बोल हरि बोल: मैडम का गजब नवाचार, खाकी पर दाग... धुआंधार विधायक जी और वो सदन के किस्से!

Harish Divekar | Dec 07, 2025, 13:59 IST
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मध्यप्रदेश में एक आईएएस महिला अफसर के सख्त कदमों से अफसरशाही में हलचल है। कामचोर इंजीनियरों को सजा दी गई है। एक महिला नेता का कार्यकर्ताओं से माला लेना चर्चा में है। पढ़ें आज के बोल हरि बोल में सियासत और अफसरशाही के ये ताजा किस्से...

बोल हरि बोल: मध्यप्रदेश की सियासत और अफसरशाही में एक से बढ़कर एक ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ किस्सों ने हलचल मचा रखी है। एक मैडम अपने नवाचार से कामचोरों को धूल चटा रही हैं। पुलिस महकमे में बड़ी गाज गिरने की आहट है।



इधर, सदन और सियासत में रिश्तों, तंजों और ताकत के नई रंगत भरे किस्से तैर रहे हैं। हर कोई गपशप का हिस्सा बना हुआ है। आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।



मैडम की ये सख्ती भी खूब है!

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एक आईएएस मैडम के नवाचार और सख्ती की इन दिनों खूब चर्चा है। मैडम ने कामचोर इंजीनियरों को ऐसी सजा दी है, जो अपने आप में मिसाल है। वाक्या ऐसा है कि एक बड़े जिले में नगर निगम में इंजीनियरों की लापरवाही के ​मामले सामने आ रहे थे।



बताया जाता है कि ऐसे इंजीनियरों को सबक सिखाने के लिए मैडम ने उनकी ड्यूटी एसआईआर में लगा दी। यहां तक तो ठीक था। इंजीनियरों को बीएलओ का सहायक बनाया गया है। आपको बता दें कि पहले मैडम एक जिले में कलेक्टर थीं। फिर उन्हें नगर निगम में भेजा गया है। वे अपनी अलहदा वर्किंग स्टाइल के लिए पहचानी जाती हैं।



यहीं तो पिछड़ जाती है कांग्रेस...

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देवास से आई एक वीडियो क्लिप इन दिनों राजनीतिक गलियारों में मसाला घोल रही है। हुआ यूं कि एक बड़ी महिला नेत्री शहर में पहुंचीं तो कार्यकर्ता फूल-माला लेकर पहुंच गए। सबको उम्मीद थी कि वे कार से उतरेंगी और कार्यकर्ताओं से मिलेंगी, लेकिन अफसोस… कार रुकी जरूर, पर नेत्री उतरी नहीं।



उलटा, कार के शीशे चढ़ा लिए। पूरा नजारा देखकर कार्यकर्ता मायूस हो गए। जो लोग सुबह से फोटो खिंचवाने की आस लगाए थे, उनकी हसरत पल में धूल हो गई। हालांकि बाद में सफाई आई कि मैडम किसी ऑनलाइन मीटिंग में व्यस्त थीं, इसलिए बाहर नहीं निकलीं। अब इसका क्या फायदा था, कार्यकर्ता तो अपमान का घूंट पी ही चुके थे।



खाकी में होगा बड़ा बदलाव

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खाकी के गलियारों में फिलवक्त हलचल तेज है। पुलिस की लगातार हो रही किरकिरी ने आखिरकार डॉक्टर साहब को बड़ा ऑपरेशन करने पर मजबूर कर दिया है।



सूत्र बताते हैं कि कुछ जिलों में कप्तान अपनी ही पिच पर मनमानी बल्लेबाजी कर रहे हैं। उनकी फील्डिंग ढीली है, कप्तानी कमजोर है और वे रन बचाने के बजाय विकेट गिराने में लगे हैं। अब उनके हटने की गिनती शुरू हो चुकी है।



जिन कुर्सियों पर महीनों से आराम का मौसम चला था, वहां अब सख्ती का झोंका चलने वाला है। सरकार के माथे पर जो दाग पिछले दिनों पुलिस की हरकतों ने छोड़े हैं, उसे धोने के लिए बड़े स्तर पर फेरबदल की तैयारी है। कौन जाएगा, कौन बचेगा...इस पर कयासों का बाजार गर्म है।



सिंधिया जी तो हमारे हैं!

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राजनीति में विचाराधाराएं भले अलग हों, लेकिन जब बात निजी संबंधों की होती है तो सब एक हो जाते हैं। ये वाक्या भी जोरदार है। पिछले दिनों स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के कक्ष में जब सूबे के पूर्व सीएम कमलनाथ पहुंचे तो उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का हाल चाल पूछा।



जवाब में तोमर ने कहा, अच्छे हैं, स्वस्थ हैं। इसके इतर यहीं बैठे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी ने कहा, सिंधिया जी अब हमारे हैं। विजयवर्गीय की कमलनाथ से प्रगाढ़ता भी खूब हुई। अब राजनीति में ऐसी तस्वीरें कम ही देखने को मिलती हैं, सो अब इस तस्वीर पर तमाम तरह की बातें भी हो रही हैं।



धुआंधार विधायक जी...

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मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा, ये तो किसी को नहीं पता, लेकिन मंत्री बनने की चाह में नेता शक्ति प्रदर्शन करने से चूक नहीं रहे हैं। अब देखिए, न एक विधायक जी ने डॉक्टर साहब का जोरदार अभिनंदन किया। अपने भाषण में उन्होंने डॉक्टर साहब को विक्रमादित्य तक बता दिया।



अब प्रति उत्तर में डॉक्टर साहब को तो कुछ कहना था। इसलिए उन्होंने भी विधायक जी को क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली तक की संज्ञा दे दी। डॉक्टर साहब का मंतव्य था कि विधायक जी धुआंधार बल्लेबाजी कर रहे हैं।



नेताजी की क्लास लग गई

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सूबे के पूर्व सरकार की वाकपुटता का तो मानो कोई मुकाबला ही नहीं है। सदन में उन्होंने खूब शेरों- शायरी पढ़ीं। बोले- हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम...। उनका यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, लोगों ने उनकी क्लास लगा दी।



किसी ने कहा, एमपी में एमएसपी पर मक्का की खरीदी नहीं हो रही महोदय। शेरों- शायरी से कुछ नहीं होगा आदरणीय, प्रदेश के किसानों की मक्का की खरीदी करवा दीजिए। एमपी में धान का एमएसपी कब बढ़ेगा, 3 साल हो गए चुनाव हुए? आपका रिपोर्ट कार्ड बताइए?



सदन में अपनों से घिरी सरकार

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सदन में विपक्ष का विरोध तो आम है, लेकिन इस बार मध्यप्रदेश विधानसभा में जो हुआ, उसके खूब चर्चे हैं। दरअसल, विधानसभा में इस बार सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। कई विधायकों ने ऐसे मुद्दे उठाए, जिनकी सटीक काट सरकार के पास नहीं थी।



नतीजा, पहली बार सदन में सरकार की किरकिरी हो गई। यहां तक कि एक मामले में तो विधायक के साथ दो मंत्री भी कूद गए। इसके जवाब में गोल मोल जवाब दिया गया, लेकिन बात नहीं बनी। सूत्रों के अनुसार, इस स्थिति के बाद संबंधित विधायकों से चर्चा कर उनसे समन्वय की कोशिश की गई।



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