टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: ट्रेन में पकौड़ी खरीद रहे थे आरोपी, जानें पुलिस ने कैसे बिना गोली चलाए तीनों को पकड़ा?
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में कोटा पुलिस ने सोमवार को तीन संदिग्धों को ट्रेन से पकड़ा। पुलिस ने भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशन पर बिना गोली चलाए पूरी कार्रवाई की। इसके लिए एक पुलिसकर्मी आम यात्री बनकर बैग लेकर ट्रेन के जनरल कोच में चढ़ा। वह संदिग्धों के पास जाकर बैठ गया। इसके बाद उसने अपने साथियों को इशारा किया और 6 से 7 पुलिसकर्मी भी एक-एक करके कोच में पहुंच गए।
तीनों संदिग्ध कुछ समझ पाते, उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। पकड़े गए लोगों में रेहान उर्फ सुक्का, ऋतिक उर्फ रोशन और एक नाबालिग शामिल हैं। कोटा पुलिस ने यह कार्रवाई मुंबई पुलिस से मिली सूचना के आधार पर की। तीनों पुणे-जयपुर ट्रेन से सफर कर रहे थे। पुलिस अब इन्हें मुंबई पुलिस को सौंपने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।
सुबह 9:15 बजे मुंबई पुलिस ने दिया अलर्ट
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 9:15 बजे कोटा सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम को मुंबई पुलिस से सूचना मिली थी। मुंबई पुलिस ने बताया कि टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले के तीन संदिग्ध पुणे-जयपुर ट्रेन से कोटा की तरफ आ रहे हैं।
सूचना मिलते ही एसपी ने भीमगंजमंडी और रेलवे कॉलोनी थाने की पुलिस को अलर्ट किया। दोनों थाने रेलवे स्टेशन के पास हैं, इसलिए वहां की टीमों को तुरंत कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई। अलर्ट के समय कुछ पुलिसकर्मी घर पर थे, जबकि कुछ दूसरी ड्यूटी पर तैनात थे। सूचना मिलते ही सभी रेलवे स्टेशन की ओर रवाना हुए। करीब 20 से 30 मिनट में पुलिस की टीमें स्टेशन पहुंच गईं।
प्लेटफॉर्म नंबर एक पर तीन तरफ से घेराबंदी
संदिग्धों के ट्रेन से उतरकर भागने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने प्लेटफॉर्म नंबर एक पर तीन टीमें तैनात कीं। पहली टीम रेलवे कॉलोनी थाने के सीआई रामस्वरूप मीणा के नेतृत्व में थी। दूसरी टीम की जिम्मेदारी भीमगंजमंडी थाने के सीआई रामविलास मीणा को दी गई।
तीसरी टीम की कमान डीएसटी इंचार्ज एसआई लइक अहमद के पास थी। एक टीम प्लेटफॉर्म के आगे, दूसरी बीच और तीसरी पीछे की तरफ तैनात रही। कुछ पुलिसकर्मियों को रेलवे पटरी के पास भी लगाया गया। कार्रवाई में डीएसटी, साइबर सेल और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के पुलिसकर्मी भी शामिल हुए।
मुंबई पुलिस ने भेजी थीं संदिग्धों की तस्वीरें
कोटा पुलिस को मुंबई पुलिस की तरफ से तीनों संदिग्धों की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज भेजे गए थे। इसी आधार पर पुलिस को पता था कि ट्रेन में किन लोगों की तलाश करनी है।
जैसे ही पुणे-जयपुर ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पहुंची, पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग कोच में संदिग्धों को तलाशना शुरू किया। डीएसटी और साइबर सेल की टीमें इंजन की तरफ वाले डिब्बों में जांच कर रही थीं। साइबर सेल संदिग्धों की लोकेशन पर भी नजर रख रही थी। इसी दौरान पुलिस को इंजन के पीछे दूसरे जनरल कोच में तीनों संदिग्ध दिखाई दिए।
एक पकौड़ी खरीद रहा था, दूसरा ऊपर की बर्थ पर सो रहा था
पुलिस ने जब जनरल कोच में संदिग्धों को देखा, तो उनमें से एक ट्रेन के दरवाजे तक आया हुआ था। हालांकि, वह नीचे नहीं उतरा। दूसरा संदिग्ध खिड़की से पकौड़ी खरीद रहा था, जबकि तीसरा अपनी जगह पर था।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय पहले मुंबई पुलिस से मिली तस्वीरों का मिलान किया। पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने तय किया कि तीनों को कोच के अंदर ही पकड़ा जाएगा, ताकि वे भीड़ का फायदा उठाकर भाग न सकें।
बैग लेकर यात्री बना पुलिसकर्मी, फिर अंदर पहुंची पूरी टीम
तीनों की पहचान होने के बाद पुलिस टीम का एक सदस्य आम यात्री बनकर जनरल कोच में चढ़ा। उसके हाथ में एक बैग था। वह सीधे उस सीट के पास पहुंचा, जहां दो संदिग्ध बैठे थे। तीसरा संदिग्ध ऋतिक ऊपर की बर्थ पर बैग पर सिर रखकर सो रहा था।
पुलिसकर्मी ने अपना बैग उसी सीट पर रख दिया, जहां दोनों संदिग्ध बैठे थे। उसने ऐसा व्यवहार किया जैसे वह भी ट्रेन में सफर करने आया हो। इसके बाद उसने अपने साथियों को बताया कि कोच में जगह खाली है।
यह सुनकर टीम के 6 से 7 पुलिसकर्मी एक-एक करके अंदर पहुंच गए। जैसे ही सभी पुलिसकर्मी सही जगह पर पहुंचे, उन्होंने एक साथ तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया।
10 से 15 मिनट में पूरी कार्रवाई, गोली चलाने की जरूरत नहीं पड़ी
कोटा पुलिस के मुताबिक, जनरल कोच के अंदर संदिग्धों को पकड़ने की कार्रवाई करीब 10 से 15 मिनट में पूरी हुई। पुलिस ने तीनों को इस तरह घेरा कि किसी को भागने का मौका नहीं मिला।
इस दौरान न तो गोली चलानी पड़ी और न ही कोई बड़ी झड़प हुई। भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशन और जनरल कोच में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने पूरी कार्रवाई की।
एसपी बोलीं- सीसीटीवी फुटेज से पहचान करने में मिली मदद
कोटा सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि मुंबई पुलिस से तीन संदिग्धों के ट्रेन में होने की जानकारी मिली थी। इसके साथ ही उनकी तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज भी भेजे गए थे।
सूचना मिलने के बाद अलग-अलग टीमें बनाकर रेलवे स्टेशन पर तैनात की गईं। ट्रेन के पहुंचते ही संदिग्धों की तलाश शुरू की गई और तीनों को पकड़ लिया गया। एसपी के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में तीनों ने फायरिंग की घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की है।
दो हरियाणा और एक बिहार का रहने वाला
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए तीन संदिग्धों में से दो हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। तीसरा बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है। वह पिछले तीन से चार साल से मुंबई में रह रहा था और वहां रैपिडो बाइक राइडर के तौर पर काम करता था।
पकड़े गए दो आरोपियों की पहचान रेहान उर्फ सुक्का और ऋतिक उर्फ रोशन के रूप में हुई है। तीसरा नाबालिग है, इसलिए उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
मुंबई पुलिस करेगी आगे की पूछताछ
तीनों संदिग्धों के पकड़े जाने के बाद कोटा पुलिस ने मुंबई पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद मुंबई पुलिस की टीम भी कोटा पहुंच गई। दोनों वयस्क आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया के लिए सोमवार शाम न्यायिक अधिकारी के आवास पर पेश किया गया।
नाबालिग के मामले में किशोर न्याय कानून के तहत अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मुंबई पुलिस अब यह पता लगाएगी कि फायरिंग की योजना किसने बनाई थी, वारदात में किसकी क्या भूमिका थी और घटना के बाद तीनों मुंबई से कैसे निकले।