11 सितंबर का इतिहास: स्वामी विवेकानंद दिग्विजय दिवस 1893, जानें शिकागो भाषण की अनसुनी बातें

Kaushiki | Sept 11, 2026, 08:00 IST
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11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की विश्व धर्म संसद में ऐतिहासिक भाषण दिया था। उनके शुरुआती शब्दों ने पूरे हॉल को तालियों से भर दिया था। भारत में इस खास दिन को दिग्विजय दिवस के रूप में बड़े गर्व से मनाया जाता है।

Swami Vivekananda Chicago Speech 1893: स्वामी विवेकानंद का नाम इतिहास में बहुत गर्व से लिया जाता है। उन्होंने साल 1893 में अमेरिका के शिकागो में भाषण दिया था। वह दिन 11 सितंबर का था। उस दिन विश्व धर्म संसद का आयोजन हुआ था। स्वामी जी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उनके शब्दों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। भारत में इस दिन को दिग्विजय दिवस कहते हैं।



यह कहानी केवल एक भाषण की बिल्कुल नहीं है। यह कहानी भारत की सोई हुई चेतना को जगाने की है। उस समय भारत अंग्रेजों का गुलाम था। देश में गरीबी और लाचारी का माहौल था। पश्चिमी देश भारत को सपेरों का देश मानते थे। उन्हें लगता था कि भारत के पास कोई ज्ञान नहीं है। विवेकानंद जी ने इस सोच को हमेशा के लिए बदल दिया।



शिकागो जाने की कठिन यात्रा

स्वामी विवेकानंद के लिए अमेरिका जाना आसान नहीं था। उनके पास यात्रा के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। खेतड़ी के राजा अजीत सिंह ने उनकी मदद की। राजा ने उन्हें हवाई जहाज का टिकट दिया। उन्होंने स्वामी जी को कपड़े और पैसे भी दिए। स्वामी जी मई 1893 में मुंबई से रवाना हुए। उन्होंने चीन और जापान के रास्ते अमेरिका की यात्रा की।



जुलाई 1893 में स्वामी जी शिकागो पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्हें बड़ी निराशा का सामना करना पड़ा। उन्हें पता चला कि धर्म संसद सितंबर में शुरू होगी। वहां बिना निमंत्रण के बोलने की अनुमति नहीं थी। उनके पास रहने और खाने के पैसे खत्म हो रहे थे। अमेरिका में बहुत ज्यादा ठंड पड़ रही थी। स्वामी जी के पास गरम कपड़े भी नहीं थे।



मुश्किलों से भरा शुरुआती दौर

स्वामी जी ने बोस्टन जाने का फैसला किया। बोस्टन शिकागो से थोड़ा सस्ता शहर था। ट्रेन की यात्रा में उनकी मुलाकात एक महिला से हुई। उनका नाम कैथरीन एबॉट सनबॉर्न था। उन्होंने स्वामी जी को अपने घर में शरण दी। उन्होंने हारवर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन हेनरी राइट से मिलाया। प्रोफेसर राइट स्वामी जी के ज्ञान से बहुत प्रभावित हुए।



प्रोफेसर राइट ने स्वामी जी की बहुत मदद की। उन्होंने धर्म संसद के आयोजकों को एक पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि यह व्यक्ति हमारे सभी प्रोफेसरों से ज्ञानी है। प्रोफेसर राइट ने स्वामी जी को संसद का पास दिलाया। उन्होंने शिकागो का टिकट भी खरीदकर दिया। इस तरह स्वामी जी वापस शिकागो पहुंचे। वहां उनका रजिस्ट्रेशन आसानी से हो गया।



11 सितंबर 1893 का वो ऐतिहासिक दिन

11 सितंबर 1893 का दिन आ गया। शिकागो के आर्ट इंस्टीट्यूट में धर्म संसद शुरू हुई। मंच पर दुनिया भर के धर्म गुरु बैठे थे। सभी अपनी-अपनी पोशाक में बहुत सुंदर लग रहे थे। स्वामी विवेकानंद ने भगवा वस्त्र पहने थे। उनके चेहरे पर एक अद्भुत चमक और शांति थी। वह थोड़े नर्वस भी महसूस कर रहे थे।



स्वामी जी ने सुबह बोलने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह दोपहर के बाद बोलेंगे। दोपहर के सत्र में उनका नाम पुकारा गया। स्वामी जी मंच पर खड़े हुए। उन्होंने मन ही मन अपनी देवी मां को प्रणाम किया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत की। उनके शुरुआती पांच शब्दों ने इतिहास रच दिया।



वो शब्द जिनसे गूंज उठा पूरा हॉल

स्वामी जी ने कहा, "अमेरिका के मेरे भाइयों और बहनों!" यह सुनते ही पूरे हॉल में सन्नाटा टूट गया। वहां मौजूद सात हजार लोग खड़े हो गए। पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। तालियां लगभग दो मिनट तक बजती रहीं। किसी भी अन्य वक्ता को ऐसा स्वागत नहीं मिला था। अन्य वक्ताओं ने केवल औपचारिक शब्दों का प्रयोग किया था।



विवेकानंद जी ने सभी को दिल से अपना माना। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना को सच कर दिखाया। तालियां शांत होने के बाद उन्होंने अपना भाषण जारी रखा। उन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान के बारे में बताया। उन्होंने सनातन धर्म की महानता पर बात की। उनके शब्दों में अपार सत्य और प्रेम भरा था।



हिंदू धर्म और भारत का महान संदेश

स्वामी जी ने कहा कि मुझे ऐसे धर्म पर गर्व है। इस धर्म ने दुनिया को सहिष्णुता सिखाई है। हमने सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार किया है। मुझे उस देश पर गर्व है जिसने शरणार्थियों को शरण दी। हमने इजराइल और पारसियों के लोगों को बचाया। हमने उन्हें अपने देश में पूरा सम्मान दिया।



उन्होंने गीता का एक प्रसिद्ध श्लोक सुनाया। जैसे नदियां अलग रास्तों से बहकर समुद्र में मिलती हैं। वैसे ही सभी धर्म ईश्वर तक पहुंचाते हैं। कोई भी धर्म छोटा या बड़ा नहीं होता। सभी रास्ते एक ही ईश्वर की ओर जाते हैं। यह संदेश पश्चिमी दुनिया के लिए बिल्कुल नया था। लोग उनकी बातें सुनकर हैरान रह गए थे।



कट्टरता और हिंसा पर करारा प्रहार

स्वामी जी ने धार्मिक कट्टरता पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता ने दुनिया को तबाह किया है। कट्टरता ने धरती को खून से लाल कर दिया है। अगर यह बुराई न होती तो मानव समाज बेहतर होता। अब इस तबाही का अंत होना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि यह संसद इस बुराई को खत्म करेगी।



उन्होंने एक कुएं के मेंढक की कहानी सुनाई। हर धर्म का व्यक्ति सोचता है कि उसका कुआं ही सब कुछ है। वह दूसरे धर्म के विचार को स्वीकार नहीं करता। स्वामी जी ने इस संकीर्ण सोच को बदलने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमें अपने कुएं से बाहर निकलना होगा। हमें पूरी दुनिया को अपना घर मानना होगा।



रातों-रात पूरे अमेरिका में छा गए स्वामी जी

11 सितंबर के भाषण के बाद स्वामी जी प्रसिद्ध हो गए। अमेरिका के बड़े अखबारों ने उनकी तारीफ की। 'न्यू यॉर्क हेराल्ड' ने लिखा कि वह सबसे महान व्यक्ति हैं। ऐसे देश में धर्म प्रचारक भेजना बेवकूफी है। भारत पहले से ही ज्ञान का महासागर है। अखबारों में उनकी तस्वीरें छपने लगीं।



शिकागो की सड़कों पर उनके बड़े पोस्टर लगाए गए। लोग उनके भाषण सुनने के लिए घंटों इंतजार करते थे। धर्म संसद के आयोजक उन्हें सबसे अंत में बुलवाते थे। ताकि लोग अंत तक हॉल में बैठे रहें। स्वामी जी ने दो हफ्तों में कई भाषण दिए। उन्होंने हर भाषण में भाईचारे का संदेश दिया।



भारत में दिग्विजय दिवस का बड़ा महत्व

स्वामी जी की इस सफलता से भारत का सिर ऊंचा हुआ। अंग्रेजों का यह घमंड टूट गया कि भारत पिछड़ा है। भारत में लोगों का स्वाभिमान वापस जाग उठा। भारत में 11 सितंबर को दिग्विजय दिवस कहा जाता है। दिग्विजय का अर्थ है हर दिशा में जीत हासिल करना। स्वामी जी ने बिना हथियार उठाए दुनिया को जीता था।



उन्होंने प्यार और ज्ञान से दुनिया के दिल को जीता। इसीलिए इसे दिग्विजय दिवस का नाम दिया गया। यह दिन हमें हमारी संस्कृति पर गर्व करना सिखाता है। यह दिन युवा पीढ़ी को प्रेरणा देता है। भारत हर साल इस दिन को बहुत उत्साह से मनाता है। स्कूल और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।



स्वामी विवेकानंद जी का महान जीवन परिचय

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनका जन्म कोलकाता के एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। वह बचपन से ही बहुत कुशाग्र बुद्धि के थे। उनके मन में ईश्वर को जानने की तीव्र इच्छा थी। वह हर ज्ञानी व्यक्ति से पूछते थे कि क्या आपने ईश्वर को देखा है?



उन्हें सही जवाब रामकृष्ण परमहंस जी से मिला। परमहंस जी ने कहा कि हां, मैंने ईश्वर को देखा है। मैं तुम्हें भी ईश्वर से मिला सकता हूं। इसके बाद नरेंद्रनाथ उनके शिष्य बन गए। गुरु जी के निधन के बाद वह संन्यासी बन गए। उनका नाम स्वामी विवेकानंद पड़ा। उन्होंने पूरे भारत की पैदल यात्रा की।



कन्याकुमारी का ध्यान और शिकागो का संकल्प

पूरे भारत की यात्रा के दौरान उन्होंने देश की गरीबी देखी। उन्होंने देखा कि लोग भोजन और शिक्षा के लिए तरस रहे हैं। वह कन्याकुमारी पहुंचे और समुद्र की चट्टान पर बैठ गए। उन्होंने वहां तीन दिनों तक लगातार ध्यान लगाया। उस चट्टान को आज विवेकानंद रॉक मेमोरियल कहते हैं। वहां उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य समझ आया।



उन्होंने सोचा कि भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना होगा। इसके लिए भारत के ज्ञान को दुनिया तक पहुंचाना होगा। दुनिया से मिलने वाले सम्मान से भारत की गरीबी दूर होगी। इसी संकल्प के साथ उन्होंने अमेरिका जाने का फैसला किया। उनका यह संकल्प 1893 में शिकागो में पूरा हुआ।



रामकृष्ण मिशन की स्थापना और विचार

अमेरिका से लौटने के बाद स्वामी जी का भव्य स्वागत हुआ। उन्होंने 1 मई 1897 को रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य समाज सेवा करना है। उन्होंने कहा था कि दरिद्र नारायण की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। भूखे को भोजन और अनपढ़ को शिक्षा देना ही सच्चा धर्म है।



स्वामी जी ने युवाओं को एक प्रसिद्ध संदेश दिया था। "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य न मिल जाए।" उनके यह शब्द आज भी युवाओं में नया जोश भरते हैं। वह मानते थे कि युवा ही देश का भविष्य बदल सकते हैं। युवाओं को अपने चरित्र और शरीर को मजबूत बनाना चाहिए।



स्वामी जी के भाषण की मुख्य बातें

स्वामी जी ने शिकागो में भारत के सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म सभी धर्मों को सच्चा मानता है। उन्होंने धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा का कड़ा विरोध किया।



उन्होंने पश्चिमी दुनिया को भारतीय दर्शन और योग से परिचित कराया। उन्होंने साबित किया कि भारत केवल गरीबी नहीं, ज्ञान का देश है। उनके भाषण ने भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में नई जान फूंक दी।



स्वामी जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं

आज की दुनिया में भी स्वामी जी के विचार बहुत जरूरी हैं। आज भी दुनिया धर्म और जाति के नाम पर बंट रही है। हिंसा और नफरत का माहौल चारों तरफ देखने को मिलता है। स्वामी जी का भाईचारे का संदेश आज बहुत प्रासंगिक है। अगर हम उनके विचारों पर चलें तो दुनिया में शांति आ सकती है।



स्वामी जी ने केवल 39 वर्ष की आयु में शरीर त्याग दिया था। 4 जुलाई 1902 को वह ध्यान की मुद्रा में महासमाधि में लीन हो गए। इतने कम समय में उन्होंने जो काम किया, वह अद्भुत है। उनका जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका शिकागो भाषण इतिहास का एक अनमोल रत्न है। Swami Vivekananda



क्रेडिट्स और सोर्स:



  • Ramakrishna Math and Ramakrishna Mission Official Documents
  • The Complete Works of Swami Vivekananda (Volume 1)
  • Historical Reports of the 1893 Parliament of the World's Religions, Chicago

11 अगस्त की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 11 सितंबर का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 11 सितंबर (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1893: स्वामी विवेकानंद (स्वामी विवेकानंद शिकागो स्पीच) ने शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में ऐतिहासिक भाषण दिया।
  • 1906: महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की।
  • 1919: अमेरिकी नौसेना ने होंडुरास पर सैन्य आक्रमण किया।
  • 1939: इराक और सऊदी अरब ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया।
  • 1941: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन का निर्माण शुरू हुआ।
  • 1951: फ्लोरेंस चैडविक इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने वाली पहली महिला बनीं।
  • 1961: विश्व वन्यजीव कोष (WWF) की स्थापना हुई।
  • 1965: भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने लाहौर के पास बुर्की शहर पर कब्ज़ा किया।
  • 1968: एयर फ्रांस का विमान 1611 दुर्घटनाग्रस्त होने से 95 लोगों की मौत हुई।
  • 1971: मिस्र ने अपना नया संविधान अंगीकार किया।
  • 1973: चिली के राष्ट्रपति साल्वाडोर अलांदे का तख्तापलट हुआ।
  • 1996: राष्ट्रमंडल संसदीय संघ में पहली बार महिला अध्यक्ष निर्वाचित हुईं।
  • 2001: अमेरिका में 9/11 के भीषण आतंकवादी हमले में 6 हज़ार से अधिक लोग मारे गए।
  • 2003: अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने दलाई लामा से मुलाकात की।
  • 2005: गाजा पट्टी से 38 साल पुराना सैन्य शासन समाप्त हुआ।
  • 2006: पेस-डेम जोड़ी ने यूएस ओपन और रोजर फेडरर ने लगातार तीसरा यूएस ओपन खिताब जीता।
  • 2006: न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती यूएन मानवाधिकार समिति में पुनर्निर्वाचित हुए और अटलांटिस अंतरिक्ष यान से जुड़ा।
  • 2007: येरूशलम में 2000 साल पुरानी ऐतिहासिक सुरंग की खोज हुई।
  • 2009: हाईकोर्ट ने निठारी कांड के आरोपी पंढेर को एक मामले में बरी किया और सुप्रीम कोर्ट ने कांशीराम स्मारक निर्माण पर रोक लगाई।
  • 2011: रक्षा वैज्ञानिकों (DRDO) ने ल्यूकोडर्मा की अचूक हर्बल औषधि बनाई।
  • 2011: 9/11 के बाद अमेरिकियों का दृष्टिकोण भारतीय मूल के लोगों के प्रति सकारात्मक हुआ।
  • 2012: सोमालिया में सेना के साथ मुठभेड़ में अल-शबाब के 50 आतंकी मारे गए।
  • 1895: प्रसिद्ध भूदान आंदोलन नेता और सामाजिक कार्यकर्ता विनोबा भावे का जन्म।
  • 1901: प्रसिद्ध मराठी साहित्यकार आत्माराम रावजी देशपांडे का जन्म।
  • 1911: भारत के लिए पहला टेस्ट शतक बनाने वाले क्रिकेटर लाला अमरनाथ का जन्म।
  • 1919: प्रसिद्ध हिंदी व राजस्थानी लेखक कन्हैयालाल सेठिया का जन्म।
  • 1962: भाजपा के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ प्रह्लाद जोशी का जन्म।
  • 1982: प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय अभिनेत्री श्रेया सरन का जन्म।
  • 1921: तमिल भाषा के महान कवि सुब्रह्मण्य भारती का निधन।
  • 1948: पाकिस्तान के संस्थापक और मुस्लिम लीग के नेता मुहम्मद अली जिन्ना का निधन।
  • 1964: प्रसिद्ध हिंदी प्रगतिशील कवि गजानन माधव 'मुक्तिबोध' का निधन।
  • 1968: भारतीय सेना के प्रसिद्ध सैनिक बाबा हरभजन सिंह का निधन।
  • 1973: प्रसिद्ध भारतीय संत और आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा का निधन।
  • 1987: छायावादी युग की महान हिंदी कवयित्री महादेवी वर्मा का निधन।
  • 1987: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजा नरेशचंद्र सिंह का निधन।
  • 2020: प्रसिद्ध आर्य समाजी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश का निधन।

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