MP High Court | EWS | OBC | Reservation में नया झोल, दो हफ्ते में जवाब देगी केंद्र और राज्य सरकार
आप अगर इन दिनों अपनी उंगलियों पर मध्यप्रदेश में चल रहे आरक्षण विवादों को गिनने की कोशिश करेंगे....तो शायद नहीं गिन पाएंगे....वो इसलिए क्योंकि मध्यप्रदेश में एक आरक्षण का पेंच सुलझता नहीं कि दूसरा आ जाता है...कभी ओबीसी आरक्षण, कभी EWS आरक्षण तो कभी हॉरिजोंटल और वर्गीकरण आरक्षण का मामला...लेकिन अब EWS आरक्षण में एक नई गड़बड़ी सामने आई है..और इसी को लेकर हाईकोर्ट में केस दायर कर दिया गया है...
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लिए इनकम के जो नियम तय किए गए हैं...उनको हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है...जबलपुर पनागर विधानसभा के पूर्व विधायक नरेंद्र त्रिपाठी ने ये याचिका दायर की है...और बताया है कि 8 लाख रूपये से कम आय तय करने के लिए अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि जहां सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के माता-पिता की जमीन जायदाद से होने वाली कमाई और सैलरी के साथ साथ अगर उसके घर में 18 साल से कम उम्र के बच्चे भी हैं और वो कुछ कमाते हैं तो उसे भी जोड़ा जाता है। वही ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए सिर्फ माता-पिता और अभ्यर्थी की आय को जोड़ा जाता है। लेकिन ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी के परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ साथ एग्रीकल्चर और दूसरे संसाधनों से हो रही आय को इसमें नहीं जोड़ा जाता। जबकि सामान्य वर्ग का कैंडिडेट अगर ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करता है तो अभ्यर्थी की इनकम के साथ साथ उसकी पत्नी या पति और उसके माता-पिता की संपत्ति से होने वाली और सैलरी का आकलन भी किया जाता है। इसके साथ ही अगर उस अभ्यर्थी के घर में 18 साल से कम उम्र के भी बच्चे हैं और वह कोई जॉब कर रहे हैं तो उनकी आय को भी शामिल किया जाता है...और अगर ये इनकम इसके बाद 8 लाख से कम निकलती है...तब जाकर उसका ईडब्ल्यूएस का सर्टिफिकेट बनता है। दूसरी तरफ बात अगर ओबीसी आरक्षण की करें तो क्रिमी लेयर में सिर्फ माता पिता और अभ्यर्थी की सैलरी जोड़ी जाती है... जो की सरासर गलत है....इसी को लेकर ये याचिका लगाई गई है कि अलग अलग नियम क्यों हैं....इस मामले की सुनवाई के दौरान पक्ष रखा गया कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मामला सिर्फ सामान्य वर्ग से जुड़ा हुआ है जिसे कोर्ट ने गलत मानते हुए कहा कि ओबीसी में क्रीमी लेयर में ना होना भी ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में ही आता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिविजनल बेंच ने केंद्र सरकार के साथ साथ मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में जवाब देने के लिए 6 हफ्ते का वक्त दिया है....मामले की अगली सुनवाई अब 8 अप्रैल 2025 को होगी। अब जरा खुद सोचिए...जितने आरक्षण के वर्ग..उतने नियम..और उतने अलग अलग नियम...ऐसे में सवाल खड़े न हो ऐसा कैसे हो सकता हैं...जबलपुर से विशेष संवाददाता नील तिवारी की रिपोर्ट।
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