निकाय चुनाव टिकट: बीजेपी टिकट फॉर्मूला, अब चार परीक्षा से गुजरना होगा

Ashish Bhardwaj | Aug 22, 2026, 18:14 IST
भाजपा राजस्थान
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने टिकट तय करने का नया तरीका अपनाया है। अब सिफारिश नहीं, सर्वे और चार स्तर की जांच से ही प्रत्याशी चुने जाएंगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के लिए BJP ने टिकट प्रक्रिया बदली।
  • सिफारिश नहीं, सर्वे और फीडबैक से तय होंगे उम्मीदवार।
  • दावेदारों की चार स्तर पर होगी जांच।
  • पर्यवेक्षक और चयन समिति की रिपोर्ट होगी अहम।
  • BJP जीत की संभावना वाले चेहरों पर लगाएगी दांव।

राजस्थान में निकाय चुनाव 2026 को लेकर बीजेपी ने तैयारी तेज कर दी है। टिकट अब सिफारिश या स्थानीय प्रभाव से नहीं मिलेगा। पार्टी ने चार स्तर की जांच प्रक्रिया तय की है। सर्वे रिपोर्ट, स्थानीय संगठन, पर्यवेक्षक और चयन समिति मिलकर नाम तय करेंगे। मकसद है ऐसे उम्मीदवार चुनना जो वार्ड में जीत दिला सकें।



सिफारिश नहीं, सर्वे से तय होगा नाम

राजस्थान में निकाय चुनाव 2026 नजदीक हैं। इसे देखते हुए बीजेपी ने संगठन स्तर पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि टिकट सिफारिश के आधार पर नहीं मिलेगा।



इसके बजाय सर्वे, स्थानीय संगठन की रिपोर्ट और प्रदेश से भेजे गए प्रभारी-पर्यवेक्षकों के फीडबैक को आधार बनाया जाएगा। अंतिम फैसला प्रदेश स्तरीय चुनाव चयन समिति करेगी।



पार्टी का फोकस उन चेहरों पर है जिनकी वार्ड स्तर पर मजबूत पकड़ हो। ऐसे नेता जो पार्टी के लिए जीत की संभावना बढ़ा सकें।



चार लेयर में होगी दावेदारों की जांच

बीजेपी ने टिकट देने से पहले दावेदारों की जांच के लिए चार चरण तय किए हैं। हर चरण में अलग-अलग स्तर पर आकलन होगा।



पहला चरण, सर्वे एजेंसी की रिपोर्ट

सबसे पहले दावेदारों को सर्वे एजेंसी की रिपोर्ट से गुजरना होगा। इसमें दावेदार की लोकप्रियता और स्थानीय पकड़ देखी जाएगी।



संगठन में सक्रियता और चुनाव जीतने की संभावना भी परखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि वार्ड में दावेदार की स्वीकार्यता कितनी है।



दूसरा चरण, स्थानीय प्रभारी की जानकारी

इसके बाद स्थानीय चुनाव प्रभारी और पदाधिकारी अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसमें वार्ड के जातीय और सामाजिक समीकरण शामिल होंगे।



पिछले चुनाव का प्रदर्शन भी देखा जाएगा। साथ ही कार्यकर्ताओं और जनता के बीच दावेदार की पकड़ भी परखी जाएगी।



तीसरा चरण, पर्यवेक्षक करेंगे आकलन

तीसरे चरण में पार्टी के प्रभारी और पर्यवेक्षक मैदान में उतरेंगे। वे स्थानीय फीडबैक और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आकलन करेंगे।



इनकी रिपोर्ट को टिकट चयन की प्रक्रिया में बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी इसे अंतिम निर्णय से पहले की सबसे बड़ी कड़ी मान रही है।



चौथा चरण, चुनाव समिति तय करेगी नाम

आखिरी चरण में प्रदेश स्तरीय चुनाव चयन समिति सभी रिपोर्ट पर मंथन करेगी। सर्वे, स्थानीय संगठन और पर्यवेक्षकों का फीडबैक सामने रखा जाएगा।



इसके बाद ही समिति प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम फैसला लेगी। यही नाम पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनेगा।



पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट से साफ होगी तस्वीर

निकाय चुनाव में वार्ड स्तर के समीकरण नतीजों को सीधे प्रभावित करते हैं। इसी वजह से बीजेपी के लिए यह चुनाव खास मायने रखते हैं।



पार्टी अब बड़े नेताओं की लोकप्रियता के बजाय स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों की तलाश कर रही है। पर्यवेक्षक दावेदारों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से सीधे फीडबैक लेंगे।



इसमें देखा जाएगा कि दावेदार का संगठन में कितना प्रभाव है। साथ ही यह भी परखा जाएगा कि वह पार्टी के वोट को जीत में बदल सकता है या नहीं।



चुनाव चयन समिति पर रहेगी नजर

अब सबकी नजर प्रदेश स्तरीय चुनाव चयन समिति के गठन पर टिकी है। समिति बनने के बाद टिकट चयन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी।



पार्टी पहले सर्वे और स्थानीय फीडबैक से संभावित नामों का पैनल बनाएगी। फिर प्रभारी और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर नामों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।



इस तरह निकाय चुनाव में बीजेपी का टिकट पाना आसान नहीं होगा। दावेदारों को सर्वे से लेकर समिति तक चार स्तर की परीक्षा पार करनी होगी।



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