विजिलेंस की सख्ती, 56 पुलिस अफसरों की फील्ड पोस्टिंग खत्म
समझें क्या है पूरा मामला
- PHQ ने विभागीय जांच के घेरे में 56 अधिकारियों को फील्ड से हटाया।
- 34 निरीक्षक और 22 उप-निरीक्षकों पर चल रही है विभागीय जांच।
- जयपुर में सबसे ज्यादा 12 अधिकारी जांच के घेरे में।
- जांच पूरी होने तक अधिकारी नहीं संभाल पाएंगे थाना संचालन।
- सभी जिला एसपी से पालना रिपोर्ट मांगी गई है।
राजस्थान पुलिस मुख्यालय (PHQ – Police Head Quarters) ने विभागीय जांच का सामना कर रहे 56 पुलिस अधिकारियों को फील्ड ड्यूटी से हटाकर नॉन-फील्ड पोस्टिंग पर लगा दिया है।
PHQ की विभागीय जांच प्रकोष्ठ ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) और पुलिस आयुक्तालयों को ऐसे अफसरों की सूची भेजी थी जिन पर विभागीय जांच चल रही है और उन्हें फील्ड पर तैनात रखा गया था।
इनमें 34 पुलिस निरीक्षक और 22 उप निरीक्षक शामिल हैं। जयपुर में सबसे ज्यादा 12 अफसर इस दायरे में हैं। ADG (Additional Director General) विजिलेंस एस. सेंगाथिर ने कहा कि जांच लंबित रहने तक इन्हें फील्ड पर नहीं रखा जा सकता।
जांच लंबित तो फील्ड नहीं
राजस्थान पुलिस के सेवा नियमों के अनुसार जिन अधिकारियों के खिलाफ 16 CCA (Civil Services and Conduct Applicable Rules) के तहत अनुशासनिक जांच विचाराधीन हो, उन्हें फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जा सकती।
फील्ड का मतलब है - थाना प्रभारी का थाना संभालना, कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी और फील्ड निगरानी जैसे संवेदनशील पद। इन पदों पर दागी अफसरों की मौजूदगी से जांच की निष्पक्षता और पुलिस की छवि दोनों पर असर पड़ता है।
PHQ ने सभी जिला SP को तत्काल इन अफसरों को नॉन-फील्ड करने और वर्तमान पदस्थापन की जानकारी देने को कहा। ADG विजिलेंस एस. सेंगाथिर ने बताया कि अधिकतर को नॉन-फील्ड कर दिया गया है और पालना रिपोर्ट मांगी गई है।
जयपुर में सबसे ज्यादा
56 अधिकारियों का जिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है। जयपुर कमिश्नरेट और जयपुर ग्रामीण मिलाकर सबसे अधिक 12 अफसर। जोधपुर कमिश्नरेट में 6, उदयपुर में 6, कोटा शहर व ग्रामीण में 5 और भरतपुर में 3 अधिकारी इस सूची में हैं।
मेट्रो थाना प्रभारी भी जांच के घेरे में
जयपुर कमिश्नरेट में मेट्रो थाने की प्रभारी अंतिम शर्मा के खिलाफ भी विभागीय जांच चल रही है। वे चित्रकूट थाना प्रभारी रहते हुए एक मामले में जांच में आई थीं। अंतिम शर्मा का कहना है कि जांच अभी पेंडिंग है, लेकिन मेट्रो थाना नॉन-फील्ड की श्रेणी में आता है इसलिए नियमों का उल्लंघन नहीं है।
एक मामले में तबादला हुआ, जांच नहीं रुकी
एक दिलचस्प मामला SI सीमा कुमारी का है। मेहंदीपुर बालाजी थाना प्रभारी रहते हुए उनके खिलाफ जांच शुरू हुई। तबादले के बाद वे अलवर जिले के अकबरपुर में तैनात हो गईं।
सीमा कुमारी का कहना है कि उनके खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही। लेकिन PHQ की सूची में उनका नाम शामिल है। यह सूचना की विसंगति अपने आप में जांच का विषय बन गई है।
ADG विजिलेंस की साफ बात
ADG विजिलेंस एस. सेंगाथिर ने बताया कि जिनके खिलाफ 16 CCA में लंबित प्रकरण हैं उन्हें फील्ड से हटाने के लिए सभी जिला SP को पत्र भेजा गया था। पालना रिपोर्ट मांगी गई है और अधिकतर को नॉन-फील्ड कर दिया गया है।
FAQ
- विभागीय जांच में घिरे पुलिस अफसर को फील्ड में क्यों नहीं रखा जा सकता?
राजस्थान पुलिस के नियमों के अनुसार 16 CCA के तहत जिन अधिकारियों पर अनुशासनिक जांच लंबित हो, उन्हें कानून-व्यवस्था, थाना संचालन और फील्ड निगरानी जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियों पर नहीं रखा जा सकता। इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
ये भी पढ़ें:-
राजस्थान पुलिस में सुधार का नया खाका, 20 थानों से होगी शुरुआत
राजस्थान पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 84 एडिशनल SP के हुए ट्रांसफर, यहां देखें पूरी लिस्ट
राजस्थान पुलिस की नई पहल, अब परिवादी के सामने ही शिकायत होगी ऑनलाइन अपलोड
अवैध खनन पर बेबस राजस्थान पुलिस, थानाधिकारी ने सुनाई बेबसी की कहानी