बोल हरि बोल : मंत्रीजी का बैंक वाला विकास, खाकी में क्या पक रहा है और मैडम पर किसका वरदहस्त?
Harish Divekar | Apr 12, 2026, 13:01 IST
bol hari bol 15 april 2026 journalist harish divekar bhopal
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कलेक्टर के तबादलों में चर्चित नाम, मंत्रीजी के विकास के लिए बैंक से दबाव और पीएचक्यू की ठंडी जंग काफी चर्चा में है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...
BHOPAL. मौसम का पारा चाहे ऊपर-नीचे हो रहा हो, पर मध्यप्रदेश में सिस्टम और सियासत का तापमान लगातार चढ़ा हुआ है। प्रशासनिक गलियारों में हाल ही में आई आईएएस तबादला सूची ने हलचल मचा दी है। जिन अफसरों को कलेक्टर की कुर्सी नसीब हुई है, उनके चेहरे खिल उठे हैं, जबकि जिनका कार्यकाल पलक झपकते ही खत्म हो गया, वे खामोश और मायूसी में डूबे नजर आ रहे हैं।
इसी उठापटक के बीच एक कलेक्टर मैडम का तबादला न होना सबसे बड़ा टॉकिंग पॉइंट बना हुआ है। उनका नाम चर्चा में आया, अटकलें लगीं, लेकिन आखिरी लिस्ट में मैडम सुरक्षित रह गईं। अब हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर यह मैनेजमेंट कैसे हुआ?
उधर, बीजेपी के भीतर भी सियासी सरगर्मी कम नहीं है। हाल ही में बने कोर ग्रुप के नामों को लेकर अंदरखाने खूब कानाफूसी चल रही है। कौन शामिल, कौन बाहर और किसका कद कितना बढ़ा, इसी का हिसाब-किताब जारी है।
कुल मिलाकर, सिस्टम और सियासत दोनों में हलचल अपने चरम पर है। देश-प्रदेश में खबरें तो और भी हैं, पर सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
विवादों की आंच में घिरीं एक कलेक्टर मैडम इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में खूब चर्चा बटोर रही हैं। हाल ही में आई आईएएस तबादला सूची में उनका नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन आखिरी वक्त में लिस्ट से उनका नाम गायब हो गया। बस, यहीं से शुरू हुई कानाफूसी।
मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि मैडम ने ऊपर तक ऐसी ‘झांकी’ सजाई है कि वरिष्ठ अफसर भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाए। कहा जा रहा है कि फाइलों से ज्यादा ‘प्रेजेंटेशन’ ने काम कर दिया। यही वजह रही कि नाम चर्चा में आने के बावजूद आदेश जारी होते-होते मामला ठंडा पड़ गया।
अब दूसरे जिलों के कलेक्टर भी हैरान हैं। बंद कमरों में चर्चा चल रही है कि आखिर ऐसा क्या हुनर है, जिससे मुश्किल वक्त में भी कुर्सी सुरक्षित रह जाए। कुछ इसे नेटवर्किंग का कमाल बता रहे हैं तो कुछ इसे सिस्टम की समझ कह रहे हैं। खैर, सच्चाई जो भी हो, मैडम की यह झांकी इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
खाकी के गलियारों में इन दिनों एक ठंडी जंग की फुसफुसाहट तेज है। जी हां, पीएचक्यू और सरकार के जिम्मेदार चेहरों के बीच अबोला की स्थिति चल रही है। पूरे पीएचक्यू की तरफ से एक एडीजी साहब ने कमान संभाल रखी है। वहीं, गृह विभाग का हाल भी कुछ ठीक नहीं है। हर चार दिन बाद नए एसीएस प्रभार में आ जाते हैं। यहां भी पूरे गृह की कमान मैडम ने संभाल रखी है। यानी, सब कुछ सेकंड पर्सन पर ही डिपेंड है।
यही वजह है कि पीएचक्यू के अधिकांश प्रस्ताव या तो टर्न डाउन हो जाते हैं या फिर बदल दिए जाते हैं। अब एक छोटा सा मामला ही देखिए। सागर आईजी रिटायर हुए तो पीएचक्यू ने जबलपुर आईजी को प्रभार देने का प्रस्ताव भेजा। सरकार ने प्रस्ताव को खारिज कर नर्मदापुरम आईजी को सागर का प्रभार दे दिया।
इसी तरह संभागों में कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए पीएचक्यू ने एडीजी स्तर के अफसरों को प्रभार देने का प्रस्ताव दिया तो सरकार ने इसे बदलकर स्पेशल डीजी को कमान सौंप दी। ऐसे कई मामले हैं, जो पीएचक्यू और सरकार के बीच चल रहे कोल्ड वॉर की कहानी बताते हैं।
विकास पसंद एक मंत्रीजी के यहां से जोरदार खबर निकली है। खबर है कि मंत्रीजी को अपने क्षेत्र में विकास के कामों के लिए सरकार से पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है। इसीलिए तो बैंक पर अड़ीबाजी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि मंत्रीजी के ओएसडी ने बैंक मैनेजर को साफ-साफ कह दिया कि उनके विभाग का करोड़ों रुपया उनकी बैंक में जमा है।
ऐसे में बैंक अपना सीएसआर फंड मंत्रीजी के क्षेत्र में लगाए, नहीं तो हम खाता दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर देंगे। बैंक मैनेजर ने गाइडलाइन बताने का प्रयास किया तो ओएसडी ने मंत्रीजी के नाम से धमका दिया कि आप हां या ना में जवाब दीजिए... बाकी हम देख लेंगे कि बैंक में खाता रखना है या नहीं।
अब बैंकिंग और राजनीतिक गलियारों में यही सवाल घूम रहा है कि यह महज दबाव की रणनीति है या फिर विकास के लिए नया ‘जुगाड़ मॉडल’। फिलहाल, मामला फुसफुसाहट से आगे बढ़कर सुर्खियों की ओर बढ़ता दिख रहा है।
सुबह-सुबह एक नेताजी का फोन आया। नमस्कार के बाद बोले, देखा हमारी पार्टी का मैनेजमेंट...। भाजपा के कोर ग्रुप में मामा, भाईसाहब और महाराज की एंट्री हो ही गई। दरअसल, उनका इशारा शिवराज, वीडी शर्मा और नरोत्तम मिश्रा की तरफ था। मैंने सवाल किया कि इसमें नया क्या है? तो नेताजी बोले, मोहन सरकार में ये नए समीकरण हैं। सबको साधने की जुगत है। बाद में उन्होंने विस्तार से सब समीकरण भी समझाए और फोन रख दिया। सही भी है...।
बीजेपी आलाकमान प्रदेश स्तर पर किसी तरह के पावर सेंटर नहीं रखना चाहती है। यही वजह है कि नवगठित कोर कमेटी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह के साथ सांसद वीडी शर्मा को लिया गया है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और अरविंद सिंह भदौरिया को भी कोर ग्रुप में जगह दी गई है।
यूथ कांग्रेस में इन दिनों ‘दूरी’ ही सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है। दिलचस्प बात ये है कि कुछ समय पहले प्रभारी ने खुद नसीहत दी थी कि दूरी कम रखिए, काम आसान होगा। लेकिन जब नई सूची आई तो तस्वीर उलट नजर आई। कई पदाधिकारियों को घर से 500 से 800 किलोमीटर दूर जिलों का जिम्मा थमा दिया गया।
दरअसल, मध्यप्रदेश यूथ कांग्रेस ने पुरानी सूची रद्द कर जोन प्रभारियों की नई नियुक्तियां की हैं। इसके पीछे इरादा भले संगठन को मजबूत करने का है, लेकिन अंदरखाने असंतोष की लहर दौड़ पड़ी है। पदाधिकारियों का कहना है कि इतनी दूरी के चलते स्थानीय मुद्दों को समझना और लगातार सक्रिय रहना मुश्किल हो जाएगा।
मामला हाल ही में राष्ट्रीय स्तर तक भी पहुंचा है, जहां यह सवाल उठा कि जब फील्ड में पकड़ ही कमजोर होगी तो संगठन की धार कैसे तेज होगी? दूरी के साथ-साथ महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी आवाजें उठने लगी हैं। कई कार्यकर्ता इसे असंतुलित बता रहे हैं। अब संगठन के भीतर चर्चा यही है कि यह नई रणनीति जमीन पर असर दिखाएगी या फिर दूरी ही सबसे बड़ी बाधा बन जाएगी।
दुबई का दर्द. मेडम का जमीन प्रेम और पत्रकार जी का डायरेक्ट कनेक्शन
बछड़े की मौत के लिए प्रायश्चित, तबादलों की बेचैनी और पीएचक्यू में उलझन
बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों से फुसफुसाहटें… नाम नहीं, सिर्फ इशारे
खाकी वाले साहब का गजब का नजराना, कांग्रेस में वो इस्तीफा और कौन बनेगा भोपाल का सरताज?
इसी उठापटक के बीच एक कलेक्टर मैडम का तबादला न होना सबसे बड़ा टॉकिंग पॉइंट बना हुआ है। उनका नाम चर्चा में आया, अटकलें लगीं, लेकिन आखिरी लिस्ट में मैडम सुरक्षित रह गईं। अब हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर यह मैनेजमेंट कैसे हुआ?
उधर, बीजेपी के भीतर भी सियासी सरगर्मी कम नहीं है। हाल ही में बने कोर ग्रुप के नामों को लेकर अंदरखाने खूब कानाफूसी चल रही है। कौन शामिल, कौन बाहर और किसका कद कितना बढ़ा, इसी का हिसाब-किताब जारी है।
कुल मिलाकर, सिस्टम और सियासत दोनों में हलचल अपने चरम पर है। देश-प्रदेश में खबरें तो और भी हैं, पर सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
कलेक्टर मैडम पर कौन मेहरबान?
मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि मैडम ने ऊपर तक ऐसी ‘झांकी’ सजाई है कि वरिष्ठ अफसर भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाए। कहा जा रहा है कि फाइलों से ज्यादा ‘प्रेजेंटेशन’ ने काम कर दिया। यही वजह रही कि नाम चर्चा में आने के बावजूद आदेश जारी होते-होते मामला ठंडा पड़ गया।
अब दूसरे जिलों के कलेक्टर भी हैरान हैं। बंद कमरों में चर्चा चल रही है कि आखिर ऐसा क्या हुनर है, जिससे मुश्किल वक्त में भी कुर्सी सुरक्षित रह जाए। कुछ इसे नेटवर्किंग का कमाल बता रहे हैं तो कुछ इसे सिस्टम की समझ कह रहे हैं। खैर, सच्चाई जो भी हो, मैडम की यह झांकी इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
पीएचक्यू और गृह में कोल्ड वॉर!
यही वजह है कि पीएचक्यू के अधिकांश प्रस्ताव या तो टर्न डाउन हो जाते हैं या फिर बदल दिए जाते हैं। अब एक छोटा सा मामला ही देखिए। सागर आईजी रिटायर हुए तो पीएचक्यू ने जबलपुर आईजी को प्रभार देने का प्रस्ताव भेजा। सरकार ने प्रस्ताव को खारिज कर नर्मदापुरम आईजी को सागर का प्रभार दे दिया।
इसी तरह संभागों में कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए पीएचक्यू ने एडीजी स्तर के अफसरों को प्रभार देने का प्रस्ताव दिया तो सरकार ने इसे बदलकर स्पेशल डीजी को कमान सौंप दी। ऐसे कई मामले हैं, जो पीएचक्यू और सरकार के बीच चल रहे कोल्ड वॉर की कहानी बताते हैं।
विकास के लिए फंड दो, वरना...
ऐसे में बैंक अपना सीएसआर फंड मंत्रीजी के क्षेत्र में लगाए, नहीं तो हम खाता दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर देंगे। बैंक मैनेजर ने गाइडलाइन बताने का प्रयास किया तो ओएसडी ने मंत्रीजी के नाम से धमका दिया कि आप हां या ना में जवाब दीजिए... बाकी हम देख लेंगे कि बैंक में खाता रखना है या नहीं।
अब बैंकिंग और राजनीतिक गलियारों में यही सवाल घूम रहा है कि यह महज दबाव की रणनीति है या फिर विकास के लिए नया ‘जुगाड़ मॉडल’। फिलहाल, मामला फुसफुसाहट से आगे बढ़कर सुर्खियों की ओर बढ़ता दिख रहा है।
सबको साधने की जुगत...
बीजेपी आलाकमान प्रदेश स्तर पर किसी तरह के पावर सेंटर नहीं रखना चाहती है। यही वजह है कि नवगठित कोर कमेटी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह के साथ सांसद वीडी शर्मा को लिया गया है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और अरविंद सिंह भदौरिया को भी कोर ग्रुप में जगह दी गई है।
...और बह गई उलटी गंगा
दरअसल, मध्यप्रदेश यूथ कांग्रेस ने पुरानी सूची रद्द कर जोन प्रभारियों की नई नियुक्तियां की हैं। इसके पीछे इरादा भले संगठन को मजबूत करने का है, लेकिन अंदरखाने असंतोष की लहर दौड़ पड़ी है। पदाधिकारियों का कहना है कि इतनी दूरी के चलते स्थानीय मुद्दों को समझना और लगातार सक्रिय रहना मुश्किल हो जाएगा।
मामला हाल ही में राष्ट्रीय स्तर तक भी पहुंचा है, जहां यह सवाल उठा कि जब फील्ड में पकड़ ही कमजोर होगी तो संगठन की धार कैसे तेज होगी? दूरी के साथ-साथ महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी आवाजें उठने लगी हैं। कई कार्यकर्ता इसे असंतुलित बता रहे हैं। अब संगठन के भीतर चर्चा यही है कि यह नई रणनीति जमीन पर असर दिखाएगी या फिर दूरी ही सबसे बड़ी बाधा बन जाएगी।
द सूत्र पर पढ़िए बोल हरि बोल के अन्य कॉलम...
बछड़े की मौत के लिए प्रायश्चित, तबादलों की बेचैनी और पीएचक्यू में उलझन
बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों से फुसफुसाहटें… नाम नहीं, सिर्फ इशारे
खाकी वाले साहब का गजब का नजराना, कांग्रेस में वो इस्तीफा और कौन बनेगा भोपाल का सरताज?
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava