महात्मा ज्योतिराव फुले सिर्फ इतिहास का नाम नहीं, वे भारत के भविष्य के मार्गदर्शक: पीएम मोदी
एक युगपुरुष का स्मरण- पीएम मोदी
आज 11 अप्रैल हम सभी के लिए बहुत विशेष दिन है। आज भारत के महान समाज सुधारकों में से एक महात्मा ज्योतिराव फुले की जन्म-जयंती है। इस वर्ष यह अवसर और भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके 200वें जयंती वर्ष का शुभारंभ भी हो रहा है।
महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म-चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। उन्हें केवल उनकी संस्थाओं या आंदोलनों के लिए ही याद नहीं किया जाता, बल्कि उन्होंने लोगों के मन में जो आशा और आत्मविश्वास जगाया, उसका व्यापक प्रभाव भी हम आज तक महसूस करते हैं। उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं।
महात्मा फुले का जन्म 1827 में महाराष्ट्र में एक बहुत साधारण परिवार में हुआ। लेकिन शुरुआती चुनौतियां कभी उनकी शिक्षा, साहस और समाज के प्रति समर्पण को नहीं रोक पाईं। उन्होंने हमेशा यह माना कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, इंसान को मेहनत करनी चाहिए, ज्ञान हासिल करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
सवालों से बढ़ता है ज्ञान
बचपन से ही महात्मा फुले बहुत जिज्ञासु थे और अपनी उम्र के अन्य बच्चों की अपेक्षा कहीं अधिक पुस्तकें पढ़ते थे। वो कहते भी थे, हम जितने ज्यादा सवाल करते हैं, उनसे उतना ही अधिक ज्ञान निकलता है। साफ है कि बचपन से मिली जिज्ञासा उनकी पूरी यात्रा में बनी रही।
जीवन का मिशन बनी शिक्षा
महात्मा फुले के जीवन में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मिशन बनी। उनका मानना था कि ज्ञान किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि ऐसी शक्ति है, जिसे सभी से साझा किया जाना चाहिए। जब समाज के बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब उन्होंने लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले।
वे कहते थे, बच्चों में जो सुधार मां के माध्यम से आता है, वह बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए अगर स्कूल खोले जाएं, तो सबसे पहले लड़कियों के लिए खोले जाएं। उन्होंने शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया।
शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण हमें आज भी प्रेरित करता है। पिछले एक दशक में भारत ने युवाओं के लिए रिसर्च और इनोवेशन को प्राथमिकता दी है। ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रयास किया गया है, जिसमें युवा सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और इनोवेशन के लिए प्रेरित हों। ज्ञान, कौशल और अवसरों में निवेश करके भारत युवाओं को प्रगति का आधार-स्तम्भ बना रहा है।
कृषि व ग्रामीण विकास की गहन जानकारी
अपने ज्ञान और बौद्धिकता से महात्मा फुले ने कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की गहरी जानकारी हासिल की। वे कहते थे, किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय समाज को कमजोर करता है।
उन्होंने देखा कि सामाजिक असमानताएं खेतों और गांवों में लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं। इसलिए उन्होंने गरीबों, वंचितों, कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए भी हरसंभव प्रयास किए।
सच्ची आजादी पर कही थी यह बात
महात्मा फुले ने कहा था कि जोपर्यंत समाजातील सर्वांना समान अधिकार मिळत नाहीत, तोपर्यंत खरे स्वातंत्र्य मिळत नाही, यानी जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आजादी नहीं मिल सकती। इसी विचार को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने कई संस्थाओं की स्थापना की।
उनका सत्यशोधक समाज, आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण समाज सुधार आंदोलनों में से एक था। यह सामाजिक सुधार, सामुदायिक सेवा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा था। यह महिलाओं, युवाओं और गांवों में रहने वाले लोगों की पुरजोर आवाज बना। यह आंदोलन उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि समाज की मजबूती के लिए न्याय, हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और सामूहिक प्रगति जरूरी है।
सावित्रीबाई फुले के बिना स्मरण अधूरा
महात्मा फुले का स्मरण, सावित्रीबाई फुले के सम्मानजनक उल्लेख के बिना अधूरा है। वे स्वयं महान समाज सुधारकों में से एक थीं। भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल सावित्रीबाई ने लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। महात्मा फुले के निधन के बाद भी उन्होंने इसे जारी रखा।
2022 की पुणे यात्रा
मुझे 2022 में पुणे की अपनी यात्रा याद है, जब मैंने शहर में महात्मा फुले की भव्य प्रतिमा पर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। उनके 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत पर हम उनके विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज की शक्ति को जनहित और नैतिक मूल्यों से जोड़कर भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं।
यही कारण है कि आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं। महात्मा ज्योतिराव फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास का नाम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं।
महात्मा फुले के 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत पर हम उनके विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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