राजस्थान में आबकारी विभाग के 9 में से 7 RAS पद खाली, 11 साल में राजस्व लक्ष्य ढाई गुना, अधिकारी पोस्टिंग से बना रहे दूरी
समझें क्या है पूरा मामला
- 2015-16 में आबकारी राजस्व लक्ष्य 6,712 करोड़ रुपए था।
- 2026-27 में लक्ष्य बढ़कर 17 हजार करोड़ रुपए हो गया।
- जिला आबकारी अधिकारी के 9 निर्धारित RAS पदों में से 7 खाली बताए गए हैं।
- उदयपुर और जोधपुर में अतिरिक्त आबकारी आयुक्तों को जिला स्तर का अतिरिक्त चार्ज मिला है।
- ठेकेदार यूनियन आबकारी सेवा के अधिकारियों को इन पदों पर नियुक्त करने की मांग कर रही है।
राजस्थान में आबकारी विभाग के राजस्व लक्ष्य में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2015-16 में विभाग को 6,712 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया गया था। वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 17 हजार करोड़ रुपए हो गया है। यानी 11 साल में लक्ष्य 10,288 करोड़ रुपए बढ़ गया। राजस्व लक्ष्य बढ़ने के साथ विभाग में अधिकारियों की तैनाती का मुद्दा भी सामने आया है।
जिला आबकारी अधिकारी (DEO) के RAS कैडर के 9 निर्धारित पदों में से 7 खाली बताए जा रहे हैं। उदयपुर और जोधपुर जैसे संभाग मुख्यालयों पर भी RAS अधिकारी तैनात नहीं हैं। यहां अतिरिक्त आबकारी आयुक्तों को जिला आबकारी अधिकारी का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। कुछ स्थानों पर आबकारी सेवा के अधिकारी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
लक्ष्य बढ़ा, लेकिन अधिकारियों के पद खाली
विभाग में अधिकारियों की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बीकानेर और भरतपुर को छोड़कर अन्य संभाग मुख्यालयों पर जिला आबकारी अधिकारी का चार्ज RAS अधिकारियों को दिया जाता है। इसके अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, झालावाड़ और अलवर में भी RAS कैडर के पद निर्धारित हैं, लेकिन इन जगहों पर भी RAS अधिकारियों की तैनाती नहीं होने की जानकारी सामने आई है। नियुक्ति और तबादलों का जिम्मा कार्मिक विभाग के पास है। ऐसे में विभाग में खाली पदों को भरने का फैसला भी होना है।
पहले पोस्टिंग के लिए रहती थी होड़
आबकारी विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के अनुसार, पहले इस विभाग में पोस्टिंग पाने के लिए अधिकारियों में होड़ रहती थी। अब राजस्व लक्ष्य पूरा करने का दबाव बढ़ने से स्थिति बदल गई है। RAS अधिकारी प्रशासनिक सेवा से आते हैं, जबकि आबकारी विभाग में शराब ठेकों की गारंटी पूरी करवाना और राजस्व वसूली प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। लक्ष्य पूरा नहीं होने की आशंका भी अधिकारियों के लिए चुनौती बन सकती है। आबकारी सेवा के अधिकारियों को विभागीय कामकाज और राजस्व से जुड़े मामलों का अनुभव रहता है। वे निरीक्षक से पदोन्नत होकर जिला आबकारी अधिकारी तक पहुंचते हैं, इसलिए ठेकों और राजस्व व्यवस्था की प्रक्रिया से परिचित होते हैं।
उदयपुर-जोधपुर में दोहरी जिम्मेदारी
उदयपुर और जोधपुर में जिला आबकारी अधिकारी के पद खाली होने के कारण अतिरिक्त आबकारी आयुक्त जोन को ही अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। इससे अधिकारियों को संभाग स्तर के काम के साथ जिला स्तर की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। दूसरी ओर, जयपुर और बीकानेर में अतिरिक्त आबकारी आयुक्त के पद भी खाली बताए गए हैं। ऐसे में अधिकारियों की उपलब्धता और काम के बंटवारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पंजाब बॉर्डर के जिलों में भी चुनौती
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ पंजाब सीमा से सटे जिले हैं। यहां शराब की तस्करी पर नियंत्रण, ठेकों की गारंटी पूरी करवाना और राजस्व लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौतियां हैं। इन जिलों में भी RAS अधिकारियों के पद खाली होने के कारण आबकारी सेवा के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आबकारी सेवा के अधिकारियों को पद देने की मांग
शराब ठेकेदार यूनियन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पंकज धनखड़ ने जिला आबकारी अधिकारी के पदों पर आबकारी सेवा के अधिकारियों को नियुक्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि RAS अधिकारियों को आबकारी नीति और विभागीय कामकाज समझने में समय लगता है। तबादला जल्दी होने पर ठेकेदारों की समस्याओं के समाधान में भी देरी हो सकती है।
पहले लॉटरी व्यवस्था में गारंटी नहीं बढ़ती थी, जबकि बिडिंग सिस्टम में बिक्री के लक्ष्य बढ़ गए। इन दावों और बकाया राशि के आधिकारिक आंकड़ों की विभागीय पुष्टि प्रकाशन से पहले की जानी चाहिए।