF और बोर्ड परीक्षा शामिल |
| 6 | उपस्थिति और शिक्षण गुणवत्ता का मूल्यांकन |
| 7 | फील्ड विजिट से मॉनिटरिंग मजबूत |
| 8 | हर माह डेटा-आधारित समीक्षा बैठक |
| 9 | कमजोर जिलों के लिए सुधार योजना |
| 10 | तकनीक व प्रशिक्षण से गुणवत्ता शिक्षा पर जोर |
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री के भी आरोप
- नामांकन में भारी गिरावट: डोटासरा ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सरकारी स्कूलों में नामांकन में पौने दो लाख (1.75 लाख) की कमी आई है।
- शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी: उन्होंने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर तंज कसते हुए कहा कि शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय "कुत्ते भगाने" और "रामकथा" जैसे आयोजनों में ड्यूटी पर लगाया जा रहा है।
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव: उन्होंने सदन में मुद्दा उठाया कि स्कूलों की इमारतें जर्जर पड़ी हैं और वहां शौचालयों (टॉयलेट) व बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।
- पदों की रिक्तता: डोटासरा के अनुसार, प्रदेश में करीब 1.25 लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जबकि सरकार ने केवल 7,000 नई रिक्तियों की घोषणा की है।
- स्थानांतरण में भ्रष्टाचार: उन्होंने शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर "ट्रांसफर स्कैम" का आरोप लगाया और कहा कि आरएसएस (RSS) के हस्तक्षेप से बैकडोर से पोस्टिंग दी जा रही है।
- सुरक्षा और दुर्घटनाएं: झालावाड़ स्कूल हादसे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
- गोविंद सिंह डोटासरा ने तो यहां तक कहा था कि ऐसी खबरें आ रही है कि स्कूल में बेटियां पानी इसलिए नहीं पीती कि उनको बाथरूम जाना पड़ेगा और बाथरूम तो है ही नहीं तो फिर जाएँगे कहां।
स्कूलों के भवन भी जर्जर
संसाधनों का गलत उपयोग
इंग्लिश मीडियम स्कूलों की उपेक्षा: डोटासरा ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा खोले गए महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की इमारतों और सुविधाओं की उपेक्षा कर रही है ताकि उन्हें निजी स्कूलों के फायदे के लिए बंद किया जा सके।
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