तबादलों में भारी गड़बड़ी, मृत कर्मचारी का भी कर दिया ट्रांसफर
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में तबादलों पर बवाल, कर्मचारी संगठनों ने गड़बड़ी के लगाए आरोप।
- ऑफलाइन तबादला सूचियों में मृत कर्मचारी और रिटायर्ड प्रोफेसर के नाम शामिल।
- बीमार और विधवा कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप, RCSAT जाने की तैयारी।
- शिक्षा विभाग की तबादला सूची में डबल नाम और गलत आदेशों पर विरोध।
- कर्मचारी बोले- पहुंच वालों को फायदा, नियमों की हुई अनदेखी।
राजस्थान में तबादलों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कर्मचारी संगठनों ने ऑफलाइन सूचियों में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। एक साल पहले मृत हो चुके कर्मचारी का भी तबादला कर दिया गया। गंभीर बीमार और विधवा श्रेणी के कर्मचारियों की अनदेखी की गई है।
अब कर्मचारी राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण जाने की तैयारी कर रहे हैं। जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार तबादलों पर छूट का दिन तो पीछे छूट गया, लेकिन तबादलों को लेकर बवाल बढ़ रहा है। कर्मचारी संगठनों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि रविवार 12 जुलाई को भी शिक्षा विभाग सहित कुछ विभागों में ऑफलाइन सूचियां जारी होने का सिलसिला थमा नहीं। कई जगह गाइडलाइन दरकिनार होने के कारण कर्मचारियों ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण (RCSAT – Rajasthan Civil Services Appellate Tribunal) का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
वहीं कई कर्मचारी गंभीर बीमार और विधवा श्रेणी के कर्मचारियों के आवेदनों को दरकिनार कर स्वयं को यथावत रखने में कामयाब हो गए। ऑफलाइन जारी सूचियों में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में तो संगठन खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
रविवार को जारी सूची में भी गड़बड़ी
रविवार को जारी ऑफलाइन तबादला सूची में प्रयोगशाला सहायक और पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड थर्ड के तबादले भी कर दिए गए। हालांकि कुछ ही देर बाद विभाग ने इन्हें निरस्त कर दिया।
शिक्षा विभाग में आफलाइन आदेश जारी किए जाने का आरोप लगाते हुए रविवार को सोशल मीडिया पर ये आदेश वायरल हो गए।
डीपीसी से बने व्याख्याताओं की उम्मीदों पर रोक
तीन साल की बकाया डीपीसी (DPC – Departmental Promotion Committee) से हाल ही में करीब 12 हजार वरिष्ठ अध्यापक व्याख्याता बने थे। लेकिन शिक्षा विभाग ने अघोषित नियम बनाकर डीपीसी से व्याख्याता बनने वालों की डिजायर नहीं ली।
इसके अलावा पिछले पांच साल में प्रदेश में 6000 विद्यालयों को उच्च माध्यमिक क्रमोन्नत किया गया, जिनमें करीब 18 हजार व्याख्याताओं की वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव चार महीने से वित्त विभाग में लंबित पड़ा है।
प्रोफेसरों के तबादलों में भी गड़बड़ी
उच्च शिक्षा विभाग ने नीमकाथाना और चित्तौड़गढ़ के एक-एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर का भी तबादला कर दिया। वहीं तीन अन्य प्रोफेसरों के नाम दो-दो स्थानों पर दर्ज कर दिए गए। संस्कृत विषय के करीब 30 प्रोफेसरों के नाम भी सूची में दोहराए गए।
बीमार व्याख्याता का भी हुआ तबादला
ब्लड कैंसर और हृदय रोग से पीड़ित डाइट हनुमानगढ़ के वरिष्ठ व्याख्याता सुलतान सिंह संहू का तबादला जोधपुर के खिनानिया विद्यालय में कर दिया गया। उनकी बेटी दृष्टिबाधित है।
सितंबर 2025 में भी उनका तबादला जोधपुर किया गया था, जिसे बाद में निरस्त करना पड़ा था। इसके बावजूद इस बार फिर वही स्थिति दोहराई गई।
व्याख्याता राजकुमार गोयल का जनवरी 2026 में जयपुर से महापुरा, टोंक तबादला हुआ था। छह महीने भी पूरे नहीं हुए कि उन्हें छबड़ा, बारां भेज दिया गया। हाल ही में उनकी बायपास सर्जरी हुई है, पत्नी का निधन हो चुका है और छोटे बेटे की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है।
मृत कर्मचारी का भी हो गया तबादला
एक वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में मृत हो चुके कनिष्ठ सहायक पप्पूराम धौलिया का तबादला बाड़मेर की पाटोदी पंचायत समिति से खींवसर पंचायत समिति में कर दिया गया।
वहीं बैरावास की ग्राम विकास अधिकारी अंजली चौधरी का तबादला बिलाड़ा पंचायत समिति की उसी ग्राम पंचायत लाम्बा में कर दिया गया, जहां वे पहले से ही कार्यरत हैं।
पहुंच वालों के लिए बदले नियम, आरोप
बाड़मेर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत थर्ड ग्रेड शिक्षिका अमृता दीक्षित को कार्य व्यवस्था के नाम पर जयपुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रानीजी की बावड़ी में लगाया गया है।
समसा (SAMSA – Sarv Shiksha and Madhyamik Shiksha Abhiyan) के इंटरव्यू से भरे जाने वाले 1200 पदों पर सीधे तबादले कर दिए गए। वाइस प्रिंसिपल की सूची में ऐसे अनेक अधिकारियों को यथावत रखा गया, जिनके पहले ही तबादले हो चुके थे।
FAQ
- राजस्थान में तबादलों को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है?
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि ऑफलाइन तबादला सूचियों में भारी अनियमितताएं हुई हैं। बीमार, विधवा और यहां तक कि मृत कर्मचारियों के भी तबादला आदेश जारी कर दिए गए। इसी वजह से विरोध बढ़ रहा है। - तबादला सूची में कौनसी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं?
एक मृत कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर का भी तबादला कर दिया गया। कई प्रोफेसरों के नाम सूची में दोहराए गए। ब्लड कैंसर पीड़ित एक व्याख्याता का तबादला दोबारा उसी जगह कर दिया गया, जहां से पहले निरस्त हुआ था। - तबादला विवाद के बाद अब कर्मचारी क्या कदम उठाने की तैयारी में हैं?
प्रभावित कर्मचारियों ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग में कर्मचारी संगठन भी खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
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