भारत-पाक सीमा पर फिर ड्रोन से हेरोइन, इस साल अब तक 45 किलो बरामद

Ashish Bhardwaj | Jul 20, 2026, 16:18 IST
बॉर्डर पर हेरोइन
राजस्थान में श्रीगंगानगर के हिंदुमलकोट बॉर्डर पर पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए एक किलो हेरोइन गिराई गई। इस साल अब तक 45 किलो से ज्यादा हेरोइन बरामद हो चुकी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • हिंदुमलकोट बॉर्डर पर ड्रोन से गिराई 1 किलो हेरोइन बरामद।
  • पाकिस्तान से ड्रोन तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
  • 2026 में अब तक 45.8 किलो से ज्यादा हेरोइन जब्त।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद हेरोइन की कीमत 254 करोड़ आंकी गई।
  • पुलिस, BSF और सुरक्षा एजेंसियां तस्करी नेटवर्क की जांच में जुटीं।

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी के प्रयास लगातार जारी हैं। रविवार को एक बार फिर हिंदुमलकोट बॉर्डर क्षेत्र में ड्रोन के जरिए एक किलो हेरोइन की खेप भारतीय सीमा में गिराई गई।



घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि इससे जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है। सीमा क्षेत्र में इस साल ड्रोन के जरिए हो रही तस्करी के आंकड़े सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं।



6 महीने में 45 किलो से ज्यादा हेरोइन बरामद

पुलिस के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक साल 2026 में अब तक करीब साढ़े छह महीने की अवधि में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए 45 किलो 808 ग्राम हेरोइन भारतीय सीमा में पहुंचाई जा चुकी है।



अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस हेरोइन की अनुमानित कीमत करीब 254 करोड़ रुपए आंकी गई है, जो इस तस्करी नेटवर्क की गंभीरता को दर्शाती है।



कई इलाकों तक फैली ड्रोन ड्रॉपिंग की घटनाएं

ड्रोन ड्रॉपिंग की घटनाएं अब सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रहीं। ये घटनाएं श्रीगंगानगर जिले के करणपुर, रायसिंहनगर, रावला, हिंदुमलकोट, केसरी सिंहपुर, जैतसर के साथ-साथ बीकानेर सेक्टर के खाजूवाला क्षेत्र तक फैल चुकी हैं।



अधिकांश मामलों में तस्कर रात के समय ड्रोन के जरिए खेतों में हेरोइन गिराते हैं। इसे लेने के लिए पहले से ही स्थानीय संपर्क सक्रिय रहते हैं, जो मौके पर पहुंचकर खेप उठा लेते हैं।



संयुक्त कार्रवाई में कई गिरफ्तारियां

पुलिस, बीएसएफ (BSF – Border Security Force), एनसीबी (NCB – Narcotics Control Bureau) और सीआईडी (CID – Criminal Investigation Department) ने मिलकर संयुक्त कार्रवाई करते हुए कई बड़ी खेप बरामद की हैं।



इस दौरान पंजाब और सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय कई तस्करों और उनके स्थानीय सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानीय युवक कथित तौर पर स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहे थे। ये युवक ड्रोन से गिराई गई खेप को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम करते थे।



सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है यह तस्करी

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए हेरोइन और हथियार भेजना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इसका मकसद सीमावर्ती इलाकों में नशे के नेटवर्क को मजबूत करना है।



इसके अलावा इस रणनीति के जरिए युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने और भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास भी किया जा रहा है।



एंटी-ड्रोन तकनीक की बढ़ी जरूरत

ड्रोन आधारित तस्करी अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई और गंभीर चुनौती बन चुकी है। इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।



इसके साथ ही उन्नत रडार प्रणाली और अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल भी बेहद जरूरी माना जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की तस्करी को समय रहते रोका जा सके।



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