EWS नियमों में सुधार की मांग, रविंद्र सिंह भाटी बोले- ग्रामीण युवा परेशान
समझें क्या है पूरा मामला
- EWS नियमों को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार को घेरा।
- भाटी बोले- ग्रामीण युवाओं को EWS का पूरा लाभ नहीं मिल रहा।
- राजस्थान में 2.77 लाख से ज्यादा EWS प्रमाण पत्र।
- ‘डबल इंजन’ सरकार पर भाटी का निशाना।
- EWS नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाने की सरकार से मांग।
जयपुर। शिव विधानसभा से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के आरक्षण से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्रीय नियमों के कारण जरूरतमंद युवाओं को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। भाटी ने राज्य और केंद्र सरकार से EWS व्यवस्था को सरल, व्यावहारिक और ज्यादा प्रभावी बनाने की अपील की।
विधायक ने जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान EWS प्रमाण पत्र से जुड़ी समस्याओं को उठाया। उनका कहना है कि राजस्थान सरकार ने राज्य स्तर पर कुछ नियमों में राहत दी है, लेकिन केंद्रीय स्तर पर कई दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। इन समस्याओं का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं पर पड़ रहा है।
ग्रामीण युवाओं को नहीं मिल रहा पूरा लाभ
रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि EWS व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को शिक्षा और रोजगार में अवसर देना है। हालांकि, नियमों और दस्तावेजों की जटिल प्रक्रिया के कारण कई पात्र लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने EWS प्रमाण पत्र से संबंधित कुछ समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठाए हैं। लेकिन केंद्र सरकार के स्तर पर अभी भी कई शर्तें लागू हैं। भाटी ने मांग की कि राज्य सरकार को केंद्र से बातचीत करके ग्रामीण युवाओं के लिए भी व्यावहारिक राहत सुनिश्चित करनी चाहिए।
उनके अनुसार, राज्य और केंद्र में एक ही गठबंधन की सरकार होने के बावजूद यदि जरूरतमंद लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
'डबल इंजन' सरकार पर भाटी का निशाना
भाटी ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि EWS वर्ग के लोगों को सुविधाएं हासिल करने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
विधायक ने कहा कि अगर डबल इंजन सरकार लोगों के काम नहीं आती, तो ऐसी व्यवस्था का क्या फायदा है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपनी समस्याओं को लेकर जागरूक हैं और पंचायती राज चुनाव में इसका जवाब देने के लिए तैयार बैठे हैं।
राजस्थान और केंद्र के आंकड़ों का किया जिक्र
रविंद्र सिंह भाटी ने EWS प्रमाण पत्र जारी होने से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे। उनके दावे के अनुसार, वर्ष 2022-23 में राजस्थान में 2.77 लाख से अधिक EWS प्रमाण पत्र जारी किए गए। वहीं, केंद्र स्तर पर लगभग 95 हजार प्रमाण पत्र ही जारी हो सके।
भाटी ने इन आंकड़ों के आधार पर EWS व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया, पात्रता और दस्तावेजों से जुड़े नियमों को सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्र लोगों को इसका लाभ मिल सके।
2019 में लागू हुआ था 10 प्रतिशत आरक्षण
विधायक ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था वर्ष 2019 में लागू की गई थी। इसके तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में EWS वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में फरवरी 2019 से EWS आरक्षण लागू किया गया था। बाद में प्रमाण पत्र की वैधता को तीन वर्ष किए जाने से लोगों को राहत मिली। हालांकि, भाटी के अनुसार, इसके बावजूद पात्रता, आय की गणना और दस्तावेजों से जुड़ी कई समस्याएं बनी हुई हैं।
EWS आरक्षण का लाभ लेने के लिए आय और संपत्ति से संबंधित निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है। भाटी ने इन्हीं शर्तों को राज्य की परिस्थितियों के अनुसार सरल बनाने की मांग की है।
EWS व्यवस्था में बदलाव की प्रमुख मांगें
रविंद्र सिंह भाटी ने EWS व्यवस्था में कई सुधारों की मांग रखी। इनमें राज्यवार परिस्थितियों के अनुसार नियम बनाने की अनुमति, आयु सीमा और आवेदन शुल्क में उचित छूट शामिल है।
उन्होंने केंद्रीय स्तर पर EWS प्रमाण पत्र की वैधता बढ़ाने की मांग भी की। इसके साथ ही परिवार की आय की गणना की प्रक्रिया को आसान बनाने की बात कही।
भाटी ने EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर एक संस्थागत व्यवस्था बनाने की अपील की, जिससे प्रमाण पत्र और आरक्षण से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो सके। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए उचित प्रतिनिधित्व पर विचार करने की मांग रखी।
पंचायती राज चुनाव से पहले उठाया मुद्दा
राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों से पहले EWS आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी नौकरी, शिक्षा और आरक्षण से जुड़े विषय लंबे समय से चर्चा में रहते हैं।
भाटी ने सरकार से मांग की कि चुनाव से पहले ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि EWS नियमों में सुधार होने से पात्र युवाओं को सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ मिल सकेगा।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मांग को केंद्र के सामने किस तरह उठाती है और EWS व्यवस्था में बदलाव को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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