सड़कों से धार्मिक स्थल हटाने को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, कोर्ट से फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह

राजस्थान हाई कोर्ट के एक फैसले के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। हाई कोर्ट ने जयपुर के आम रास्तों से धार्मिक स्थल हटाने के निर्देश दिए हैं। दोनों दलों ने कोर्ट से फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया है।

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Mukesh Sharma
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Photograph: (the sootr)

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News In Short

  • रास्तों से मंदिर हटाने के कोर्ट आदेश पर सियासी पारा चढ़ा 
  • भाजपा विधायक बोले-अवैध रुप से बने मकबरों व मस्जिदों का क्या 
  • भाजपा व कांग्रेस विधायकों ने कहा, कोर्ट करे अपने फैसले पर पुनर्विचार  
  • कांग्रेस विधायक ने कहा, भाजपा किसी की सगी नहीं 
  • हाई कोर्ट ने आम रास्तों से धार्मिक स्थल हटाने के दिए थे आदेश

News In Detail 

राजस्थान के जयपुर में आम रास्तों से धार्मिक निर्माण हटाने के हाई कोर्ट के निर्देश को लेकर राजनीति शुरु हो गई है। हालांकि, दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस विधायकों ने अदालत से अपने आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है। इन विधायकों का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को आहत होने से बचाने के लिए हाई कोर्ट को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। 

रास्ते में बने मकबरों व मस्जिदों का क्या  

हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत में कहा कि अदालती आदेश का सम्मान है। आदेश से कोई आपत्ति भी नहीं है। राम मंदिर का फैसला भी साढ़े पांच सौ साल के इंतजार के बाद आया और कोर्ट के आदेश से ही मंदिर बना है। उन्होंने कहा कि क्या यह फैसला केवल मंदिरों के लिए आया है। अगर मस्जिद या मकबरा रास्ते में आ रहा है तो क्या उस पर भी कोर्ट को विचार नहीं करना चाहिए।  

कोर्ट में पेश करेंगे अर्जी

बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि यदि किसी की धार्मिक भावना आहत हो रही है तो इसके लिए हम कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश करके उनकी बात सुनने की गुहार करेंगे। क्योंकि, देवी-देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा विधि-विधान से होती है। इसमें 9 दिन भी लगते हैं और एक महीना भी लग सकता है। हम उन्हें मूर्ति नहीं मानते, बल्कि साक्षात भगवान मानते हैं। इसलिए उन्हें भोग भी लगाते हैं और भगवान को अपना शरीर-स्वरूप मानते हैं। देवी-देवताओं की मूर्तियों को उखाड़ना विधि-पूर्वक नहीं है। इसे रोकने के लिए कोर्ट में अपील करेंगे। 

सरकार सही तरीके से नहीं रख पा रही पक्ष

कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने कहा कि सरकार कोर्ट में अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रख पा रही है। उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार विधायक बने थे, तब किशनपोल में बहुत से मंदिर सड़क पर आ रहे थे। इस पर हमने अधिकारियों से बात की और कहा था कि मंदिर नहीं हटने चाहिए। 

वसुधंरा सरकार में हटे थे मंदिर

विधायक अमीन ने कहा कि 2013 से 2018 के बीच वसुंधरा सरकार ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत कई मंदिर हटा दिए थे। इन मंदिरों की मूर्तियां आबकारी थाने में रख दी थी। अमीन ने कहा ​कि वह अपने साथियों के साथ उन मूर्तियों को वापस लाए और उनकी स्थापना करवाई थी। छोटी चौपड़ का रोजगारेश्वर महादेव मंदिर भी हटा दिया था। उसकी भी पुन: स्थापना करवाई थी। 

हाईकोर्ट ने रास्तों से मंदिर हटाने को कहा है

राजस्थान हाई कोर्ट ने बुधवार को जनहित याचिका पर प्रताप नगर सहित शहर में फुटपाथ और आम रास्तों पर बने मंदिरों को हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इन मंदिरों की मूर्तियों को नजदीक के वैध रुप से निर्मित मंदिरों में स्थापित करने को कहा है।

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राजस्थान हाई कोर्ट धार्मिक स्थल भाजपा हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य
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