5561 किमी ट्रैक पर दुर्घटना रोकने बिछेगा सुरक्षा जाल, 2300 करोड़ रुपए होंगे खर्च
News In Short
- उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) के पूरे नेटवर्क में लगेगी 'कवच 4.0'।
- 'कवच 4.0' प्रणाली 'एंटी-कोलिजन' (टक्कर रोधी) तकनीक।
- यह सिस्टम संचार नेटवर्क, सिग्नलिंग और लोकोमोटिव तकनीक का है संगम।
- इस सिस्टम को लगाने के लिए रखा गया है 2300 करोड़ रुपये का बजट।
- कवच 4.0' (Kavach 4.0) के सक्रिय होने दुर्घटनाओं पर लगेगा 'ऑटोमैटिक' ब्रेक।
News In Detail
जागेश्वर प्रसाद @ जयपुर
भारतीय रेलवे तकनीक और सुरक्षा के मामले में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसी कड़ी में राजस्थान के रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) ने अपने पूरे नेटवर्क को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित 'कवच 4.0' (Kavach 4.0) प्रणाली को लागू करने का निर्णय लिया है। लगभग 2300 करोड़ रुपये के बजट वाली इस परियोजना के तहत राजस्थान के रेल मार्ग को 'एंटी-कोलिजन' (टक्कर रोधी) तकनीक से लैस किया जाएगा।
दुर्घटनाओं पर लगेगा 'ऑटोमैटिक' ब्रेक
रेलवे सुरक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में 'कवच' को दुनिया की सबसे सस्ती और प्रभावी तकनीकों में से एक माना जा रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे के अधिकारियों के अनुसार इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मानवीय भूलों के कारण होने वाली ट्रेन दुर्घटनाओं को शून्य पर लाना है। अक्सर देखा गया है कि कोहरे या चालक की अनदेखी के कारण सिग्नल जंप (SPAD) हो जाता है, जो बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनता है। 'कवच 4.0' ऐसी स्थितियों में 'रक्षक' की भूमिका निभाएगा। यदि एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाती हैं, तो यह सिस्टम खतरे को भांपकर स्वतः ही ब्रेक लगा देगा।
ऑप्टिकल फाइबर का जाल
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे के सभी मंडलों में काम शुरू हो चुका है। वर्तमान में लगभग 1556 किलोमीटर रेल मार्ग पर कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है:
नेटवर्क टावर: ट्रेन और स्टेशन कंट्रोल रूम के बीच निर्बाध संचार के लिए ट्रैक के किनारे कुल 250 हाई-टेक टावर लगाए जा रहे हैं। इनमें से 221 टावरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC): संचार की गति बढ़ाने के लिए 1586 किलोमीटर मार्ग पर ओएफसी बिछाने के टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 56 फीसदी काम पूरा भी हो चुका है।
RFID टैग: यह इस तकनीक की 'आंखें' हैं। रेलवे ट्रैक पर हर एक किलोमीटर की दूरी पर RFID (Radio Frequency Identification) टैग लगाए जाएंगे। ये टैग लोकोमोटिव (इंजन) को ट्रेन की सटीक लोकेशन, दिशा और गति की जानकारी देते रहेंगे।
कैसे काम करती है यह जादुई तकनीक
कवच 4.0 केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि एक एकीकृत सिस्टम है जिसमें संचार नेटवर्क, सिग्नलिंग और लोकोमोटिव तकनीक का संगम है।
सटीक निगरानी: इंजन में लगा 'लोको कवच' सिस्टम ट्रैक पर लगे RFID टैग से डेटा प्राप्त करता है।
त्वरित चेतावनी: यदि लोको पायलट निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करता है या गलती से रेड सिग्नल पार करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम पहले ऑडियो-विजुअल चेतावनी देता है।
स्वचालित हस्तक्षेप: चेतावनी के बाद भी यदि पायलट प्रतिक्रिया नहीं देता, तो कवच सिस्टम खुद ही ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम को सक्रिय कर देता है और गाड़ी को सुरक्षित दूरी पर रोक देता है।
उत्तर पश्चिम रेलवे की नई पहचान
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) अमित सुदर्शन ने बताया कि 5561 किलोमीटर रेल मार्ग पर इस तकनीक का विस्तार रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह न केवल दुर्घटनाओं को रोकेगा, बल्कि खराब मौसम और घने कोहरे के दौरान भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में मदद करेगा, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी में भी कमी आने की संभावना है।
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