गहलोत-पायलट के बीच चली भंवर जितेंद्र सिंह की, उनके नजदीकी माने जाने वाले टीकाराम जूली बने नेता प्रतिपक्ष
Jitendra Shrivastava | Jan 16, 2024, 21:20 IST
गहलोत-पायलट के बीच चली भंवर जितेंद्र सिंह की, उनके नजदीकी माने जाने वाले टीकाराम जूली बने नेता प्रतिपक्ष
लंबे इंतजार के बाद आखिर कांग्रेस ने राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष की घोषणा कर दी है।
मनीष गोधा, JAIPUR. लंबे इंतजार के बाद आखिर कांग्रेस ने राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष की घोषणा कर दी है। अलवर ग्रामीण से विधायक टीकाराम जूली राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता होंगे। वही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा अपने पद पर बने रहेंगे। इस तरह पार्टी ने दो प्रमुख पदों पर दलित और जाट कांबिनेशन बनाया है।
खींचतान के बीच पार्टी का तीसरा विकल्प
नेता प्रतिपक्ष बनाए गए टीकाराम जूली अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं और कांग्रेस की पिछली सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थे। टीकाराम जूली को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह का नजदीकी माना जाता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट गुट के बीच चल रही खींचतान के बीच पार्टी ने एक तीसरा विकल्प चुना और भंवर जितेंद्र सिंह के नजदीकी माने जाने वाले टीकाराम जूली को इस पद पर नियुक्त कर दिया।
सचिन पायलट भी इस पद के दावेदार थे
इस पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय का नाम आगे बढ़ाया गया था जबकि सचिन पायलट गुट पूर्व मंत्री और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी रह चुके हरीश चौधरी को इस पद पर देखना चाह रहा था। हालांकि, खुद सचिन पायलट भी इस पद के दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी बना दिया है ऐसे में वे इस पद की दौड़ से बाहर हो गए थे। दोनों गुटों के बीच अपने-अपने नेताओं के नाम को लेकर लॉबिंग चल रही थी, ऐसे में पार्टी ने एक तीसरा नाम चुन लिया।
डोटासरा बने रहेंगे पद पर
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गोविंद सिंह डोटासरा के पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने के आदेश भी जारी किए हैं। हालांकि, डोटासरा स्वयं नेता प्रतिपक्ष पद के दावेदार थे। वे तीन बार के विधायक और एक बार उपनेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। ऐसे मे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन अब पार्टी उनके नेतृत्व में ही लोकसभा चुनाव लड़ेगी।
जाट दलित वोट बैंक साधे
टीकाराम जूली को नेता प्रतिपक्ष बनाकर और गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखकर कांग्रेस ने राजस्थान में अपने दो बड़े वोट बैंक दलित और जाटों को साधने की कोशिश की है। इसके साथ ही गहलोत और पायलट गुट का कोई नेता ना चुन कर पार्टी में चली आ रही खींचतान खतम करने का प्रयास भी किया है।
खींचतान के बीच पार्टी का तीसरा विकल्प
नेता प्रतिपक्ष बनाए गए टीकाराम जूली अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं और कांग्रेस की पिछली सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थे। टीकाराम जूली को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह का नजदीकी माना जाता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट गुट के बीच चल रही खींचतान के बीच पार्टी ने एक तीसरा विकल्प चुना और भंवर जितेंद्र सिंह के नजदीकी माने जाने वाले टीकाराम जूली को इस पद पर नियुक्त कर दिया।
सचिन पायलट भी इस पद के दावेदार थे
इस पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय का नाम आगे बढ़ाया गया था जबकि सचिन पायलट गुट पूर्व मंत्री और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी रह चुके हरीश चौधरी को इस पद पर देखना चाह रहा था। हालांकि, खुद सचिन पायलट भी इस पद के दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी बना दिया है ऐसे में वे इस पद की दौड़ से बाहर हो गए थे। दोनों गुटों के बीच अपने-अपने नेताओं के नाम को लेकर लॉबिंग चल रही थी, ऐसे में पार्टी ने एक तीसरा नाम चुन लिया।
डोटासरा बने रहेंगे पद पर
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गोविंद सिंह डोटासरा के पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने के आदेश भी जारी किए हैं। हालांकि, डोटासरा स्वयं नेता प्रतिपक्ष पद के दावेदार थे। वे तीन बार के विधायक और एक बार उपनेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। ऐसे मे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन अब पार्टी उनके नेतृत्व में ही लोकसभा चुनाव लड़ेगी।
जाट दलित वोट बैंक साधे
टीकाराम जूली को नेता प्रतिपक्ष बनाकर और गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखकर कांग्रेस ने राजस्थान में अपने दो बड़े वोट बैंक दलित और जाटों को साधने की कोशिश की है। इसके साथ ही गहलोत और पायलट गुट का कोई नेता ना चुन कर पार्टी में चली आ रही खींचतान खतम करने का प्रयास भी किया है।
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