विदेश से MBBS, भारत में FMGE पास न कर पाए, फिर बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट
समझें क्या है पूरा मामला
- फर्जी FMGE प्रमाण पत्र मामले में SOG ने 3 और डॉक्टरों को किया गिरफ्तार।
- 23-25 लाख रुपए देकर बनवाया फर्जी प्रमाण पत्र, 17 डॉक्टरों पर शिकंजा।
- विदेश से MBBS, FMGE पास नहीं कर पाए, फिर बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट।
- दौसा, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा के हैं तीनों डॉक्टर, SOG कर रही है छानबीन।
- फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से राजस्थान मेडिकल काउंसिल में करवाया रजिस्ट्रेशन।
विदेश से MBBS करने के बाद फर्जी एफएमजीई (FMGE – Foreign Medical Graduate Examination) सर्टिफिकेट के जरिए इंटर्नशिप और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में एसओजी ने तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है।
तीनों ने गिरोह के जरिए 23 से 25 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाण पत्र हासिल किए थे। एसओजी अब तक ऐसे 17 डॉक्टरों को गिरफ्तार कर चुकी है और करीब 100 डॉक्टरों को चिह्नित किया गया है।
कौन हैं तीन गिरफ्तार डॉक्टर?
एसओजी के एडीजी (Additional Director General) विशाल बंसल ने बताया कि बांसवाड़ा के उम्मेदगढ़ी निवासी नवदीप तंबोलिया, चित्तौड़गढ़ के छोटी सादड़ी निवासी चिराग साहू और दौसा के गढ़ हिम्मतसिंह निवासी आफरीदी खान को गिरफ्तार किया गया है।
तीनों ने अलग-अलग देशों से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी और भारत लौटने के बाद FMGE परीक्षा में बार-बार असफल रहे थे।
किर्गिस्तान से MBBS, 25 लाख में बना सर्टिफिकेट
नवदीप तंबोलिया ने किर्गिस्तान से MBBS की और 2022 में भारत वापस आया। उसने एनबीई (National Board of Examinations) द्वारा आयोजित FMGE परीक्षा कई बार देने की कोशिश की लेकिन पास नहीं हुआ।
उसने अपने गांव के पड़ोसी दिशांत टेलर के जरिए दौसा निवासी शुभम गुर्जर से संपर्क किया और 25 लाख रुपए देकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवा लिया। इसके बाद उसने दौसा के राजकीय मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप भी कर ली।
कजाकिस्तान से MBBS, साथी से ही करवाया फर्जीवाड़ा
आरोपी चिराग साहू ने कजाकिस्तान से MBBS की और 2023 में भारत आया। वह भी कई बार FMGE परीक्षा में असफल रहा। उसने कजाकिस्तान में साथ पढ़ने वाले विकास यादव के जरिए 23.50 लाख रुपए में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया।
इसके बाद उदयपुर के पैसिफिक मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप पूरी की। विकास यादव को एसओजी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
सीनियर ने ही बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट
आफरीदी खान ने भी कजाकिस्तान से MBBS की और 2022 में भारत आया। उसने भी कई बार प्रयास किया लेकिन FMGE पास नहीं कर सका। उसने अपने सीनियर शुभम गुर्जर को 25 लाख रुपए देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया।
इसके बाद अलवर के राजकीय मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप की। शुभम गुर्जर को भी एसओजी पहले गिरफ्तार कर चुकी है। तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 4 जुलाई तक रिमांड पर लिया गया है।
अब तक 17 डॉक्टर गिरफ्तार, RMC अधिकारी भी शामिल
इस मामले में अब तक फर्जी सर्टिफिकेट से इंटर्नशिप और RMC में रजिस्ट्रेशन कराने वाले 17 डॉक्टर गिरफ्तार हो चुके हैं। इनके अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी (Upper Division Clerk) अखिलेश माथुर, एलडीसी (Lower Division Clerk) फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम और एक दलाल को भी एसओजी पहले गिरफ्तार कर चुकी है।
भानाराम और उसके साथी शुभम गुर्जर तथा इंद्रराज गुर्जर 20 से 30 लाख रुपए लेकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने और RMC में पंजीयन कराने के मुख्य सूत्रधार थे।
करीब 100 डॉक्टर रडार पर
एसओजी ने ऐसे करीब 100 डॉक्टरों को चिह्नित किया है जिन्होंने फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाकर RMC में रजिस्ट्रेशन कराया। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
FAQ
- फर्जी FMGE सर्टिफिकेट केस क्या है?
विदेश से MBBS करने वाले कुछ छात्र भारत लौटकर FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाए। उन्होंने गिरोह के जरिए 20-30 लाख रुपए देकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाया और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों से इंटर्नशिप की।
ये भी पढ़े:-
एक लाख में एग्जाम देने वाला डमी गिरफ्तार, SOG ने रखा था 10 हजार का इनामी
SOG की बड़ी कार्रवाई, फर्जी ताइक्वांडो सर्टिफिकेट मामले में एक और अभ्यर्थी गिरफ्तार
खेल संघ के पूर्व सचिव को SOG ने किया गिरफ्तार, जारी किए थे फर्जी प्रमाण पत्र
FMGE परीक्षा में फेल, डॉक्टर ने मार्कशीट में छेड़छाड़ कर रचाया इंटर्नशिप का खेल