बोल हरि बोल: दो आईएएस में ठनी, कुछ अफसरों की कलेक्टरी पर ब्रेक और इधर मैडम की हुई खूब किरकिरी

Harish Divekar | Oct 18, 2026, 12:14 IST
Share
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर का लोकप्रिय कॉलम बोल हरि बोल।
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर का लोकप्रिय कॉलम बोल हरि बोल।

BHOPAL. मध्यप्रदेश में जो हो जाए, सो कम ही मानिए। बात राजनीति की हो या प्रशासन की, यहां किस्से ऐसे-ऐसे होते हैं कि सुनकर आप भी हैरान रह जाएं। अब देखिए ना, मलाई के चक्कर में दो आईएएस अफसर आपस में भिड़ गए। उधर, सरकार ने कुछ अफसरों की कलेक्टरी पर ऐसा ब्रेक लगाया कि दोबारा जिले की कमान मिलना मुश्किल हो गया है।

वहीं, एक मैडम ने अपनी ही किरकिरी करा ली। ऐसे और भी कई मजेदार किस्से हैं, जिनकी इन दिनों खूब चर्चा है।

खैर, देश-प्रदेश में खबरें तो और भी हैं, पर आप तो सीधे नीचे उतर आइए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम बोल हरि बोल (Bol Hari Bol) के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।

इन आईएएस की कलेक्टरी पर लग गया ब्रेक...

दुनिया में रहना है तो काम कर प्यारे...! जी हां, यह बात सूबे के 2013 और 2014 बैच के कुछ आईएएस अफसरों पर बिल्कुल फिट बैठती है। अपने आचार-व्यवहार और कामकाज के चलते इन अफसरों की कलेक्टरी पर ऐसा ब्रेक लगा है कि अब दोबारा जिले की कमान मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि इनमें से ज्यादातर अफसर एक बार कलेक्टर बन भी चुके हैं, लेकिन अपनी पहली पारी में कुछ ऐसे काम कर गए कि सरकार अब उन्हें दोबारा जिले की जिम्मेदारी देने से परहेज कर रही है। यानी कलेक्टर बनने का मौका तो मिला, लेकिन अपनी ही कार्यशैली से अगली पारी की राह मुश्किल कर ली।

अब अफसरशाही में चर्चा है कि कलेक्टर की कुर्सी तक पहुंचने के लिए वरिष्ठता काफी नहीं, कामकाज और व्यवहार का हिसाब भी मायने रखता है। आखिर कुर्सी मिलना अलग बात है और उस पर अपनी छाप छोड़ना अलग!

महाराज आए और कुर्सियां खाली रह गईं!

अशोकनगर में महाराज के एक कार्यक्रम की चर्चा जोरों पर है। उनके विरोधी खाली कुर्सियों की बातें कर रहे हैं। दरअसल, यह मौका जनप्रतिनिधियों की बैठक का था। सबको उम्मीद थी कि महाराज की मौजूदगी में हॉल नेताओं से भरा रहेगा, लेकिन तस्वीर कुछ और ही निकली। कुर्सियां अपनी जगह सजी रहीं और उन पर बैठने वालों की कमी नजर आई।

महाराज मंच पर पहुंचे तो आयोजकों की परेशानी भी बढ़ गई। खाली कुर्सियां कहीं मीडिया में न आ जाएं, लिहाजा उन्हें समेटने की कवायद शुरू हो गई, लेकिन बात छिपती भी तो कैसे? कार्यक्रम की तस्वीरों ने सवाल खड़े कर दिए।

अब राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास हैं। क्या आयोजक भीड़ का सही आकलन नहीं कर पाए या जनप्रतिनिधियों ने बैठक से दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझा? वजह जो भी रही हो, महाराज के कार्यक्रम में खाली कुर्सियों ने जरूर सबका ध्यान खींच लिया है।

वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल
बोल हरि बोल: कलेक्टर बन गए तहसीलदार, 1200 करोड़ के टेंडर पर खींचतान और वो नाराज फूफा जी...!
27 Sept 2026 ,
By Harish Divekar
मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और सियासत में इन दिनों कई चर्चाएं तेज हैं। जमीन नामांतरण, भोपाल मास्टर प्लान और 1200 करोड़ के टेंडर को लेकर अंदरखाने हलचल है। जानिए वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के साथ बोल हरि बोल के जरिए प्रशासनिक गलियारों की रोचक बातें।
मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और सियासत में इन दिनों कई चर्चाएं तेज हैं। जमीन नामांतरण, भोपाल मास्टर प्लान और 1200 करोड़ के टेंडर को लेकर अंदरखाने हलचल है। जानिए वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के साथ बोल हरि बोल के जरिए प्रशासनिक गलियारों की रोचक बातें।

कांग्रेस में पद की तैयारी, तीन विभागों की छुट्टी

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस फिर अपने आप को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे विभाग खत्म किए जा रहे हैं, जिनका कोई काम नहीं है और उनके कारण ऊर्जा लगती है। अब खबर है कि पार्टी मध्यप्रदेश में तीन विभागों को बंद करने की तैयारी में है। इनमें फॉरेन अफेयर्स, इंडियन ओवरसीज और हिंदी विभाग शामिल हैं। प्रदेश कांग्रेस ने इनके लिए प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मंजूरी के लिए एआईसीसी को भेजा जाएगा। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि मध्यप्रदेश में इन तीनों विभागों की जरूरत नहीं है।

उधर, बाकी विभागों और प्रकोष्ठों में नियुक्तियों की तैयारी भी अंतिम दौर में है। 64 इकाइयों में दिवाली तक पदाधिकारी नियुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बार पद बांटने में अलग कसौटी अपनाई जा रही है। तीन सदस्यीय कमेटी दावेदारों से पहले ही पूछ रही है कि वे कितना समय दे सकते हैं और विधानसभा चुनाव लड़ने का इरादा तो नहीं रखते।

यानी इस बार कांग्रेस में पद पाने के लिए नाम और पहचान के साथ वक्त देने की तैयारी भी दिखानी होगी। अब देखना है कि दिवाली तक किसकी किस्मत खुलती है और किन विभागों का नामोनिशान मिटता है।

बोल हरि बोल
बोल हरि बोल: कलेक्टर मैडम के दिल्ली दौरे, दूसरी मैडम का फ्रस्ट्रेशन और मामा की नई रिहर्सल... क्या है मैसेज?
26 Jul 2026 ,
By Harish Divekar
मध्यप्रदेश की अफसरशाही में नए फेरबदल के बाद चर्चाएं तेज हैं। कलेक्टर मैडम के दिल्ली कनेक्शन, अफसरों की नाराजगी और मामा की वायरल तस्वीर ने प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए ये सब कुछ...
मध्यप्रदेश की अफसरशाही में नए फेरबदल के बाद चर्चाएं तेज हैं। कलेक्टर मैडम के दिल्ली कनेक्शन, अफसरों की नाराजगी और मामा की वायरल तस्वीर ने प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए ये सब कुछ...

काम किसी का, वाहवाही मैडम की...

कहते हैं, काम करने से ज्यादा जरूरी है काम को दिखाना। प्रेजेंटेशन दमदार हो तो वाहवाही मिलने में देर नहीं लगती। अब एक मैडम का किस्सा ही देख लीजिए। विभाग की कमान संभाले अभी महीना भी नहीं बीता था कि उनकी योजना विरोध की भेंट चढ़ गई। शुरुआत में मामला कुछ खास जमा नहीं, लेकिन मैडम ने जल्द ही ऐसा दांव चला कि चर्चा का रुख बदल गया।

उन्होंने योजना के एक हितग्राही की सफलता की कहानी बड़े अंग्रेजी अखबार में अपने नाम से प्रकाशित कराई और उसे आईएएस अफसरों के व्हाट्सएप ग्रुप में भी साझा कर दिया। बस फिर क्या था! बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों ने मैडम की खूब तारीफ की, लेकिन मौजूदा अफसरों के बीच कहानी का दूसरा पहलू चर्चा में रहा। उनका कहना था कि जिस काम का श्रेय मैडम ले रही हैं, उसकी बुनियाद तो पहले ही एक वरिष्ठ अधिकारी रख चुके थे। अब सवाल यही है कि मैडम की तारीफ उनके काम की हुई या फिर प्रेजेंटेशन की बाजीगरी की, हमने तो अपना काम कर दिया, बाकी आप अपने हिसाब से देख लीजिए।

टेंडर की मलाई पर दो आईएएस में ठनी

एक ही बैच के दो आईएएस अफसरों के बीच टेंडर को लेकर ऐसी ठनी है कि मामला अब बड़े साहब तक पहुंच गया है। विवाद की जड़ टेंडर जारी करने के तरीके को लेकर बताई जा रही है। एक अफसर की जिम्मेदारी टेंडर जारी करने की है, जबकि महिला आईएएस चाहती हैं कि विभाग से जो टेंडर तैयार होकर आए, उसे बिना किसी बदलाव के यानी कॉमा-बिंदु में भी बदलाव किए बिना जारी किया जाए। इसके लिए उन्होंने बाकायदा सर्कुलर भी निकाल दिया।

बस, इसी को लेकर रार है। सवाल नियमों का है या अधिकारों का, इस पर दोनों के अपने-अपने तर्क हैं, लेकिन अफसरशाही में चर्चा कुछ और ही है। कानाफूसी है कि पूरा मामला टेंडर की मलाई से जुड़ा है और इसी वजह से दोनों के बीच खींचतान है। बात जब बड़े साहब तक पहुंची तो मामला और दिलचस्प हो गया। साहब पहले इसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, इसलिए यहां की कार्यप्रणाली से अच्छी तरह वाकिफ हैं। हालांकि अब उनके हस्तक्षेप के बाद कुछ टेंडर जारी हुए हैं।

bol hari bol 15 april 2026 journalist harish divekar bhopal
बोल हरि बोल : मंत्रीजी का बैंक वाला विकास, खाकी में क्या पक रहा है और मैडम पर किसका वरदहस्त?
12 Apr 2026 ,
By Harish Divekar
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कलेक्टर के तबादलों में चर्चित नाम, मंत्रीजी के विकास के लिए बैंक से दबाव और पीएचक्यू की ठंडी जंग काफी चर्चा में है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कलेक्टर के तबादलों में चर्चित नाम, मंत्रीजी के विकास के लिए बैंक से दबाव और पीएचक्यू की ठंडी जंग काफी चर्चा में है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...

साहब की कुर्सी और बेटे का कनेक्शन...

एक एडिशनल कमिश्नर साहब के बेटे को लेकर खूब चर्चा है। साहबजादा विवादित जमीनों को क्लियर कराने का ठेका ले रहा है। चर्चा तो यहां तक है कि इस काम में पिता के पद और रसूख का भी हवाला दिया जाता है।

अब सवाल यह है कि जमीनों के मामलों में साहबजादे की इतनी दिलचस्पी आखिर क्यों है? क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है? सीनियर अधिकारियों को भी इसकी खबर है, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है।
Tags:
  • बोल हरि बोल
  • Bol Hari Bol
  • वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर
  • पत्रकार हरीश दिवेकर
  • मध्यप्रदेश
  • आईएएस अफसर
इंदौर में चुनाव आयोग और नगर निगम की वोटर लिस्ट में झोल, अकेले दो सीटों पर 30 हजार नामों का हेरफेर!

By Aman Vaishnav

इंदौर में चुनाव आयोग और नगर निगम की वोटर लिस्ट में झोल, अकेले दो सीटों पर 30 हजार नामों का हेरफेर!
खुले कुएं बने रहे मौत के सौदागर, आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही; बजट की कमी बनी बाधा

By Ashish Bhardwaj

खुले कुएं बने रहे मौत के सौदागर, आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही; बजट की कमी बनी बाधा
राजस्थान में आज 6 जिलों में बारिश का अलर्ट, 19 अक्टूबर से साफ होगा मौसम; जयपुर समेत कई शहरो में बूंदाबांदी

By Jyoti Mahender Bhardwaj

राजस्थान में आज 6 जिलों में बारिश का अलर्ट, 19 अक्टूबर से साफ होगा मौसम; जयपुर समेत कई शहरो में बूंदाबांदी
कोटा में ज्वेलर्स की दुकान से 70 लाख की चोरी, 3 मिनट में तिजोरी उठाकर ले गए बदमाश

By Jyoti Mahender Bhardwaj

कोटा में ज्वेलर्स की दुकान से 70 लाख की चोरी, 3 मिनट में तिजोरी उठाकर ले गए बदमाश
सिंहासन छत्तीसी : थाईलैंड के आश्रम में बाबा करा रहे इन्वेस्टमेंट, जिनको परोसा शराब और कबाब वही लगा रहे बट्टा

By Arun Tiwari

सिंहासन छत्तीसी : थाईलैंड के आश्रम में बाबा करा रहे इन्वेस्टमेंट, जिनको परोसा शराब और कबाब वही लगा रहे बट्टा
केंद्र ने कोर्ट में कहा- दवाइयों पर ट्रेड मार्जिन MRP का 30% तक सीमित, राजस्थान में अस्पताल मरीजों को लूट रहे

By Jageshwar prasad

केंद्र ने कोर्ट में कहा- दवाइयों पर ट्रेड मार्जिन MRP का 30% तक सीमित, राजस्थान में अस्पताल मरीजों को लूट रहे
जयपुर मुहाना मंडी में सचिव पर गंभीर आरोप, पत्नी और बेटे के नाम वाले भूखंडों का आवंटन भी निरस्त

By Jyoti Mahender Bhardwaj

जयपुर मुहाना मंडी में सचिव पर गंभीर आरोप, पत्नी और बेटे के नाम वाले भूखंडों का आवंटन भी निरस्त