प्रशासनिक सुधार विभाग का सरप्राइज इंस्पेक्शन, SDM-ADM के कमरों पर मिले ताले
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रशासनिक सुधार विभाग का सीकर कलेक्ट्रेट पर औचक निरीक्षण।
- SDM-ADM के कमरों पर लटके मिले ताले, 294 कर्मचारी नदारद।
- 40 फीसदी बड़े अफसर ड्यूटी से गायब, 58 रजिस्टर जब्त।
- जयपुर से आई टीम ने चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को बनाया गाइड।
- विभाग की कार्रवाई से खुली सरकारी सिस्टम की खुली पोल।
राजस्थान के सीकर जिले में सोमवार सुबह प्रशासनिक सुधार विभाग की राज्य स्तरीय टीम ने कलेक्ट्रेट सहित कई सरकारी दफ्तरों पर औचक छापेमारी की। डेढ़ घंटे की इस कार्रवाई में 294 अधिकारी और कर्मचारी अपनी सीट पर नदारद मिले।
धोद एसडीएम और सहायक कलेक्टर के कमरों पर ताले लटके मिले। कुल 58 उपस्थिति रजिस्टर जब्त किए गए। 40 फीसदी से ज्यादा राजपत्रित अधिकारी ड्यूटी से गायब थे।
गोपनीय मिशन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बना गाइड
जयपुर से पहुंची चार सदस्यीय टीम का नेतृत्व शासन उपसचिव व अतिरिक्त निदेशक सुनील कुमार शर्मा ने किया। टीम में सहायक शासन सचिव रामस्वरूप विश्नाई, सहायक अनुभाग अधिकारी मनोज पंवार, चेनाराम भदाला और लिपिक वीर सिंह शामिल थे।
जयपुर से सीकर पहुंचने तक स्थानीय जिला प्रशासन के किसी भी अधिकारी को भनक नहीं लगने दी। कलेक्ट्रेट पहुंचते ही टीम ने एडीएम कार्यालय के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को गाइड के रूप में साथ लिया और एक-एक कर सभी सरकारी कार्यालयों की जांच शुरू की।
सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक चले इस सघन अभियान की सूचना जैसे ही सोशल मीडिया पर फैली, दूसरे दफ्तरों में हड़कंप मच गया। देर से आने के आदी कर्मचारी पिछले दरवाजों से हाजिरी लगाने की जुगत में लग गए।
SDM-ADM के कमरों पर ताले
इस कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब टीम धोद एसडीएम (SDM) राहुल मल्होत्रा और सहायक कलेक्टर (ADM) सुशील सैनी के कार्यालयों पर पहुंची।
जनता की सुनवाई के मुख्य समय में दोनों के कमरे पूरी तरह बंद और ताले लटके हुए मिले। इस वजह से टीम उनके उपस्थिति रजिस्टर भी हासिल नहीं कर पाई।
एडीएम सिटी का कमरा भी बंद मिला। सांवली रोड स्थित जलदाय विभाग (PHED) की मुख्य लेखा शाखा पर ताला था। पिपराली के एईएन (AEN) जलदाय कार्यालय में एक भी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं था।
40 फीसदी बड़े अफसर गायब
शासन उपसचिव सुनील कुमार शर्मा ने आधिकारिक आंकड़े जारी किए। कुल 162 राजपत्रित अधिकारियों में से 66 अनुपस्थित मिले, यानी करीब 40.74 फीसदी बड़े अफसर ड्यूटी पर नहीं थे।
593 अराजपत्रित कर्मचारियों (Non-Gazetted Staff) में से 232 गायब मिले, जो कुल कर्मचारियों का 39.12 फीसदी है।
इस तरह कुल 294 कर्मचारी और अधिकारी अनुपस्थित मिले। यदि बंद कमरों के ताले खुल जाते तो यह आंकड़ा 300 पार कर जाता।
ये बड़े अधिकारी भी मिले नदारद
जांच दल के अनुसार जिला स्तर के कई महत्वपूर्ण अधिकारी भी अपनी सीट पर नहीं मिले। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक सुनील जांगिड़, महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक राजेंद्र चौधरी, जिला साक्षरता अधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश महर्षि, जिला सांख्यिकी अधिकारी अनिल शर्मा और DIPR के सहायक निदेशक पूरणमल शामिल हैं।
इन सभी के कमरों से उपस्थिति रजिस्टर जब्त कर अनुपस्थिति के आगे लाल स्याही से क्रॉस लगाया गया।
आम जनता को भुगतना पड़ता है खामियाजा
इस पूरी कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। जब अधिकारी ही अपनी सीट पर नहीं होते, तो दूर-दराज के गांवों से आने वाला आम नागरिक अपने छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए घंटों दफ्तरों के चक्कर काटता रहता है।
FAQ
- प्रशासनिक सुधार विभाग का क्या काम होता है?
प्रशासनिक सुधार विभाग सरकारी कार्यालयों में अनुशासन, समयपालन और जनसेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है। यह औचक निरीक्षण कर अनुपस्थित कर्मचारियों की रिपोर्ट तैयार करता है और विभागों को जवाबदेह बनाता है।
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