ब्यूरोक्रेसी में फेरबदल, मंत्री पुत्र का ट्रांसफर और रात को जगाने वाला वो ऑडियो
राजस्थान के सियासी गलियारों से लेकर सरहदी इलाकों तक यह हफ्ता काफी हलचल भरा रहा। कहीं ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल हुआ तो कहीं अपनों को बचाने की सियासत दिखी।
इस सप्ताह व्यवस्था की लाचारी सामने आई। इसी हफ्ते लोकसंगीत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले केसी मालू का भी निधन हुआ।
पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल
इस हफ़्ते भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 18 अधिकारियों के तबादले कर दिए। जोधपुर के पुलिस आयुक्त शरत कविराज को हटाकर उनकी जगह अंशुमन भोमिया को कमान सौंपी गई है। इसके अलावा अजमेर और भरतपुर रेंज में नए आईजी तैनात किए गए हैं। चार जिलों के एसपी (SP) भी बदले गए हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस के आला अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था को लेकर बैठक की थी। इसमें उन्होंने दो टूक कहा था कि अपराधियों पर नकेल कसनी चाहिए। इस बैठक के ठीक बाद आई यह ट्रांसफर लिस्ट साफ करती है कि सीएम अब फील्ड में कड़क नतीजे चाहते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सत्ता संभाले हुए अब एक लंबा समय हो चुका है। सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि आईपीएस के बाद अब जल्द ही आईएएस (IAS) अफसरों की भी लिस्ट आने वाली है। ऐसा लगता है कि शुरुआती हिचक के बाद अब मुख्यमंत्री प्रशासन और पुलिस पर अपनी पकड़ पूरी तरह मजबूत करना चाहते हैं। वे अपनी ऐसी कोर टीम तैयार कर रहे हैं, जो सीधे उनके विजन पर काम कर सके।
तबादला एक्सप्रेस में मंत्री पुत्र का किस्सा
राजस्थान में 10 जुलाई को सरकारी तबादलों का सीजन खत्म हो गया, लेकिन जाते-जाते यह सीजन बड़ा सियासी किस्सा छोड़ गया। मामला कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक कुमार से जुड़ा है, जो सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (DoIT) में सहायक प्रोग्रामर हैं।
दीपक अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र सुमेरपुर की पंचायत समिति में तैनात हैं। वहां मंत्री के विधायक कार्यालय का कामकाज भी संभालते हैं। 9 जुलाई को आई लिस्ट में दीपक का ट्रांसफर पड़ोसी जिले जालोर कर दिया गया। लेकिन यह बात मंत्री जी को पसंद नहीं आई।
सूत्रों के मुताबिक पैरवी सीधे मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंची। अगले ही दिन संशोधित सूची जारी कर इस तबादले को निरस्त कर दिया गया। यह घटना साफ करती है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में नियम-कायदे सिर्फ आम कर्मचारियों के लिए होते हैं, रसूखदारों के लिए नहीं।
बीजेपी के अंदरूनी पावर स्ट्रगल और पाली जिले की स्थानीय राजनीति के कारण यह ट्रांसफर हुआ तो सही, लेकिन मंत्री जी ने 24 घंटे में अपनी ताकत दिखाकर इसे पलटवा दिया।
स्वास्थ्य मंत्री का वायरल ऑडियो
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के लिए यह हफ़्ता बेहद आलोचनाओं से भरा रहा। फलौदी जिले के लोहावट के एक स्थानीय पत्रकार और स्वास्थ्य मंत्री के बीच बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
पत्रकार ने रात सवा बारह बजे अस्पताल के बाहर तड़पते मरीजों को देखकर मंत्री को फोन किया। इस पर मंत्री जी भड़क गए। वे बोले, मुझे आधी रात को नींद से क्यों जगाया... लोग तड़प रहे हैं तो सुबह बता देते। मर रहे हैं तो सुबह बताओ ना यार।
यह बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला है। एक राज्य का स्वास्थ्य मंत्री का ऐसा गैर-जिम्मेदाराना रवैया हैरान करने वाला है। बीमारियां या मौतें घड़ी देखकर या सुबह होने का इंतजार करके नहीं आतीं।
अगर ग्राउंड जीरो पर अस्पताल के बाहर लोग तड़प रहे हैं। एक सजग नागरिक मंत्री को जगाता है तो मंत्री का काम डांटना नहीं, बल्कि तुरंत एक्शन लेना है। इस बयान ने सरकार की संवेदनशील छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है।
बॉर्डर पर ऑपरेशन क्लीन
पाकिस्तान से सटी राजस्थान की सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में प्रशासन ने ऑपरेशन क्लीन शुरू कर दिया है। यह अभियान सीमावर्ती 5 जिलों में चल रहा है।
दरअसल, हिंगोले की ढाणी में बने एक धार्मिक स्थल को लेकर हाई कोर्ट में याचिकाएं थीं, जिन्हें कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद प्रशासन ने सरकारी जमीनों पर बने अवैध धार्मिक स्थलों को ढहाने की कार्रवाई तेज कर दी है।
कांग्रेस इस कार्रवाई को लेकर बाड़मेर और बीकानेर में प्रदर्शन कर चुकी है। विपक्ष का आरोप है कि एक समुदाय विशेष के धार्मिक स्थलों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से सीमावर्ती इलाकों में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन का एक्शन कानूनी रूप से सही है। हालांकि, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी और बिना सांप्रदायिक भेदभाव के हो।
सुरों के सरमाये का अंत
राजस्थान के लोक संगीत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने वाले वीणा कैसेट्स के केशरी चंद मालू (केसी मालू) का 80 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। वे अपने आखिरी समय तक संगीत को समर्पित रहे। निधन से महज 4 दिन पहले ही उन्होंने अपना नया एल्बम 'चाल साथ बागां में चालां' रिलीज किया था।
उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के 5,000 से अधिक राजस्थानी लोकगीतों की पांडुलिपियां सहेजीं। 221 विवाह गीतों का संग्रह तैयार किया, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा विवाह गीत संग्रह माना जाता है। केसी मालू का जाना केवल एक उद्योगपति का जाना नहीं है, बल्कि राजस्थानी माटी की आवाज का मौन हो जाना है।
एक ऐसे दौर में जब हमारी लोक संस्कृति विलुप्त हो रही थी, उन्होंने तकनीक (टेप रिकॉर्डर और सीडी) के जरिए उसे घर-घर पहुंचाया। आज अगर विदेशों में भी राजस्थानी घूमर या कालबेलिया गूंजता है, तो उसमें मालू जी का बहुत बड़ा योगदान है।
अगले हफ्ते फिर मिलेंगे नई चिट्ठी के साथ।
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