स्कूली बस्ता: सिर्फ किताबों का नहीं, सपनों और संभावनाओं का पिटारा

The Sootr | Jul 05, 2025, 23:41 IST
Share
vichar manthan
vichar manthan

शिक्षा का अधिकार अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि 6 से 14 साल के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले। इसका मतलब है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रह सकता।

प्रवीण कक्कड़, मध्य प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी

नया स्कूल सत्र शुरू हो चुका है, और एक बार फिर स्कूल के गलियारों में बच्चों की हंसी गूंज रही है। यह केवल एक नया अकादमिक वर्ष नहीं, बल्कि लाखों उम्मीदों और सपनों का आगाज है। शिक्षा वह सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिससे हम दुनिया को बदल सकते हैं। यह हर बच्चे का अधिकार है, और हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम इस

अधिकार को हकीकत में बदलें

शिक्षा एक बच्चे के भविष्य की नींव होती है। यह उसे ज्ञान, कौशल और सोचने-समझने की शक्ति देती है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के स्कूलों में कुल 24.8 करोड़ छात्र नामांकित हैं। यह जानकर खुशी होती है कि शिक्षा तक पहुंच में काफी वृद्धि हुई है। 6-14 आयु वर्ग के बच्चों के लिए समग्र स्कूल नामांकन दर लगभग 20 वर्षों से 95% से अधिक बनी हुई है, और 2024 में यह 98.1% थी। हालांकि, अभी भी एक लंबी दूरी तय करनी है।

4.74 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर

UDISE+ 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, 6-17 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 4.74 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं। यह संख्या बताती है कि बड़ी संख्या में बच्चे या तो कभी स्कूल में नामांकित नहीं हुए, या बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर 1.9% है, जबकि उच्च प्राथमिक में यह 5.2% और माध्यमिक स्तर पर 14.1% तक पहुँच जाती है। यह आँकड़ा हम सभी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।

हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा

शिक्षा का अधिकार अधिनियम एक महत्वपूर्ण कदम है जो यह सुनिश्चित करता है कि 6 से 14 साल के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले। इसका मतलब है कि किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित रखना कानूनी रूप से गलत है। सरकारी स्कूलों में तो शिक्षा, किताबें, ड्रेस और मध्याह्न भोजन मुफ्त मिलता ही है, साथ ही निजी स्कूलों में भी 25% सीटें आरटीई (RTE) के तहत आरक्षित हैं। यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि हर बच्चा, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से हो, स्कूल की दहलीज तक पहुंचे और अपनी पढ़ाई पूरी करें।

हमें अपने समाज के उन बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। अक्सर हम अपने आस-पास काम करने वाले लोगों, जैसे चौकीदार, माली, कामवाली बाई या रसोइया के बच्चों की शिक्षा के बारे में नहीं सोचते। यह हमारा नैतिक और सामाजिक दायित्व है कि हम उनके बच्चों को स्कूल पहुंचाने में मदद करें।

मुफ्त प्रवेश के बारे में जानकारी दें

आप उनसे बात करें, उन्हें आरटीई के तहत निजी स्कूलों में मिलने वाले मुफ्त प्रवेश के बारे में जानकारी दें, और यदि संभव न हो तो सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने में सहायता करें। यदि उन्हें किताबें, कॉपियां, स्कूल ड्रेस या स्टेशनरी खरीदने में आर्थिक मदद की जरूरत है, तो इसमें भी उनका सहयोग करें।

आपका यह छोटा सा प्रयास देश के भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रखेगा। हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाना सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा लक्ष्य होना चाहिए। जब हर बच्चा स्कूल जाएगा, तभी एक शिक्षित और सशक्त समाज का निर्माण होगा।

बच्चों के लिए जरूरी

बच्चों को स्कूल भेजना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि उन्हें वहां बेहतर माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। आज भी कई स्कूलों में बेहतर व्यवस्थाओं की कमी है। यह चिंताजनक है कि प्रदेश के 21,077 स्कूल महज एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, और शिक्षकों के 87,630 पद खाली हैं। शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है।

हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे स्कूल सिर्फ इमारतें न हों, बल्कि ज्ञान और नवाचार के केंद्र बनें। शिक्षकों की पर्याप्त संख्या हो, उन्हें उचित प्रशिक्षण मिले और उन्हें ऐसे संसाधन उपलब्ध कराए जाएं जिससे वे बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ा सकें। स्कूलों में शौचालय, पीने का पानी और सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाओं का होना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब स्कूलों की स्थिति बेहतर होगी, तभी बच्चे न केवल स्कूल आने के लिए प्रेरित होंगे, बल्कि वहां रहकर कुछ नया सीख भी पाएंगे।

शिक्षा : सबकी साझा जिम्मेदारी

  • समाज क्या करें: अपने आस-पड़ोस में स्कूल न जाने वाले बच्चों की पहचान करें और उन्हें दाखिला लेने में मदद करें।
  • अभिभावक क्या करें: बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें और उनकी पढ़ाई में रुचि जगाएं। बच्चों को समझाएं कि शिक्षा के माध्यम से ही सशक्तिकरण की राह तक पहुंचा जा सकता है।
  • बच्चे क्या करें: मन लगाकर पढ़ाई करें, स्कूल के नियमों का पालन करें और शिक्षकों का सम्मान करें।
  • शिक्षक क्या करें: बच्चों को प्यार और लगन से पढ़ाएं, उनकी समस्याओं को समझें और उन्हें प्रेरित करें।
  • प्रशासन क्या करे: स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं और शिक्षक उपलब्ध कराएं, शिक्षा की गुणवत्ता पर निगरानी रखें और बाल श्रम पर कड़ा कदम लेकर हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाए।

शिक्षा सिर्फ एक डिग्री नहीं

शिक्षा सिर्फ एक डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सके। रचनात्मक सोच, समस्या-समाधान की क्षमता, सहानुभूति और नैतिकता जैसे गुणों का विकास ही सच्ची शिक्षा है। हमारा स्कूली बस्ता सिर्फ भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रतीक है जो हमें याद दिलाता है कि शिक्षा एक निरंतर यात्रा है, जो न सिर्फ व्यक्ति बल्कि पूरे समाज को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाती है। आइए, हम सब मिलकर बच्चों के इस "सपनों के पिटारे" को और अधिक समृद्ध बनाएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा शिक्षा के प्रकाश से वंचित न रहे।

thesootr links

दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃

प्रवीण कक्कड़ | विचार मंथन | विचार मंथन द सूत्र | विचार मंथन प्रवीण कक्कड़

Tags:
  • विचार मंथन
  • विचार मंथन प्रवीण कक्कड़
  • विचार मंथन द सूत्र
  • स्कूल
  • प्रवीण कक्कड़
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा