विकास की राह में लटके 10 बड़े प्रोजेक्ट, 1.15 लाख करोड़ का नुकसान का अनुमान

राजस्थान में 10 प्रमुख प्रोजेक्ट में हो रही देरी से 1.15 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हो सकता है। यह देरी सरकारी खींचतान और अफसरशाही का परिणाम है।

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Purshottam Kumar Joshi
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Photograph: (the sootr)

News in Short

  • राजस्थान में चल रही 10 प्रमुख परियोजनाओं में देरी से विकास की रफ्तार धीमी हुई, जिसके कारण 1.15 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
  • बालोतरा में रिफाइनरी परियोजना की लागत 43,129 करोड़ से बढ़कर 79,459 करोड़ रुपये हो गई, और इसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया।
  • वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस परियोजना की लागत 51,101 करोड़ से बढ़कर 1,24,623 करोड़ रुपये हो गई और इसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
  • रामगंजमंडी-भोपाल नई रेल लाइन 3032 करोड़ की इस परियोजना की लागत बढ़कर 5073 करोड़ रुपये हो गई और समयसीमा भी 2025 से बढ़कर 2027 तक कर दी गई।
  • मुकुंदरा हिल्स टनल कोटा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के तहत 1000 करोड़ रुपये की टनल परियोजना में देरी और लागत वृद्धि हो रही है, अब इसे अप्रैल 2026 तक पूरा किया जाएगा।

News in Detail

राजस्थान में कई बड़े प्रोजेक्ट्स समय पर पूरा नहीं हो पा रहे हैं। इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है, बल्कि आम जनता को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इन परियोजनाओं में समय सीमा के साथ-साथ लागत में भी भारी बढ़ोतरी हो रही है। इनमें से 10 बड़े प्रोजेक्ट आज आज भी अटके हुए हैं।

पचपदरा रिफाइनरी

बालोतरा के पचपदरा में बनी रिफाइनरी परियोजना में भारी देरी हो रही है, जिसकी प्रारंभिक लागत 43,129 करोड़ रुपये थी। अब तक करीब 63,571 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और परियोजना की लागत बढ़कर 79,459 करोड़ रुपए हो चुकी है।

वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

 इस फ्रेट कॉरिडोर में देरी और लागत में बढ़ोतरी ने इसकी प्रगति को रोक दिया है। इस परियोजना का असर राज्य के औद्योगिक विकास पर भी पड़ रहा है। इस प्रोजेक्ट की लागत 51,101 करोड़ से बढ़कर 1,24,623 करोड़ रुपे हो चुकी है। यह प्रोजेक्ट मार्च 2022 से शुरू हुआ था और अब मार्च 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

रामगंजमंडी–भोपाल नई रेल लाइन

भोपाल रामगंजमंडी नई रेल लाइन: इस रेल परियोजना में 2-तिहाई से अधिक लागत वृद्धि हो चुकी है और समयसीमा भी बढ़ा दी गई है। 3032 करोड़ रुपए की इस परियोजना की लागत भी बढ़कर 5073 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसकी समय सीमा भी अब दिसंबर 2027 तक बढ़ा दी गई है।


नीमच-बड़ी सादड़ी रेल लाइन

यह रेल लाइन राजस्थान और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसमें अब तक अनुमानित लागत में वृद्धि हुई है। इसकी अनुमानित लागत 495 करोड़ से बढ़कर 825 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

मुकुंदरा हिल्स टनल

मुकुंदरा हिल्स टनल राजस्थान के कोटा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भारत की पहली और सबसे चौड़ी 8-लेन वाली सड़क सुरंग है। इसे वन्यजीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इस सुरंग की कुल लंबाई 4.9 किलोमीटर है। इसमें दो समानांतर ट्यूब हैं, जिनमें से प्रत्येक में 4 लेन हैं। यह सुरंग राजस्थान के कोटा के पास मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे से गुजरती है।

इसे एक "ग्रीन टनल" के रूप में डिजाइन किया गया है ताकि सुरंग के ऊपर स्थित टाइगर रिजर्व के जानवरों (जैसे बाघ और तेंदुए) की आवाजाही में कोई बाधा न आए। इस परियोजना की देरी से अतिरिक्त 50 करोड़ रुपये का खर्च बढ़ गया है।

देरी के कारण और प्रभाव

इन परियोजनाओं में हो रही देरी के कारण विकास की गति रुक गई है। अगर ये परियोजनाएं समय पर पूरी हो जातीं, तो न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश को त्वरित लाभ होता और 1.15 लाख करोड़ रुपए तक की बचत हो सकती थी।

आर्थिक नुकसान

देरी की वजह से राज्य को कई प्रकार का नुकसान हो रहा है। इससे न केवल सरकारी खजाना प्रभावित हो रहा है, बल्कि विकास कार्यों में भी बाधा आ रही है।

हो जातीं, तो न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश को त्वरित लाभ होता और 1.15 लाख करोड़ रुपए तक की बचत हो सकती थी।

आर्थिक नुकसान

देरी की वजह से राज्य को कई प्रकार का नुकसान हो रहा है। इससे न केवल सरकारी खजाना प्रभावित हो रहा है, बल्कि विकास कार्यों में भी बाधा आ रही है।

सरकार के प्रयास और समस्याएं

सरकारी विभागों और अफसरशाही के बीच समन्वय की कमी और राजनीति का असर इन परियोजनाओं में देरी का मुख्य कारण बन रहा है। इन मुद्दों को हल करने के लिए सरकार को त्वरित कदम उठाने की जरूरत है।

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