भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व RAS भंवरलाल मेहरड़ा का होगा प्रमोशन, सिफारिश का लिफाफा खोलने के निर्देश

Amit Baijnath Garg | Nov 07, 2025, 18:30 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व आरएएस अफसर भंवरलाल मेहरड़ा का हो सकता है प्रमोशन। राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण ने प्रमोशन सिफारिश का लिफाफा खोलने के दिए निर्देश। कोर्ट में मुकदमा जारी रहेगा।

Jaipur. राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण ने भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व आरएएस अधिकारी भंवरलाल मेहरड़ा के प्रमोशन के बंद लिफाफे में रखे फैसले को खोलने के आदेश दिए हैं। मेहरड़ा रिटायर हो चुके हैं और आरएएस हायर सुपर टाइम स्केल की साल 2021-2022 की रिक्तियों के विरुद्ध उनका प्रमोशन होना है।



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लंबित प्रकरण के फैसले के अधीन

अधिकरण के अध्यक्ष विकास सीतारामजी भाले और सदस्य पूनम दरगन की बेंच ने बंद लिफाफा खोलकर परिणाम घोषित करने और योग्य पाए जाने पर मेहरड़ा को उसी तारीख से प्रमोशन देने को कहा है, जिस तारीख से उनसे जूनियर को प्रमोट किया गया था। हालांकि अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यह प्रमोशन एसीबी कोर्ट में लंबित प्रकरण के फैसले के अधीन रहेगा।



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कर दिया गया था निलंबित

अपील में मेहरड़ा ने कहा कि उसका साल 1996 में आरएएस पद पर चयन हुआ था। फरवरी, 2020 को राजस्व मंडल अजमेर में सदस्य पद पर नियुक्त किया गया। जून, 2021 को अपीलार्थी के खिलाफ एसीबी ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करके गिरफ्तार किया था। 48 घंटे पुलिस और ज्यूडिश्यल कस्टडी में रखने के कारण उसे निलंबित कर दिया था। जून 2023 को उसे बहाल कर दिया।



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सरकार ने किया विरोध

राजस्थान सरकार की ओर से विरोध में कहा गया कि एसीबी कोर्ट में मामला अभी चल रहा है और जब तक इसका फैसला नहीं हो जाता, तब तक मेहरड़ा के प्रमोशन संबंधी लिफाफे को नहीं खोला जा सकता। अधिकरण ने सुनवाई के बाद कहा है कि यदि कोई अधिकारी निलंबन से बहाल हो जाता है और उसके विरुद्ध न तो कोई विभागीय जांच लंबित है और ना ही उसे दोषी ठहराया गया है, तो सीलबंद लिफाफे में रखे गए प्रमोशन की सिफारिश को खोला जाना चाहिए।



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आगे यह होगा

लिफाफा खोलने के बाद अगर मेहरड़ा इसमें योग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें वही लाभ मिलेगा, जो उनके जूनियर अधिकारियों को पहले मिल चुका है यानी कि उसी तारीख से प्रमोशन लागू होगा। हालांकि यह फैसला शर्तों पर टिका है। एसीबी कोर्ट में चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे का अंतिम फैसला आने तक यह अस्थायी रहेगा। अगर कोर्ट मेहरड़ा को दोषी ठहराती है, तो प्रमोशन रद्द हो सकता है।



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