Chhattisgarh में मानवता शर्मशार | अंतिम संस्कार को तरस रहे शव

स्पताल प्रबंधन ने एसडीएम के नाम एक नहीं दो दो लेटर लिखे की शवों का अंतिम संस्कार करने की परमिशन दी जाए पर बात आज भी वहीं के वहीं रुकी हुई है, क्योंकि न ही इन शवों के लिए इन तीन सालों में किसी परिचित ने अस्पताल से संपर्क किया और न ही सरकार ने कोशिश की।

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ATUL DWIVEDI
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कोविड में जान गंवाई, अब तक अंतिम संस्कार नहीं

एक मशहूर शायर की कुछ पंक्तियां हैं....इक रात वो गया था जहां बात रोक के....अब तक रुका हुआ हूं वहीं रात रोक के।

ये शेर छत्तीसगढ़ ( Chhattisgarh ) की राजधानी रायपुर ( Raipur ) से आई इस खबर पर एक दम सटीक बैठता है...दरअसल राजधानी रायपुर के सबसे बड़े अस्पतालों में शामिल भीमराव अंबेडकर अस्पताल ( Bhimrao ambedkar hospital ) के प्रशासन की लापरवाही के चलते तीन शव कंकाल बन चुके हैं...और इन शवों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि हम आपको ये तस्वीरें र्ब्ल करके भी नहीं दिखा सकते। दरअसल कोविड के समय जून 2021 में तीन लोगों की मौत हो गई और इनके शव अस्पताल की मर्चुरी में रखवा दिए गए..लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही और अमानवीयता के चलते ये शव पिछले तीन सालों से अंतिम संस्कार की राह देख रहे हैं...और अब तो राह देखते देखते शव कंकाल बन गए..लेकिन न ही सरकार के कानों पर जू रेंगी और न ही अस्पताल प्रबंधन के कानों पर.....इतना ही नहीं अस्पताल प्रबंधन ने एसडीएम के नाम एक नहीं दो दो लेटर लिखे की शवों का अंतिम संस्कार करने की परमिशन दी जाए..पर बात आज भी वहीं के वहीं रुकी हुई है...क्योंकि न ही इन शवों के लिए इन तीन सालों में किसी परिचित ने अस्पताल से संपर्क किया और न ही सरकारी तंत्र कछुआ चाल छोड़ पाया। 

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