चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा: हाई कोर्ट का आदेश बना वरदान, 10 वीं पास बेरोजगार युवकों को मिलेगा मौका

चतुर्थ श्रेणी भर्ती में अब 10वीं पास अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने इस बारे में आदेश जारी किए है।

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Purshottam Kumar Joshi
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rajasthan High court

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • राजस्थान हाई कोर्ट में चतुर्थ श्रेणी के 5670 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू।

  • 10 लाख अभ्यर्थियों ने किया आवेदन, अब परीक्षा और इंटरव्यू से चयन होगा।

  • हाई कोर्ट ने 10वीं पास अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने का किया फैसला।

  • लिखित परीक्षा में 85 नंबर, इंटरव्यू में 15 नंबर होंगे निर्धारित।

  • कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के आदेश से बड़ी राहत मिली।

News in Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी के 5670 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस भर्ती में अब उन अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने न्यूनतम निर्धारित शैक्षिक योग्यता, यानी 10वीं कक्षा पास की है। यह निर्णय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा जारी किया गया आदेश के तहत लिया गया।

भर्ती प्रक्रिया में 10 लाख से अधिक आवेदन

राजस्थान हाई कोर्ट और अधीनस्थ अदालतों के लिए यह भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में थी। अब तक इस भर्ती के लिए 10 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। यह भर्ती उन पदों के लिए हो रही है, जिनमें शारीरिक श्रम और नियमित कार्य की आवश्यकता है। इसमें उच्च शैक्षिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है।

10वीं पास अभ्यर्थियों को प्राथमिकता

राज्य के उच्च न्यायालय कर्मचारी सेवा नियम-2002 के तहत यह भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इस नियम के अनुसार, उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को अक्सर चयन में प्राथमिकता मिल जाती थी, लेकिन इस बार केवल 10वीं पास अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह निर्णय सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों के लिए राहत की बात है।

परीक्षा और इंटरव्यू से चयन

चतुर्थ श्रेणी परीक्षा में भर्ती की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू दोनों शामिल हैं। लिखित परीक्षा के लिए 85 नंबर निर्धारित किए गए हैं, जबकि इंटरव्यू के लिए 15 नंबर निर्धारित किए गए हैं। यह व्यवस्था उम्मीदवारों को एक उचित मौका देने के लिए बनाई गई है, ताकि उन्हें उनकी वास्तविक क्षमता के आधार पर चुना जा सके।

विभागीय निर्णय से बड़ी राहत

इस संशोधन के बाद, 10वीं पास उम्मीदवारों को बेहतर मौका मिलेगा। उदाहरण के लिए, अगर उम्मीदवार ‘A’ के पास केवल 10वीं की शैक्षिक योग्यता है, तो उसे प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें अगर ‘B’ के पास वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा और ‘C’ के पास स्नातक या उससे उच्च योग्यता होगी, तो उन्हें बाद में प्राथमिकता मिलेगी। इस आदेश से न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को लाभ होगा।

सरकार को फोकस की आवश्यकता

राज्य सरकार और उच्च न्यायालय को अब इस भर्ती प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने और उम्मीदवारों को समय पर अवसर प्रदान करने के लिए मिशन मोड में काम करना चाहिए। इससे न केवल न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलेंगे।

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