नीतीश-बीजेपी के गठबंधन की पटकथा लिख रहे 7 नेता, इनमें जेडीयू के 4 और बीजेपी के 3 नेता शामिल, जानें कैसे लिखी गई पूरी कहानी

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Jitendra Shrivastava
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नीतीश-बीजेपी के गठबंधन की पटकथा लिख रहे 7 नेता, इनमें जेडीयू के 4 और बीजेपी के 3 नेता शामिल, जानें कैसे लिखी गई पूरी कहानी

NEW DELHI. नीतीश कुमार को बीजेपी के साथ लाने और गठबंधन की पटकथा लिखने के लिए जेडीयू और बीजेपी आलाकमान की ओर से 7 नेताओं को मोर्चे पर लगाया है। इनमें 4 जेडीयू के और 3 नेता बीजेपी के हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5वीं बार पलटी मारने के लिए तैयार बैठे हैं।

मुलाकात से ज्यादा फोन से बातें हुईं

विभाग बंटवारे की डील फाइनल होते ही नीतीश कुमार अपना इस्तीफा राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर को सौंप देंगे। इसके बाद बीजेपी के साथ मिलकर नई सरकार बनाने की कवायद होगी। गठबंधन की पटकथा को अमलीजामा पहनाने के लिए इन सातों नेताओं ने काफी एहितात भी बरती। डील के लिए मुलाकात से ज्यादा फोन कॉल का इस्तेमाल किया।

कौन हैं ये 7 नेता, जानते हैं इनके बारे में...

1. नित्यानंद राय

बीजेपी की ओर से इस पूरी पटकथा के अभियान को नित्यानंद लीड कर रहे हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को अमित शाह का भरोसेमंद माना जाता है। गुरुवार को जब नीतीश कुमार के बीजेपी में आने की खबर मीडिया में आई तो नित्यानंद सहयोगी दलों को मनाने में जुट गए। देर रात राय को पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के आवास पर भी देखा गया। नित्यानंद राय बिहार बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और वर्तमान में उजियारपुर से सांसद हैं। साल 2000 में राय पहली बार हाजीपुर सीट से विधायक बने। 2014 में राय ने उजियारपुर सीट से उम्मीदवार बन बड़े मार्जिन से जीत हासिल की। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार की नई सरकार में राय को डिप्टी सीएम का पद मिल सकता है।

2. सुशील मोदी

पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी भी नीतीश कुमार को बीजेपी में लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। क्योंकि मोदी नीतीश के काफी करीबी माने जाते हैं। नीतीश कुमार को बीजेपी में लाने के लिए जो नैरेटिव तैयार किया जा रहा है, उसके पीछे सुशील मोदी ही हैं। नीतीश कुमार चाह रहे हैं कि सुशील मोदी को डिप्टी सीएम बनाया जाए। हालांकि, बीजेपी हाईकमान से इस पर ग्रीन सिग्नल नहीं दिया जा रहा है। सुशील मोदी इमरजेंसी के दौरान जेल भी जा चुके हैं।

3. संजय कुमार झा

संजय कुमार झा अभी जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और नीतीश सरकार में मंत्री हैं। जेडीयू की तरफ से गठबंधन को लेकर सबसे धुंआधार बैटिंग संजय कुमार झा ही कर रहे हैं। नीतीश कुमार के बाद जेडीयू में संजय झा ही एकमात्र नेता हैं, जिनके पास संगठन और सरकार दोनों जगह पद हैं। 2017 में भी नीतीश कुमार को बीजेपी के साथ लाने में झा ने अहम भूमिका निभाई थी। यह खुलासा 2022 में जेडीयू सांसद ललन सिंह ने किया था। इस बार भी मुख्यमंत्री आवास पर झा को ही पहले बुलाया गया। संजय झा इसी महीने के शुरुआत में दिल्ली गए थे, जहां उन्होंने नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ आने की स्क्रिप्ट पर काम किया।

4. हरिवंश

हरिवंश को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भी पटकथा लिखने और उसे अमलीजामा पहनाने में मुख्य भूमिका निभाई है। नीतीश जब बीजेपी छोड़कर आरजेडी के साथ गए, तो हरिवंश के भी पद छोड़ने की बात कही गई। हालांकि, नीतीश ने उन्हें पद से नहीं हटाया। नीतीश कुमार के साथ आने के लिए बीजेपी हाईकमान को हरिवंश ने ही तैयार किया। 2017 में भी हरिवंश के कहने पर ही नीतीश आरजेडी का साथ छोड़ बीजेपी से मिल गए थे। 2018 में हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति बने, तब से वे इस पद पर हैं।

5. विनोद तावड़े

विनोद तावड़े बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार प्रभारी हैं। जब नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ आने की बात हुई, तो डील फाइनल करने के लिए तावड़े ने ही बड़े नेताओं के साथ मीटिंग की। तावड़े ने ही यह सुनिश्चित कराया कि बड़े नेता नीतीश कुमार के खिलाफ कुछ न बोलें। 7 जनवरी 2024 को इसको लेकर पटना में बीजेपी के बड़े नेताओं की एक मीटिंग भी हुई थी। इस मीटिंग में भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई थी। तावड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं और 2022 में उन्हें बिहार का प्रभारी महासचिव बनाया गया था।

6. केसी त्यागी

केसी त्यागी की भूमिका मीडिया मैनेजमेंट और दूत की है। जेडीयू प्रवक्ता और नीतीश कुमार के सलाहकार केसी त्यागी भी इस अभियान में मुख्य रूप से शामिल हैं। त्यागी नीतीश के संदेश को बीजेपी तक और बीजेपी के संदेश को नीतीश तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। नीतीश कुमार के बीजेपी में जाने का पहला संकेत भी त्यागी ने ही दिया था। 30 दिसंबर 2023 को उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि राजनीति में कोई स्थाई दुश्मन नहीं होता है। हापुड़ से लोकसभा के सांसद रहे केसी त्यागी को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। त्यागी के पुत्र अमरिश त्यागी वर्तमान में बीजेपी में हैं।

7. विजय चौधरी

जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार के इस अभियान को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी विजय चौधरी पर ही है। पहले जेडीयू अध्यक्ष पद से ललन सिंह को हटाना था, जिसके लिए चौधरी को ही आगे किया गया। सूत्रों के मुताबिक विजय चौधरी ने ललन सिंह से बात कर यह सुनिश्चित किया कि अध्यक्ष पद का ट्रांसफर आसानी से हो जाए। 22 जनवरी को जब नीतीश कुमार राज्यपाल से मिलने गए, तो उनके साथ विजय चौधरी भी थे। चौधरी वित्त और संसदीय विभाग के मंत्री हैं और उन्हें नीतीश कुमार के किचन कैबिनेट का सदस्य मान जाता है। 2010 में उन्हें बिहार जेडीयू का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया था। चौधरी जल संशाधन, गृह, शिक्षा, वित्त जैसे बड़े विभागों के मंत्री रह चुके हैं।

बीजेपी और नीतीश, दोनों के लिए क्यों जरूरी है मिलना?

1. बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। 2019 में नीतीश कुमार के साथ बीजेपी ने 39 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार पार्टी की हालात नाजुक है। बिहार को लेकर जितने भी ओपिनियन पोल अब तक आए हैं, सभी में कांटे की लड़ाई दिखाई गई है। यही वजह है कि बीजेपी हाईकमान नीतीश को अपने साथ रखने की कोशिशों में जुटी है।

2. माहौल बनाने में नीतीश माहिर हैं, जबकि नीतीश कुमार के पास बड़ा जनाधार नहीं है। नीतीश के प्रयास की वजह से ही बीजेपी के खिलाफ इंडिया का गठबंधन बना। ऐसे में बीजेपी 2024 के लिए कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।

3. नीतीश कुमार के लिए भी बीजेपी का साथ जरूरी है। नीतीश कुमार की पार्टी के कई बड़े नेता और उनके करीबी ईडी, आईटी और सीबीआई की रडार पर हैं। इनमें एमएलसी राधाचरण सेठ, विजय चौधरी के साले अजय सिंह उर्फ कारू और ललन सिंह के करीबी गब्बू सिंह का नाम शामिल हैं।

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