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Photograph: (the sootr)
News in Short
- राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर सुरक्षा एजेंसियां घाटी में 'शकीला' की तलाश करेगी।
- पुलिस को आदेश दिया है कि वह अर्धसैनिक बलों की मदद से सर्च अभियान चलाए।
- यह मामला राजस्थान के जितेंद्र की प्रेम कहानी का है, जिसका अपनी पत्नी से टूट गया था संपर्क।
- जितेंद्र ने शकीला को तलाशने के लिए हाई कोर्ट में लगाई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका।
- हाई कोर्ट ने शकीला की तलाश के लिए तय की 23 फरवरी की डेडलाइन
​News in Detail
राजस्थान के कुचामन-डीडवाना जिले से शुरू हुई एक लव स्टोरी आज देश की सुरक्षा एजेंसियों और न्यायपालिका के बीच चर्चा का विषय बन गई है। यह कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म जैसी नजर आती है, जहां प्यार है, तकरार है, भरपूर तनाव है। अब इस मामले में अर्धसैनिक बलों की एंट्री भी हो चुकी है। हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आदेश में कहा है कि अब राजस्थान पुलिस अकेले नहीं, बल्कि सीआरपीएफ और पैरा मिलिट्री फोर्स के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर के आतंक प्रभावित इलाकों में 'शकीला' की तलाश करेगी।
​क्या है पूरा मामला?
इस कहानी की शुरुआत होती है कुचामन-डीडवाना के सुदरासन गांव के जितेन्द्र सिंह से। जितेन्द्र कुछ समय पहले जम्मू में एक कंपनी में ठेके पर काम करने गया था। वहीं, उसकी मुलाकात अनंतनाग के अलसीदार गांव की रहने वाली शकीला से हुई। धीरे-धीरे यह जान-पहचान प्यार में बदल गई। जितेन्द्र का दावा है कि उसने शकीला के परिजनों की सहमति से फिरोजपुर में उससे शादी की और लिव-इन रिलेशनशिप का सर्टिफिकेट भी बनवाया।
इस कहानी में मोड़ तब आया, जब शकीला के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। जम्मू पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया, लेकिन शकीला ने जितेन्द्र के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। इसके बावजूद शकीला को जितेन्द्र के साथ नहीं भेजा गया। उसे वापस उसके घर भेज दिया गया। इसके बाद जितेन्द्र का अपनी पत्नी से संपर्क टूट गया, जिसके बाद उसने हार न मानते हुए न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
​जब वकीलों ने बोला 'झूठ' और पुलिस को मिली नाकामयाबी
​जितेन्द्र की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि इस मामले को दबाने के लिए स्थानीय स्तर पर काफी रसूख का इस्तेमाल किया गया। बताया गया कि एक वकील ने पुलिस टीम को गुमराह करते हुए कहा कि शकीला की ओर से श्रीनगर में याचिका लगाई गई है, जो बाद में सफेद झूठ निकला।
राजस्थान पुलिस की टीम अब तक तीन बार कश्मीर जा चुकी है, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। स्थानीय पुलिस और लोगों का सहयोग न मिलना सबसे बड़ी बाधा बनी। आतंक प्रभावित इलाकों में रात में तलाशी लेने से स्थानीय पुलिस ने मना कर दिया। राजस्थान पुलिस को औपचारिकताएं पूरी कर वापस भेज दिया गया।
​हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 23 फरवरी तक 'डेडलाइन'​
जोधपुर हाई कोर्ट के जस्टिस विनीत कुमार माथुर और चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने माना कि राजस्थान पुलिस को जम्मू और कश्मीर में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि शकीला को जल्द से जल्द तलाश कर कोर्ट में पेश किया जाए।
कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि राजस्थान पुलिस की टीम इस मामले में सीआरपीएफ और पैरा मिलिट्री फोर्स के सुरक्षा घेरे में ऑपरेशन चलाए। कोर्ट ने ​बरड़वा थाने के एसएचओ महेंद्र सिंह पालावत को सख्त निर्देश दिए हैं कि 23 फरवरी तक हर हाल में शकीला को ढूंढकर अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
​चुनौतियां और आगामी कदम
​यह मामला अब केवल दो प्रेमियों के मिलन का नहीं रह गया है, बल्कि यह दो राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय और सुरक्षा प्रोटोकॉल का भी परीक्षण है। कश्मीर के उन इलाकों में जहाँ आतंकी साया हमेशा बना रहता है, वहां एक महिला की तलाश करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
​सीआई महेंद्र सिंह पालावत ने बताया कि वे पहले भी अनंतनाग और पुलवामा के कई गांवों की खाक छान चुके हैं, लेकिन अब फोर्स के साथ वे नए सिरे से सर्च ऑपरेशन शुरू करेंगे। जितेन्द्र सिंह आज भी अपनी शादी के सर्टिफिकेट और कोर्ट के आदेशों के साथ अपनी 'शकीला' का इंतजार कर रहा है।
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