18 साल की उम्र में फांसी चढ़ने वाले सबसे युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस

Kaushiki | Aug 11, 2026, 08:00 IST
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Khudiram Bose
Khudiram Bose

11 अगस्त 1908 को भारत के सबसे युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस को फांसी दी गई थी। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मुजफ्फरपुर बम कांड में उनकी बहादुरी को आज भी याद किया जाता है।

Khudiram Bose Martyrdom: 11 अगस्त 1908 की वह सुबह बेहद अलग थी। बिहार के मुजफ्फरपुर की जेल के बाहर बहुत बड़ी भीड़ जुटी थी। हर इंसान की आंख में आंसू और भारी गम था। सब लोग अपने प्यारे युवा नेता को देखना चाहते थे। अंदर 18 साल का एक छोटा लड़का खड़ा था। उसके दोनों हाथों में पवित्र भगवद्गीता की किताब थी।

उसके चेहरे पर मौत का कोई डर नहीं दिख रहा था। उसके होंठों पर एक बहुत ही प्यारी मुस्कान थी। उसने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। यह निडर लड़का भारत का वीर बेटा खुदीराम बोस था। उसने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

वह भारत के सबसे कम उम्र के शहीद बने। उनकी शहादत ने पूरे देश में आग लगा दी थी। बंगाल से लेकर पूरे भारत में क्रांति फैल गई थी। युवा लड़के देश के लिए मैदान में उतर आए थे। आइए इस महान हीरो की पूरी कहानी को समझते हैं। हम उनके बचपन और महान बलिदान के बारे में जानेंगे।

खुदीराम बोस जिन्हें 18 साल की उम्र में चढ़ा दिया गया था फांसी पर- विवेचना -  BBC News हिंदी
खुदीराम बोस जिन्हें 18 साल की उम्र में चढ़ा दिया गया था फांसी पर- विवेचना - BBC News हिंदी


खुदीराम बोस का बचपन

खुदीराम का जन्म 3 दिसंबर 1889 को हुआ था। उनका जन्म पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुआ। उनके पिता का नाम त्रैलोक्य नाथ बोस था। उनकी माता का नाम लक्ष्मीप्रिय देवी था। खुदीराम बचपन में ही बहुत अकेले हो गए थे।

जब वह बहुत छोटे थे, माता-पिता गुजर गए। उनकी बड़ी बहन अनामिका ने उनका पालन-पोषण किया। बहन को डर था कि यह बच्चा भी न चला जाए। उस दौर में एक अजीब पुराना रिवाज माना जाता था। बहन ने भाई को तीन मुट्ठी खुद (चावल) में खरीदा। चावल के दाने को स्थानीय भाषा में खुद कहते हैं।

इसी वजह से उनका नाम खुदीराम पड़ा था। बचपन से ही खुदीराम बहुत ही निडर स्वभाव के थे। उन्हें साहसिक काम करना बहुत पसंद आता था। वह अपने दोस्तों की मदद हमेशा किया करते थे। स्कूल के दिनों में ही उनमें देशभक्ति जाग गई थी।

वह देश को आजाद देखना चाहते थे। वह ब्रिटिश शासन से सख्त नफरत करते थे। वह रिवोल्यूशनरी ग्रुप्स में शामिल होने लगे थे। उन्होंने बहुत कम उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया।

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सत्याग्रह से हथियार उठाने तक का सफर

साल 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ था। अंग्रेज भारत को आपस में बांटना चाहते थे। इस घटना ने खुदीराम के दिल को तोड़ दिया। उन्होंने विदेशी सामानों के बहिष्कार में भाग लिया। वह आजादी की रैलियों में पर्चे बांटते थे।

1906 में पुलिस ने उन्हें पहली बार पकड़ा। वह पर्चे बांटकर अंग्रेजों का विरोध कर रहे थे। उन्होंने पुलिस वाले के मुंह पर घूंसा मारा। वह मौका पाकर वहां से तुरंत भाग निकले। वह अनुशीलन समिति नाम की संस्था से जुड़ गए।

यहां उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग मिली। उन्होंने बम बनाने की कला भी सीख ली थी। वह अपने सीनियर नेताओं के बहुत प्रिय बन गए थे। सत्येन बोस और अरविंद घोष उनके गुरु थे। खुदीराम हर कठिन काम के लिए तैयार रहते थे।

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मुजफ्फरपुर बम कांड का पूरा सच

उस समय मुजफ्फरपुर में एक क्रूर जज था। उसका नाम डगलस किंग्सफोर्ड हुआ करता था। वह भारतीय क्रांतिकारियों को बहुत सख्त सजा देता था। वह छोटी-छोटी बातों पर बहुत कोड़े मारता था। क्रांतिकारी उससे बहुत ज्यादा गुस्सा थे।

क्रांतिकारी संगठन ने उसे मारने का फैसला लिया। इस काम के लिए दो वीरों को चुना गया। पहले खुदीराम बोस और दूसरे प्रफुल्ल चाकी थे। दोनों दोस्त मुजफ्फरपुर शहर पहुंच गए। उन्होंने कई दिनों तक जज की रेकी की। वे उसकी हर हरकत पर नजर रखते थे।

30 अप्रैल 1908 की रात को मौका मिला। जज किंग्सफोर्ड यूरोपियन क्लब से बाहर निकल रहा था। अंधेरे में एक बग्गी क्लब के बाहर आई। दोनों दोस्तों को लगा कि जज अंदर बैठा है।

खुदीराम ने बिना देर किए बम फेंक दिया। बहुत जोर का धमाका हुआ और बग्गी जल गई। लेकिन किस्मत से जज उस बग्गी में नहीं था। उस बग्गी में दो अंग्रेज महिलाएं बैठी थीं। दुर्भाग्य से उन दोनों महिलाओं की मौत हो गई। इस घटना से पूरा अंग्रेज प्रशासन हिल गया था।

खुदीराम बोस - वीरता और मृत्यु को चुनौती देने वाले युवा के प्रतीक, 7 वर्ष की  आयु में अनाथ से लेकर 18 वर्ष की आयु में अंग्रेजों द्वारा फांसी पर ...
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गिरफ्तारी, मुकदमा और हंसती हुई फांसी

बम फेंकने के बाद दोनों दोस्त अलग हो गए। खुदीराम पूरी रात बिना रुके पैदल चलते रहे। वह लगभग 25 मील दूर निकल चुके थे। वह वैनी नाम के रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। उन्हें बहुत जोर से प्यास लगी हुई थी। वह एक दुकान पर पानी पीने के लिए रुके।

वहां दो पुलिस वालों को उन पर शक हो गया। पुलिस वालों ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की। खुदीराम ने अपनी रिवॉल्वर निकाल ली। लेकिन धक्का-मुक्की में वह पकड़े गए। दूसरी तरफ उनके साथी प्रफुल्ल चाकी ने खुद को गोली मार ली। वह अंग्रेजों के हाथ नहीं आना चाहते थे।

खुदीराम बोस: 18 साल का वह नौजवान जो हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गया "उम्र  सिर्फ 18 साल..." "लेकिन दिल में आज़ाद भारत का सपना..." 3 दिसंबर 1889 को  बंगाल के ...
खुदीराम बोस: 18 साल का वह नौजवान जो हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गया "उम्र सिर्फ 18 साल..." "लेकिन दिल में आज़ाद भारत का सपना..." 3 दिसंबर 1889 को बंगाल के ...


खुदीराम पर अदालत में मुकदमा

खुदीराम पर अदालत में मुकदमा चलाया गया। केवल दो महीने के अंदर फैसला सुना दिया गया। कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा दी। जब जज ने सजा सुनाई, खुदीराम मुस्कुरा दिए। जज ने पूछा कि क्या तुम समझे नहीं? खुदीराम बोले कि मैं मुस्कुरा रहा हूं। उन्होंने कहा कि मुझे थोड़ा समय दो। मैं जज को भी बम बनाना सिखा सकता हूं। यह सुनकर पूरा कोर्ट हैरान रह गया था।

11 अगस्त 1908 को फांसी दे दी गई। उस समय उनकी उम्र केवल 18 साल थी। उनकी शहादत ने देश को जगा दिया था। बंगाल के जुलाहों ने एक नई साड़ी बनाई। उस साड़ी के किनारे पर खुदीराम लिखा होता था।

युवा उस साड़ी को पहनकर गर्व करते थे। खुदीराम बोस आज भी हमारे दिलों में जिंदा हैं। उनकी अमर कहानी हमें हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। उनका नाम इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।

Reference Links:

भारत सरकार - भारतीय संस्कृति पोर्टल
भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (Freedom Fighter)

11 अगस्त की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 11 अगस्त का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।

आइए जानते हैं 11 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-

विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1999: यूरोप और एशिया महाद्वीप में इस सदी का अंतिम सूर्यग्रहण देखा गया।
  • 2000: फिजी के विद्रोही नेता जॉर्ज स्पेट के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने का फैसला हुआ।
  • 2001: उत्तरी आयरलैंड की विधानसभा भंग की गई और आयरिश विद्रोहियों को निशस्त्रीकरण के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया।
  • 2004: चीनी कंप्यूटर उद्योग के पितामह माने जाने वाले चेन चुनशियान का 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
  • 2004: भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के साथ वांछित अपराधियों की सूचियों की अदला-बदली की।
  • 2004: इस्लामाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी समेत आठ प्रमुख मुद्दों पर वार्ता संपन्न हुई।
  • 2004: संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने पुष्टि की कि पाकिस्तान ने ईरान को परमाणु मामलों में मदद दी थी।
  • 2006: पाकिस्तान ने अपनी तीसरी अगोस्टा 90बी श्रेणी की पनडुब्बी का जलावतरण किया।
  • 2007: मोहम्मद हामिद अंसारी भारत के 13वें उपराष्ट्रपति बने।
  • 2008: गोदावरी पावर एंड इस्पात ने छत्तीसगढ़ सरकार के साथ 1570 करोड़ रुपये का समझौता पत्र (MoU) साइन किया।
  • 2008: आर. जे. नायक को पार्श्वनाथ रिटेल में स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया।
  • 1892: वेस्टइंडीज के प्रसिद्ध क्रिकेटर आर्ची विलेस का जन्म हुआ।
  • 1924: भारतीय संगीत जगत के विद्वान और मनीषी लालमणि मिश्र का जन्म हुआ।
  • 1937: प्रसिद्ध मलयाली फिल्म निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक और लघु कथाकार जॉन अब्राहम का जन्म हुआ।
  • 1949: भारतीय रिजर्व बैंक के 22वें गवर्नर डी. सुब्बाराव का जन्म हुआ।
  • 1954: 1983 विश्वकप विजेता भारतीय टीम के प्रमुख सदस्य और प्रसिद्ध क्रिकेटर यशपाल शर्मा का जन्म हुआ।
  • 1954: भारतीय क्रिकेटर एम. वी. नरसिम्हा राव का जन्म हुआ।
  • 1961: आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ चंद्र शेखर बेल्लाना का जन्म हुआ।
  • 1974: भारतीय महिला क्रिकेटर अंजू जैन का जन्म हुआ।
  • 1908: भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस देश के लिए हंसते-हंसते फांसी पर चढ़कर शहीद हुए।
  • 1967: हिंदी के प्रसिद्ध पत्रकार, समीक्षक, साहित्यकार और आलोचक नंददुलारे वाजपेयी का निधन हुआ।
  • 2000: प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता पी. जयराज का निधन हुआ।
  • 2007: ब्रिटेन के महान संगीतज्ञ एंथनी विल्सन का निधन हुआ।
  • 2018: भारतीय मूल के प्रसिद्ध अंग्रेजी साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार विजेता वी. एस. नायपॉल का निधन हुआ।
  • 2020: प्रसिद्ध उर्दू शायर और हिंदी फिल्मों के जाने-माने गीतकार राहत इंदौरी का निधन हुआ।
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