सरकारी स्कूलों का हाल, 20 हजार करोड़ खर्च, फिर भी 1900 क्लासरूम और लैब अधर में
Jaipur: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अगर आपका बच्चा पढ़ता है तो यह खबर आपके लिए चिंता का सबब बन सकती है।
झालावाड़ स्कूल हादसे से भले ही पूरा प्रदेश कांप गया था, लेकिन ऐसा लगता है कि शिक्षा विभाग ने एक साल बाद भी इससे बड़ा सबक नहीं सीखा है।
केंद्र के भारी-भरकम बजट के बीच प्रदेश की स्कूली शिक्षा का बुनियादी ढांचा आज भी ढिलाई की मार झेल रहा है।
जमीनी हकीकत में अंतर दिखा
शिक्षा मंत्रालय के प्रबंध (PRABANDH) पोर्टल के जो ताजा आंकड़े सामने आए हैं, वे कागजी वादों और जमीनी हकीकत का अंतर बताते हैं।
पिछले 5 साल में प्रदेश में बच्चों को सुरक्षित और आधुनिक माहौल देने के लिए केंद्रीय योजना समग्र शिक्षा अभियान में कुल 11,014 ढांचागत विकास कार्यों को हरी झंडी दी गई थी।
जमीनी हकीकत यह है कि इनमें से केवल 9,043 काम ही पूरे हो सके हैं। यानी आज भी 1,971 निर्माण परियोजनाएं अधूरी या पूरी तरह ठप पड़ी हैं।
जर्जर इमारतों में सुधार नहीं
सबसे गंभीर तस्वीर उन जर्जर भवनों की है, जिनका निर्माण समय पर नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में ऐसे 457 जर्जर स्कूल भवनों के सुधार और नए सिरे से निर्माण को मंजूरी मिली थी।
हैरानी की बात यह है कि इनमें से महज़ 52 भवनों का काम ही पूरा हो सका है। यानी 405 जर्जर भवनों का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है।
स्कूलों में बच्चों को बैठने की जगह मिले, इसके लिए 1,513 अतिरिक्त कक्षा-कक्ष मंजूर हुए थे। लेकिन 266 कमरों का काम आज भी अटका है।
राज्य में 1,669 साइंस लैब स्वीकृत हुईं। इनमें से 328 अधूरी हैं। वहीं डिजिटल इंडिया के दौर में 1,142 मंजूर कंप्यूटर कमरों में से 200 अब तक बन ही नहीं पाए हैं।
प्रदेश में 1,278 में से 247 लाइब्रेरी भवन नहीं बन सके। इसी तरह 376 बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) में से 129 अधूरी हैं। इससे स्कूलों का सुरक्षा घेरा ही गायब है।
बाड़मेर का हाल सबसे बेहाल: 42.8% काम लटके
यदि बात राजस्थान के दूरस्थ जिलों की करें तो वहां की तस्वीर और भी चिंताजनक है। बाड़मेर जिले में 5 साल में मंजूर 385 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से केवल 220 ही पूरे हो पाए हैं।
इसका सीधा सा मतलब है कि बाड़मेर में 42.8% यानी 165 प्रोजेक्ट्स लटके पड़े हैं। दूर-दराज के गांवों में पढ़ने वाले ग्रामीण बच्चे आज भी न तो कंप्यूटर लैब देख पा रहे हैं, न साइंस लैब में प्रयोग कर पा रहे हैं। गंभीर बात यह है कि इनके पास बैठने के लिए पक्के कमरे भी नहीं हैं।
आवंटन तो हुआ, पर काम कब होगा?
हाल ही में सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल पर केंद्रीय शिक्षा विभाग ने पिछले 5 साल (2021-22 से 2025-26) के बजटीय आंकड़े पेश किए। बजट की कमी से ज्यादा समस्या उसके क्रियान्वयन में दिखती है:
हजारों करोड़ रुपये का फंड हर साल आ रहा है। खर्च भी दिखाया जा रहा है, फिर भी निर्माण कार्यों की गति इतनी धीमी क्यों है? यह सवाल राजस्थान के पूरे प्रशासनिक तंत्र पर खड़ा होता है।
आखिर जवाबदेह कौन?
केंद्र सरकार ने सांसद के सवाल पर कहा है कि संविधान के मुताबिक शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। इसका अर्थ यह है कि स्कूल संचालन, उनकी इमारतों की मरम्मत और शिक्षकों की भर्ती करना प्राथमिक रूप से राज्यों की जिम्मेदारी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि केंद्र समग्र शिक्षा योजना में राज्यों को वित्तीय और तकनीकी मदद देती है। हालांकि, केंद्र की ओर से निगरानी भी की जाती है।
शिक्षक संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी के अनुसार जब तक अफसरों की जवाबदेही तय नहीं होगी, निर्माण कार्यों में आ रही अड़चनों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक स्मार्ट क्लासरूम और सुरक्षित स्कूल के दावे सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित रहेंगे।
क्या था झालावाड़ स्कूल हादसा?
राजस्थान में झालावाड़ के पिपलौदी गांव में जुलाई 2025 में स्कूल की इमारत ढहने से सात बच्चों की मौत हो गई थी। इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट के दो न्यायाधीश ने अलग-अलग स्व:प्रेरित प्रसंज्ञान लिया था।
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद जर्जर स्कूलों को सही करने के लिए सरकार हरकत में दिखी, लेकिन अभी भी 3,768 सरकारी स्कूल भवन असुरक्षित हैं।
हालांकि, सरकार का दावा है कि जर्जर स्कूल भवनों को ध्वस्त कर चरणबद्ध तरीके से फिर से बनाने की योजना है। अभी इन असुरक्षित परिसरों में कक्षाओं के संचालन पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
एक साल बाद भी भवन नहीं
हादसे के बाद सरकार ने हादसे से प्रभावित पिपलौदी गांव में नए स्कूल भवन निर्माण की घोषणा की थी। करीब 1.25 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह भवन एक साल बाद भी तैयार नहीं हो सका है।
भवन में आरसीसी सहित कई निर्माण कार्य अभी भी बाकी हैं। नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन बच्चों के पास बैठने की जगह नहीं है।
पिपलौदी का स्कूल एक साल से यहां के किसान मोरसिंह के घर पर चल रहा है। फिलहाल इसी घर में 90 से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
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