रेलवे की सुरक्षित नौकरी छोड़ आईपीएस बने गौरव राय
बलौदाबाजार-भाटापाराछत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक गौरव राय उन युवा अधिकारियों में शामिल हैं, जिनकी सफलता की कहानी मेहनत, धैर्य और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता का उदाहरण है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल करने और फिर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश तक का उनका सफर बेहद प्रेरक रहा है। वर्तमान में वे बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के एसपी हैं।
IES परीक्षा में रचा इतिहास
गौरव राय का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में हुआ। उनके पिता डॉ. राम प्रवेश राय सिविल इंजीनियर हैं, जबकि माता मंजू राय गृहिणी हैं। पिता की नौकरी के कारण परिवार महाराष्ट्र में आकर बस गया। यही कारण रहा कि उनकी स्कूली शिक्षा महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में हुई। दसवीं की परीक्षा उन्होंने सतारा जिले के कराड़ स्थित होली फैमिली कॉन्वेंट हाईस्कूल से लगभग 89 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद अमरावती के शिवाजी साइंस कॉलेज से बारहवीं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इंजीनियर बनने के अपने सपने को उन्होंने पुणे के प्रतिष्ठित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक कर पूरा किया। साल 2013 में महज 20 वर्ष की उम्र में गौरव राय ने बीटेक की पढ़ाई पूरी कर ली थी। हालांकि, उस समय वे इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (IES) परीक्षा देने के लिए पात्र नहीं थे क्योंकि उनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी। अगले वर्ष, जैसे ही उनकी आयु पूरी हुई, उन्होंने IES परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि उनके असाधारण तकनीकी ज्ञान और तैयारी का प्रमाण थी।
असफलताओं से हार नहीं मानी
IES में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के बाद गौरव राय ने भारतीय रेलवे सेवा को चुना। प्रशिक्षण के दौरान भी उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल प्राप्त किया। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से रेल टेक्नोलॉजी में एमटेक भी किया। 2014 से 2019 तक रेलवे में सेवा के दौरान उन्हें एक सफल और सुरक्षित करियर मिल चुका था, लेकिन उनके मन में देश सेवा का एक और सपना जीवित था। रेलवे में कार्यरत रहते हुए उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। यह सफर आसान नहीं था। पहले प्रयास में वे प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सके। दूसरे प्रयास में प्रीलिम्स तो निकला, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिली। तीसरे प्रयास में फिर प्रीलिम्स ही नहीं निकल पाया। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। चौथे प्रयास के लिए उन्होंने रेलवे से छुट्टी ली और पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी की। इसी प्रयास में उन्होंने 204वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा के लिए चयनित हुए।
नक्सल मोर्चे पर महत्वपूर्ण योगदान
आईपीएस गौरव राय :26 अगस्त 2019 को गौरव राय ने आईपीएस सेवा जॉइन की। सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद से प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग बिलासपुर में प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में हुई। यहां उन्होंने कोटा थाना प्रभारी के रूप में अवैध शराब, जुआ-सट्टा और संगठित अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की। इसके बाद वे सीएसपी राजनांदगांव बने, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े चर्चित मामले में शुरुआती एफआईआर दर्ज कराने, चिटफंड ठगी की जांच को आगे बढ़ाने और नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने के कारण वे चर्चा में रहे। राजनांदगांव के बाद उन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशन) बीजापुर बनाया गया, जहां उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान और नए सुरक्षा कैंप स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सफलता साहसिक निर्णयों से
मई 2023 से गौरव राय दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में सफल कार्यकाल के बाद अब वे बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के एसपी के रूप में कार्यभार संभाल रहे है। उनके कार्यकाल में नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय सफलता मिली है। लोन वर्राटु अभियान के तहत बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। साथ ही विधानसभा और लोकसभा चुनावों को संपन्न कराने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। गौरव राय की कहानी यह बताती है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और कठिन निर्णय लेने के साहस से मिलती है। रेलवे के गोल्ड मेडलिस्ट इंजीनियर से लेकर दंतेवाड़ा के पुलिस कप्तान बनने तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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