राजस्थान में सस्ते मकानों के नियम बदलेंगे, बिल्डरों को 2 से 5 किमी के दायरे में ही बनाने होंगे EWS-LIG फ्लैट
Ashish Bhardwaj | Nov 03, 2026, 14:35 IST
EWS-LIG आवास की ख़ास शर्तें
राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए सस्ते मकान उपलब्ध कराने की योजना में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री जन आवास योजना का नया ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें बिल्डरों को अतिरिक्त निर्माण अधिकार यानी BAR और कई शुल्कों में छूट देने का प्रस्ताव है। लेकिन इसके साथ कुछ सख्त शर्तें भी जोड़ी गई हैं।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब बिल्डर EWS और LIG श्रेणी के मकान अपने मुख्य प्रोजेक्ट से मनमर्जी की दूरी पर नहीं बना सकेंगे। शहर की आबादी के हिसाब से इन मकानों के लिए अधिकतम दूरी तय करने का प्रस्ताव है। इसका मकसद यह है कि गरीब परिवारों को मुख्य आवासीय परियोजना से बहुत दूर न रहना पड़े और उन्हें सड़क, पानी तथा परिवहन जैसी सुविधाएं मिल सकें।
नए ड्राफ्ट के अनुसार, 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में EWS-LIG मकान मुख्य प्रोजेक्ट से अधिकतम 5 किलोमीटर के दायरे में बनाने होंगे। एक लाख से अधिक और 10 लाख तक आबादी वाले शहरों में यह दूरी 3 किलोमीटर होगी। वहीं, एक लाख तक आबादी वाले शहरों में अधिकतम 2 किलोमीटर के दायरे में ही ऐसे मकान बनाए जा सकेंगे।
अब तक कई बिल्डर मुख्य प्रोजेक्ट में गरीबों के लिए फ्लैट बनाने के बजाय दूसरी जगह जमीन लेकर आवास तैयार कर देते थे। इससे इन परिवारों को मुख्य परियोजना से दूर रहना पड़ता था। कई बार वहां सड़क, पानी और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं होती थीं। नए प्रस्ताव में इसी समस्या को दूर करने की कोशिश की गई है।
योजना में बिल्डरों के लिए EWS-LIG मकान बनाने की अनिवार्यता की सीमा भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। अभी 5 हजार वर्गमीटर से बड़े भूखंड पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने वाले बिल्डरों को इन श्रेणियों के लिए मकान बनाना जरूरी है। नए ड्राफ्ट में यह सीमा बढ़ाकर 10 हजार वर्गमीटर करने का प्रस्ताव है। यानी 10 हजार वर्गमीटर से छोटे भूखंडों पर बनने वाले ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट को इस अनिवार्यता से राहत मिल सकती है।
हालांकि, बिल्डर अगर EWS-LIG मकान मुख्य प्रोजेक्ट के बजाय दूसरी जगह बनाना चाहता है तो उसे इसकी जानकारी भवन मानचित्र की मंजूरी लेते समय ही देनी होगी। इसके साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र देने का भी प्रस्ताव है।
सरकार ने निजी बिल्डरों को सस्ते मकान बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कई रियायतें प्रस्तावित की हैं। EWS-LIG आवास बनाने पर 1.0 अतिरिक्त BAR देने का प्रावधान रखा गया है। अलग से आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने पर इमारत की ऊंचाई के अनुसार 0.75 से 2.0 तक अतिरिक्त BAR मिल सकेगा।
इसके अलावा भू-रूपांतरण समेत विभिन्न शुल्कों में 100 प्रतिशत छूट देने का प्रस्ताव है। सरकार को उम्मीद है कि इन रियायतों से निजी बिल्डर सस्ते मकानों के निर्माण में ज्यादा रुचि लेंगे।
नए ड्राफ्ट में निजी जमीन पर बनने वाली फ्लैट आधारित योजनाओं के लिए भी जमीन और निर्माण क्षेत्र का अनुपात तय किया गया है। कुल निर्मित क्षेत्र का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा EWS-LIG मकानों के लिए आरक्षित रखना होगा। बाकी 40 प्रतिशत क्षेत्र में दूसरी श्रेणियों के मकान बनाए जा सकेंगे।
इस 40 प्रतिशत में भी कम से कम आधा निर्मित क्षेत्र MIG-A श्रेणी के लिए रखना होगा। यानी मध्यम आय वर्ग-A को भी योजना में जगह देने का प्रस्ताव है।
सरकारी जमीन पर निजी बिल्डर के जरिए आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए कम से कम एक हेक्टेयर जमीन जरूरी होगी। इसमें 75 प्रतिशत तक भूमि EWS-LIG मकानों के लिए और बाकी 25 प्रतिशत अन्य श्रेणियों के लिए रखी जा सकेगी। EWS-LIG के कुल मकानों में कम से कम 25 प्रतिशत यूनिट EWS श्रेणी की होंगी।
नई योजना का ड्राफ्ट पुरानी मुख्यमंत्री जन आवास योजना-2015 के अनुभवों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पुरानी योजना में कई प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पाए। कुछ निर्माण कार्य अटक गए और पात्र परिवारों तक समय पर मकान पहुंचाने में भी दिक्कतें आईं। नए प्रस्ताव में इन समस्याओं को दूर करने पर जोर दिया गया है।
यह अभी अंतिम नियम नहीं हैं। नगरीय विकास विभाग ने ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 20 नवंबर 2026 तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार योजना का अंतिम स्वरूप तय करेगी। इसलिए इन नियमों में बदलाव संभव है।
आबादी के हिसाब से तय होगी दूरी
अब तक कई बिल्डर मुख्य प्रोजेक्ट में गरीबों के लिए फ्लैट बनाने के बजाय दूसरी जगह जमीन लेकर आवास तैयार कर देते थे। इससे इन परिवारों को मुख्य परियोजना से दूर रहना पड़ता था। कई बार वहां सड़क, पानी और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं होती थीं। नए प्रस्ताव में इसी समस्या को दूर करने की कोशिश की गई है।
5 हजार की जगह 10 हजार वर्गमीटर की सीमा
हालांकि, बिल्डर अगर EWS-LIG मकान मुख्य प्रोजेक्ट के बजाय दूसरी जगह बनाना चाहता है तो उसे इसकी जानकारी भवन मानचित्र की मंजूरी लेते समय ही देनी होगी। इसके साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र देने का भी प्रस्ताव है।
बिल्डरों को अतिरिक्त BAR और शुल्कों में छूट
इसके अलावा भू-रूपांतरण समेत विभिन्न शुल्कों में 100 प्रतिशत छूट देने का प्रस्ताव है। सरकार को उम्मीद है कि इन रियायतों से निजी बिल्डर सस्ते मकानों के निर्माण में ज्यादा रुचि लेंगे।
निजी जमीन पर 60 प्रतिशत क्षेत्र आरक्षित
इस 40 प्रतिशत में भी कम से कम आधा निर्मित क्षेत्र MIG-A श्रेणी के लिए रखना होगा। यानी मध्यम आय वर्ग-A को भी योजना में जगह देने का प्रस्ताव है।
सरकारी जमीन पर निजी बिल्डर के जरिए आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए कम से कम एक हेक्टेयर जमीन जरूरी होगी। इसमें 75 प्रतिशत तक भूमि EWS-LIG मकानों के लिए और बाकी 25 प्रतिशत अन्य श्रेणियों के लिए रखी जा सकेगी। EWS-LIG के कुल मकानों में कम से कम 25 प्रतिशत यूनिट EWS श्रेणी की होंगी।
पुरानी योजना की कमियों को दूर करने की कोशिश
यह अभी अंतिम नियम नहीं हैं। नगरीय विकास विभाग ने ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 20 नवंबर 2026 तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार योजना का अंतिम स्वरूप तय करेगी। इसलिए इन नियमों में बदलाव संभव है।
FAQs
- राजस्थान में EWS और LIG श्रेणी के मकान अब किस दूरी पर बनाए जाने होंगे?
EWS और LIG श्रेणी के मकान अब शहर की आबादी के अनुसार अधिकतम 5 किलोमीटर, 3 किलोमीटर, और 2 किलोमीटर की दूरी पर बनाए जाने होंगे। - राजस्थान में बिल्डरों के लिए EWS-LIG मकान बनाने की अनिवार्यता की सीमा क्या है?
नए ड्राफ्ट में बिल्डरों के लिए EWS-LIG मकान बनाने की अनिवार्यता की सीमा 10 हजार वर्गमीटर की गई है। - राजस्थान सरकार ने क्या रियायतें दी हैं ताकि निजी बिल्डर सस्ते मकान बना सकें?
सरकार ने EWS-LIG आवास बनाने पर 1.0 अतिरिक्त BAR, विभिन्न शुल्कों में 100 प्रतिशत छूट, और अन्य रियायतें देने का प्रस्ताव रखा है।
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