वीबी-जी राम जी विधेयक : मनरेगा खत्म करना अरुणा रॉय को स्वीकार नहीं, कहा-नया कानून पेट पर लात मारने वाला

Mukesh Sharma | Dec 22, 2025, 18:16 IST
Photograph: (the sootr)
सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने मनरेगा खत्म करके लाए गए नए कानून को करोड़ों भारतीयों के पेट पर लात मारने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि जब तक इस कानून को वापस नहीं लिया जाता, तब तक राजस्थान सहित देश भर में आंदोलन चलाया जाएगा।

Jaipur. सूचना का अधिकार और मनरेगा जैसे सशक्त कानूनों के लिए संघर्ष करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने मनरेगा खत्म करने और उसके स्थान पर वीबी-जी राम जी विधेयक लागू करने का विरोध किया है। उन्होंने नए कानून को मजदूर व ग्रामीण विरोधी बताते हुए वापस लेने और इसके लिए राजस्थान सहित देश भर में आंदोलन करने की घोषणा की है।



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कोई गारंटी नहीं काम की

मजदूर शक्ति संगठन के निखिल डे ने कहा कि नए कानून में 125 दिन तो दूर, एक दिन के काम की भी गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि मनरेगा एक्ट 2005 के तहत बिना किसी भेदभाव के कोई भी अकुशल शारीरिक मजदूरी करने वाला कहीं भी कभी भी काम मांग सकता था। 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलने पर पर बेरोजगारी भत्ते का अधिकार था।



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गांवों का चयन मनमर्जी से

डे ने कहा कि नए कानून के अनुसार राज्य सरकारें केवल उन्हीं ग्रामीण इलाकों में काम देंगी, जिन्हें केंद्र सरकार चिन्हित करके अधिसूचित करेगी यानी जिस ग्रामीण इलाके को केंद्र सरकार ने अधिसूचित नहीं किया है, उस इलाके के ग्रामीणों को कोई काम नहीं मिलेगा। नए कानून में काम मिलने की कोई गारंटी ही नहीं है।



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काम नहीं देने के लिए नया कानून

रॉय ने कहा कि मनरेगा असंगठित मजदूरों के लिए बड़ा वरदान था। काम के अनुसार मजदूरी, आठ घंटे की मजदूरी व कार्यस्थल पर सुविधाओं ने ग्रामीण इलाकों के हालात में सुधार किया था। नए कानून में 12 घंटे काम करने, बायोमेट्रिक उपस्थिति, एनएमएमएस ऐप और दूसरी तकनीकी प्रणालियों का प्रयोग करना काम नहीं देने की तैयारी है।



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राज्यों पर वित्तीय बोझ

मनरेगा में मजदूरी का 100 और सामग्री का 75 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देती थी। राज्य सरकारें सामग्री लागत का 25 फीसदी और बेरोजगारी भत्ते तक ही सीमित थीं तथा केंद्र व राज्य के बीच 90:10 का अनुपात था। नए कानून में केंद्र सरकार राज्य के हिसाब से पैसे का मानक आवंटन तय करेगी। आवंटन से ज्यादा खर्च राज्य सरकार वहन करेंगी तथा कुल खर्च का 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार देंगी।



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पूरे देश में मनाएंगे राष्ट्रीय शोक दिवस

रॉय ने कहा कि राज्यों की वित्तीय हालात पहले से ही खराब है। ऐसे में वे क्या खर्च कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि नए कानून को वापस लेने तक पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक सांसद से लेकर पीएम तक को पत्र लिखे जाएंगे। गांव से लेकर राज्य स्तर तक संवाद ​कार्यक्रम होंगे। पूरे देश में एक साथ दो और पांच फरवरी, 2026 को शोक दिवस मनाएंगे। कानून वापस नहीं होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।



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