हाईकोर्ट ने कहा- सत्र के बीच शिक्षकों के तबादले गलत, ट्रांसफर पॉलिसी न होने पर भी उठाए सवाल

Mukesh Sharma | Jan 07, 2026, 14:51 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षकों के सामूहिक तबादलों से नाखुश है। उसने ​एक मामले की सुनवाई में कहा कि सरकार को शिक्षकों के ट्रांसफर डेढ़ माह की गर्मियों के अवकाश के दौरान करने चाहिए।

Jaipur. राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश में शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षकों के सामूहिक तबादले पर आपत्ति की है। साथ ही ट्रांसफर पॉलिसी नहीं होने और राजस्थान सिविल सर्विस अपीलेट ट्रिब्यूनल (रैट) के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को शिक्षकों के ट्रांसफर डेढ़ माह की गर्मियों के अवकाश के दौरान करने चाहिए। जस्टिस अशोक जैन ने प्रिंसिपल हरगोविंद मीणा के ट्रांसफर आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए यह फैसला दिया।



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शिक्षकों के साथ छात्र भी परेशान

हाई कोर्ट ने कहा कि शिक्षा कैलेंडर की जानकारी होने के बावजूद सरकार ने शैक्षणिक सत्र के बीच सिंतबर मे प्रिंसिपल के सामूहिक ट्रांसफर कर दिए। इससे साफ़ है कि शिक्षा प्रणाली प्रशासकों की मनमानी से संचालित हो रही है, न कि छात्रों की जरूरतों के अनुसार।


कोर्ट ने कहा कि 22 सिंतबर 2025 को शैक्षणिक सत्र के बीच सीनियर सैकेंडरी स्कूल के 4,527 प्रिंसिपल के सामूहिक ट्रांसफर करके न केवल शिक्षकों, बल्कि 4,527 स्कूलों एवं उनके छात्रों को भी परेशानी में डाल दिया।



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ना ट्रांसफर पॉलिसी, ना ही विशेष नियम

कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रदेश में ना तो कोई व्यापक ट्रांसफर पॉलिसी है और ना ही शिक्षक सहित कर्मचारियों के ट्रांसफर को नियंत्रित करने का कोई विशेष नियम हैं। राज्य से संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार शासन को बढ़ावा देने की अपेक्षा की जाती हैं। इस तरह के सामूहिक ट्रांसफर का प्रभाव न केवल कर्मचारी और उनके परिवारों पर पड़ता है, बल्कि एक शिक्षक के मामले में इसका प्रभाव छात्रों पर भी पड़ता है। खासकर उस स्कूल में, जहां शिक्षक को शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में तैनात किया है।



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रैट चैयरमेन और सदस्यों को ट्रेनिंग दी जाए

अदालत ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता का 5 महीने में दूसरी बार ट्रांसफर किया गया। लेकिन, रैट ने मैरिट पर विचार नहीं करके, बेईमान और दुर्भावनापूर्ण दृष्टिकोण अपनाया। इसी तरह के समान मामलों में ट्रांसफर आदेश को स्टे कर दिया। रैट चेयरमैन और सदस्यों से निष्पक्ष आचरण बनाए रखने और पूर्वाग्रह से बचने की अपेक्षा की जाती हैं। अदालत उस स्थिति में अपनी आंखे बंद नहीं कर सकता है, जब रैट सरकारी कर्मचारी की शिकायतों के निवारण का प्राथमिक मंच हैं।



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कोर्ट ने कार्मिक विभाग को दिए ये निर्देश

अदालत ने कार्मिक विभाग से कहा कि वह रैट चैयरमेन और सदस्यों को उचित प्रशिक्षण प्रदान करें, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट रामरख शर्मा ने पैरवी की।


इस फैसले से सरकार पर शिक्षकों के लिए एक पॉलिसी बनाने का दबाव बढ़ा है। आम तौर पर सरकार शिक्षकों के किसी भी समय ताबड़तोड़ ट्रांसफर कर स्कूलों की व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर देती है।



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मुख्य बिंदू:

  • शिक्षकों और छात्रों की स्थिति सामूहिक तबादलों के कारण शिक्षकों और छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • हाई कोर्ट ने कहा कि सामूहिक तबादलों से शिक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यह छात्रों की जरूरतों के खिलाफ है।
  • राज्य में कोई स्पष्ट ट्रांसफर पॉलिसी नहीं है, और कर्मचारियों के ट्रांसफर को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष नियम भी नहीं हैं।
  • कोर्ट ने कहा कि रैट ने बिना मेरिट पर विचार किए, बेईमानी और दुर्भावनापूर्ण दृष्टिकोण अपनाया, जिससे उचित फैसले नहीं लिए गए।
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