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Photograph: (the sootr)
News in Short
- राजस्थान के अलवर में 38 साल के शिक्षक ने मानसिक तनाव के कारण फांसी लगाकर आत्महत्या की।
- शिक्षक ने सुसाइड नोट में आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद अत्यधिक काम का दबाव डाला।
- जून में रिटायर होने वाले शिक्षक को कार्यभार सौंपने के लिए बार-बार प्रार्थना पत्र देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
- पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और शिक्षक के शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। जांच जारी है।
- सुसाइड नोट में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, शिक्षा विभाग में इस घटना से हड़कंप मचा है।
सुनील जैन @ अलवर
News in Detail
राजस्थान के अलवर जिले में एक शिक्षक ने अपनी जान ले ली, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। घटना डहलावास राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में हुई, जहां 38 वर्षों तक अपनी सेवा देने वाले शिक्षक ने मानसिक दबाव और स्कूल प्रशासन के उत्पीड़न के कारण आत्महत्या कर ली। शिक्षक ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उसने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उसे लगातार काम करने के लिए दबाव डाला।
स्वास्थ्य समस्या और मानसिक दबाव
मृतक शिक्षक बड़डन राम बलाई, जो जून में रिटायर होने वाले थे, पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव का शिकार थे। उनके सिर में कोरोना महामारी के दौरान क्लॉट जमा होने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ गई थी। इसके बावजूद, स्कूल प्रशासन ने उन्हें काम पर दबाव डाला। शिक्षक ने कई बार लिखित में यह आग्रह किया था कि उनका कार्यभार किसी अन्य शिक्षक को सौंपा जाए, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
सुसाइड नोट में क्या लिखा था?
शिक्षक ने सुसाइड नोट में अपनी 38 वर्षों की सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को पढ़ाया और बोर्ड परीक्षाओं में बेहतरीन परिणाम दिए। फिर भी, पिछले कुछ महीनों से उन्हें विभिन्न शैक्षणिक कार्यों और जिम्मेदारियों को लेकर अत्यधिक दबाव का सामना करना पड़ा। नोट में यह भी लिखा था कि मानसिक तनाव के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई और उन्होंने इलाज भी कराया, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।
परिजनों और पुलिस का बयान
मृतक के भतीजे सुरेंद्र ने बताया कि शिक्षक को मानसिक तनाव से बचाने के लिए कई प्रयास किए गए थे, लेकिन स्कूल प्रशासन की ओर से कोई सहानुभूति नहीं दिखाई गई। शिक्षकों पर लगातार दबाव बनाए जाने की वजह से शिक्षक ने मानसिक रूप से टूटकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद, उनके परिवार ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है और न्याय की मांग की है।
घटनास्थल पर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। शिक्षक के शव को अलवर लाया गया और डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। अगले दिन शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। इस मामले को लेकर अकबरपुर पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में हड़कंप, जांच की मांग
मृतक शिक्षक के द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। नोट में उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है। इस घटना के बाद, शिक्षा विभाग ने अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने का संकेत दिया है।
आखिर क्यों हुआ यह हादसा?
यह घटना केवल एक शिक्षक की आत्महत्या नहीं, बल्कि हमारे शिक्षा प्रणाली और प्रशासनिक दबावों का भी गंभीर संकेत है। अगर प्रशासन और स्कूल प्रबंधन समय रहते शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करते, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
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