राजस्थान पंचायत चुनाव: गांवों में कमल खिलाने के लिए BJP ने झोंकी ताकत, 4 केंद्रीय मंत्री और 118 विधायकों को जिम्मेदारी
राजस्थान में निकाय चुनावों के बाद अब भाजपा ने पंचायती राज चुनावों की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी का लक्ष्य गांवों में अपनी पकड़ मजबूत करना और जिला प्रमुख व प्रधान के पदों पर जीत हासिल करना है। इसके लिए भाजपा ने प्रदेश से लेकर स्थानीय स्तर तक के वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है। पार्टी चाहती है कि नेता अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय कर चुनावी समीकरण मजबूत करें।
केंद्रीय मंत्रियों से लेकर विधायकों तक को मिला जिम्मा
भाजपा ने पंचायती राज चुनावों के लिए बड़े स्तर पर नेताओं की जिम्मेदारी तय की है। पार्टी की रणनीति के तहत प्रदेश अध्यक्ष, चार केंद्रीय मंत्री, राज्य सरकार के 23 मंत्री, 14 सांसद और 118 विधायकों को अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में सक्रिय रहने का टास्क दिया गया है। इन नेताओं को स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाकर पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करना होगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बैठकों में भी दिए गए निर्देश
पार्टी की चुनावी रणनीति में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बैठकों को भी अहम माना जा रहा है। इन बैठकों में नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और चुनावी जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए हैं। भाजपा का जोर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और स्थानीय मुद्दों के आधार पर मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर रहेगा।
जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव में समर्थन जुटाना चुनौती
पंचायती राज चुनाव में जिला परिषद और पंचायत समितियों के सदस्य निर्वाचित होने के बाद जिला प्रमुख और प्रधान बनाने के लिए समर्थन जुटाना अहम होता है। ऐसे में भाजपा के सामने स्थानीय गुटबाजी, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय राजनीति के बीच तालमेल बनाने की चुनौती रहेगी। वरिष्ठ नेताओं को कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाने के साथ निर्वाचित सदस्यों का समर्थन जुटाने पर भी ध्यान देना होगा।
वरिष्ठ नेताओं को गृह जिले के साथ संभाग की जिम्मेदारी
भाजपा ने कई वरिष्ठ नेताओं को पहले से ही संभाग प्रभारी की जिम्मेदारी दे रखी है। अब उन्हें अपने गृह जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान बनाने की रणनीति पर भी काम करना होगा। पार्टी के सामने स्थानीय समीकरणों को साधने और अलग-अलग गुटों को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। गांवों की राजनीति में स्थानीय संपर्क और पुराने सियासी रिश्ते भी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
जयपुर, पाली और जोधपुर में दिग्गजों पर दारोमदार
भाजपा ने अलग-अलग जिलों में स्थानीय प्रभाव रखने वाले नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। पाली में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ खुद मोर्चा संभालेंगे। जयपुर जिले में राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया, उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और सांसद राव राजेंद्र सिंह की भूमिका अहम रहेगी। जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अलवर में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को जिम्मेदारी दी गई है।
बीकानेर से भरतपुर तक नेताओं को सौंपी गई कमान
बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के साथ देवीसिंह भाटी और सुमित गोदारा की भूमिका रहेगी। भरतपुर में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, जबकि करौली और सवाई माधोपुर में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को जिम्मेदारी दी गई है। झुंझुनूं में नरेंद्र और संतोष अहलावत तथा चूरू में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ पर दारोमदार रहेगा। बाड़मेर में राज्य मंत्री केके विश्नोई को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अजमेर, कोटा और दूसरे जिलों में भी सक्रिय होंगे नेता
अजमेर में केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के साथ मंत्री सुरेश रावत और भंवर सिंह पलाड़ा की भूमिका रहेगी। चित्तौड़गढ़ में सांसद सीपी जोशी और श्रीचंद कृपलानी, भीलवाड़ा में सांसद दामोदर अग्रवाल, कोटा-बूंदी में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, झालावाड़-बारां में सांसद दुष्यंत सिंह और टोंक में जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी को जिम्मेदारी दी गई है। अब इन नेताओं के सामने स्थानीय समीकरणों को साधते हुए संगठन को मजबूत करने और पंचायतों में पार्टी की स्थिति बेहतर बनाने की चुनौती होगी।