राजस्थान: पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे संविदाकर्मी और आशा सहयोगी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को मिली छूट

Saurabh Mishra | Oct 10, 2026, 13:47 IST
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राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के लिए पंचायत चुनाव लड़ने के लिए  क्या हैं नियम।
राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के लिए पंचायत चुनाव लड़ने के लिए क्या हैं नियम।

राजस्थान में संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगी नौकरी करते हुए पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पहले इस्तीफा देना होगा। वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बिना वेतन छुट्टी लेकर चुनाव लड़ सकेंगी। राशन डीलरों को भी चुनाव लड़ने की छूट दी गई है। विद्या संबल योजना के कर्मचारियों और प्रशासक बनाए गए सरपंचों के मामले में नौकरी की शर्तें देखकर फैसला होगा।

राजस्थान में पंचायत चुनाव (Rajasthan Panchayat Election) लड़ने की तैयारी कर रहे संविदा कर्मचारियों और आशा सहयोगी के लिए बड़ी खबर है। ये कर्मचारी अपने पद पर रहते हुए पंच, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। चुनाव लड़ने के लिए पहले नौकरी छोड़नी होगी। वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को राहत दी गई है। वे बिना वेतन छुट्टी लेकर चुनाव मैदान में उतर सकेंगी।

राशन डीलर भी पंचायत चुनाव लड़ सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में सूबे के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं।

संविदा कर्मचारियों को पंचायत चुनाव लड़ने से पहले देना होगा इस्तीफा

राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि सरकारी विभागों में संविदा पर काम करने वाले कर्मचारी पद पर रहते हुए पंचायत चुनाव 2026 नहीं लड़ सकेंगे। आयोग ने संविदा कर्मचारियों के पद को लाभ का पद माना है। इसका मतलब है कि ऐसे पद पर काम करने वाले व्यक्ति को सरकार की तरफ से वेतन या दूसरी आर्थिक सुविधा मिलती है।

नियमों के मुताबिक, लाभ के पद पर रहते हुए कोई व्यक्ति पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसे में संविदा पर नौकरी कर रहे कर्मचारी अगर सरपंच, पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में ताल ठोकना चाहते हैं तो उन्हें पहले अपनी नौकरी से इस्तीफा देना होगा और इस्तीफा मंजूर होने पर ही वो पंचायत चुनाव लड़ सकेंगे।

पंचायत चुनाव: कांग्रेस ने 41 जिलों में पर्यवेक्षक नियुक्त किए, वैभव गहलोत को अलवर की कमान | Panchayat Elections: Congress Appoints Observers in 41 Districts, Vaibhav Gehlot Gets Alwar Command
पंचायत चुनाव के लिए कांग्रेस ने 41 जिलों में लगाए पर्यवेक्षक, वैभव गहलोत को अलवर की जिम्मेदारी
09 Oct 2026 ,
By Jyoti Mahender Bhardwaj
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने 41 जिलों में पार्टी नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को अलवर जिले की जिम्मेदारी दी गई है, जो नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गृह जिला है। पर्यवेक्षकों की सूची में 5 सांसद और 7 विधायक शामिल हैं।
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आशा सहयोगी भी नौकरी पर रहते नहीं लड़ सकेंगी चुनाव

संविदा कर्मचारियों की तरह आशा सहयोगी के लिए भी यही नियम लागू होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने आशा सहयोगिनी के पद को भी लाभ का पद माना है। इसलिए वे अपने पद पर रहते हुए पंचायत चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकेंगी। अगर कोई आशा सहयोगी चुनाव लड़ना चाहती है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा। इस्तीफा मंजूर होने पर ही वह चुनाव लड़ सकेगी।

सरपंच आरक्षण लॉटरी पर हाईकोर्ट की रोक: राज्य सरकार की अपील पर डिविजन बेंच का बड़ा फैसला | High Court's Stay on Sarpanch Reservation Lottery: Big Decision by Division Bench on State Government's Appeal
सरपंच आरक्षण की नई लॉटरी निकालने के आदेश पर डीबी ने लगाई रोक,राज्य सरकार ने दी एसबी के आदेश को चुनौती
09 Oct 2026 ,
By Mukesh Sharma
राजस्थान हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने भरतपुर और करौली की तीन ग्राम पंचायतों में सरपंच आरक्षण की नई लॉटरी निकालने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने आरक्षण के रोटेशन को लेकर सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी थी। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
राजस्थान हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने भरतपुर और करौली की तीन ग्राम पंचायतों में सरपंच आरक्षण की नई लॉटरी निकालने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने आरक्षण के रोटेशन को लेकर सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी थी। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को मिली राहत

दूसरी तरफ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने अलग व्यवस्था रखी है। वे अपनी नौकरी से इस्तीफा दिए बिना भी पंचायती राज चुनाव में उतर सकेंगी। इसके लिए उन्हें बिना वेतन छुट्टी लेनी होगी। यानी चुनाव लड़ने के लिए उन्हें नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं होगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव में उम्मीदवार बन सकेंगी।

हालांकि, चुनाव लड़ने से पहले उन्हें बिना वेतन छुट्टी से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस फैसले से उन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को राहत मिलेगी, जो पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमाना चाहती हैं।

विद्या संबल योजना में काम करने वालों के लिए क्या नियम?

राज्य निर्वाचन आयोग ने विद्या संबल योजना के तहत काम करने वाले कर्मचारियों की स्थिति भी साफ करने की कोशिश की है। आयोग के मुताबिक, इस योजना में काम करने वालों को लेकर अदालत का कोई साफ आदेश उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इन कर्मचारियों को सरकार की तरफ से वेतन दिया जाता है। इसलिए इनके मामले में सीधे चुनाव लड़ने की अनुमति देने के बजाय दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

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09 Oct 2026 ,
By Mukesh Sharma
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रिटर्निंग अधिकारी उम्मीदवार का नियुक्ति पत्र देखेंगे। इसके अलावा वेतन और नौकरी की दूसरी शर्तों की भी जांच होगी। अगर यह साफ नहीं हो पाता कि उम्मीदवार का पद लाभ का पद है या नहीं, तो चुनाव लड़ने से पहले उसका इस्तीफा लेना उचित माना गया है। इसका मतलब है कि विद्या संबल योजना में काम करने वाले हर व्यक्ति के मामले में उसकी नियुक्ति और वेतन की शर्तें अहम होंगी।

राशन डीलर भी लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग ने राशन डीलरों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी है। आयोग ने साफ किया है कि राशन डीलर का काम अपने आप में लाभ का पद नहीं माना जाएगा। इस फैसले का कारण राजस्थान हाईकोर्ट का साल 2014 का एक आदेश है।

मांगी देवी बनाम राजस्थान सरकार मामले में हाईकोर्ट ने राशन डीलर के चुनाव लड़ने से जुड़े विवाद पर फैसला दिया था। उस मामले में सरपंच चुनाव के एक उम्मीदवार के नॉमिनेशन को चुनौती दी गई थी। आपत्ति यह थी कि चुनाव में उतरा प्रत्याशी राशन की दुकान संचालित कर रहा था और उसके खिलाफ जांच भी लंबित थी।

हाईकोर्ट ने कहा था कि केवल इन वजहों से किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के अयोग्य नहीं माना जा सकता। इसी फैसले के आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग ने राशन डीलरों को पंचायत चुनाव लड़ने की छूट दी है। यानी केवल राशन की दुकान चलाने के कारण किसी व्यक्ति का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकेगा।

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: कांग्रेस की 20 सदस्यीय प्रचार समिति गठित, गहलोत-पायलट समेत दिग्गजों को मिली जिम्मेदारी | Rajasthan Panchayat Elections 2026: Congress Forms 20-Member Campaign Committee, Top Leaders Including Gehlot-Pilot Given Responsibility
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: कांग्रेस ने बनाई 20 नेताओं की प्रचार समिति, गहलोत-पायलट समेत दिग्गजों को जिम्मेदारी
08 Oct 2026 ,
By Raghvendra Singh Rathore
राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर कांग्रेस ने 20 सदस्यीय प्रचार समिति का गठन किया है। प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की ओर से जारी सूची में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली सहित कई वरिष्ठ नेताओं को जगह मिली है। समिति में पार्टी के अग्रिम संगठनों के अध्यक्ष भी अतिरिक्त सदस्य होंगे।
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प्रशासक बने सरपंचों के मामले में अलग से होगी जांच

राजस्थान में जिन सरपंचों को कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक बनाया गया है, उनके चुनाव लड़ने के मामले में भी आयोग ने निर्देश दिए हैं। हालांकि, आयोग ने ऐसे सभी सरपंचों के लिए एक जैसा नियम तय नहीं किया है। आयोग का कहना है कि प्रशासक के पद की स्थिति देखकर फैसला किया जाएगा। इसके लिए यह जांचना होगा कि संबंधित व्यक्ति को प्रशासक किसने नियुक्त किया। क्या सरकार उसे पद से हटा सकती है? क्या उस पद के साथ वेतन, मानदेय या कोई दूसरा आर्थिक लाभ जुड़ा है?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी बनाया आधार

प्रशासक बनाए गए सरपंचों के चुनाव लड़ने को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक पुराने फैसले को आधार बनाया है। यह फैसला जया बच्चन बनाम भारत सरकार मामले में दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि किसी पद को लाभ का पद मानने के लिए यह जरूरी नहीं है कि उस पर बैठे व्यक्ति को वेतन या कोई दूसरी सुविधा मिली ही हो। अगर उस पद पर रहते हुए पैसा या अन्य आर्थिक फायदा लेने का अधिकार है, तो उसे भी लाभ का पद माना जा सकता है। इसी आधार पर आयोग ने कहा है कि किसी उम्मीदवार की पात्रता को लेकर सवाल उठने पर उसके नियुक्ति पत्र और नौकरी से जुड़े नियमों की जांच की जाए।

FAQs

  1. संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगी राजस्थान पंचायत चुनाव में उम्मीदवार क्यों नहीं बन सकते?
    संविदा कर्मचारी और आशा सहयोगी को लाभ का पद माना गया है, जिसके तहत उन्हें अपने पद पर रहते हुए पंचायत चुनाव नहीं लड़ने होंगे। चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पहले अपनी नौकरी से इस्तीफा देना होगा।
  2. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 में कैसे दावेदारी कर सकते?
    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बिना वेतन छुट्टी लेकर पंचायत चुनाव में दावेदारी कर सकते, जिसका मतलब है कि उन्हें नौकरी छोड़ने की आवश्यकता नहीं है।
  3. क्या राशन डीलर राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 लड़ सकते हैं?
    हां, राशन डीलरों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति है क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग ने राशन डीलर के काम को लाभ का पद नहीं माना है।
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