प्राइवेट पार्ट की चोरी की अफवाह से अफ्रीका में अफरातफरी, 80 से ज्यादा मर्डर
ऐसे समझें पूरा मामला...
- जननांग चोरी की अफवाह, अफ्रीका में 80 से ज्यादा मौतें।
- छूने भर से जननांग गायब होने का दावा, सच क्या है।
- टिकटॉक वीडियो से भड़की भीड़, गई कई जानें।
- डॉक्टर पहुंचे मदद करने, भीड़ ने ले ली जान।
- कोरो सिंड्रोम या साजिश, आखिर सच क्या निकला।
तंजानिया के एक शहर में कार मैकेनिक बोनिफेस मगाला अपने दोस्त के साथ रेस्टोरेंट में खाना खा रहे थे। अचानक भीड़ ने उन्हें घसीटकर बाहर निकाला। आरोप था कि उन्होंने किसी के प्राइवेट पार्ट्स चुरा लिए हैं।
मारपीट में उनके दोस्त की मौके पर ही मौत हो गई। मगाला को दो दिन बाद होश आया। यह कोई इकलौता मामला नहीं है। कई अफ्रीकी देशों में इसी तरह के आरोप में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।
कहां से शुरू हुई यह अफवाह
अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 10 महीनों में 6 अफ्रीकी देशों में इस अफवाह के चलते 80 से ज्यादा लोगों की हत्या हुई है। यह जानकारी बीबीसी ग्लोबल डिसइन्फर्मेशन की रिपोर्ट में सामने आई है।
इन घटनाओं का एक जैसा पैटर्न है। भीड़ किसी अजनबी को घेर लेती है और आरोप लगाती है कि उसने छूकर या हल्के से थपथपाकर किसी के जननांग सिकोड़ दिए या गायब कर दिए।
इसकी शुरुआत कांगो (Africa) के त्शोपो प्रांत से हुई। यहां कुछ लोगों ने दावा किया कि किसी अजनबी के छूने से उनके प्राइवेट पार्ट्स सिकुड़ गए। कुछ वीडियो में लोग चर्च में यह आपबीती सुना रहे थे। टिकटॉक और फेसबुक के जरिए ये वीडियो तेजी से फैले, जिससे लोग अजनबियों से बात करने में डरने लगे।
डॉक्टरों की टीम बनी शक का शिकार
अक्टूबर 2025 में त्शोपो में एक मेडिकल टीम वैक्सीन लगाने पहुंची थी। लोग पहले से डरे हुए थे कि बाहरी लोग कोई ऐसी बीमारी फैला रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भीड़ ने डॉ जॉन तंगकेया सहित कम से कम 4 स्वास्थ्यकर्मियों की हत्या कर दी।
डॉ तंगकेया की पत्नी के मुताबिक उस दिन उनका जन्मदिन था। उन्होंने भीड़ को समझाने की कोशिश की कि सर्वे का अफवाहों से कोई लेना-देना नहीं, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। अफ्रीका इंफोडेमिक रिस्पांस एलायंस के मुताबिक मई 2026 तक कांगो में ऐसी अफवाहों से करीब 17 लोगों की जान जा चुकी थी।
धीरे-धीरे 7 देशों में फैली अफवाह
कांगो के बाद यह अफवाह बुरुंडी, जांबिया, तंजानिया, मोजांबिक, अंगोला, मलावी और केन्या तक पहुंच गई। जांबिया में एक महिला को इसी आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया।
तंजानिया में टिकटॉक पर हिंसा के कई वीडियो वायरल हुए। सबसे ज्यादा मामले मोजांबिक से सामने आए, जहां बीते डेढ़ महीने में 55 लोगों की जान गई। इनमें कुछ पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। केन्या में जुलाई में 5 लोगों की और मलावी में 8 लोगों की मौत की खबर है।
क्या सच में ऐसी कोई बीमारी है
मेडिकल साइंस के मुताबिक इसका जवाब साफ है, ऐसा कुछ संभव ही नहीं है। सिर्फ छूने से जननांगों पर कोई असर नहीं पड़ सकता। तंजानिया के मोंबा जिले के कमिश्नर एलियास डेनियल के मुताबिक कुछ मामलों में लोगों ने जानबूझकर दहशत फैलाने की कोशिश की। मोजांबिक के राष्ट्रपति डैनियल चापो ने भी साफ कहा है कि इन दावों का कोई मेडिकल सबूत नहीं मिला है।
मनोविज्ञान की भाषा में इसे कोरो सिंड्रोम कहा जाता है। यह एक कल्चर-बाउंड मानसिक बीमारी है, जिसमें किसी खास समुदाय के लोगों को लगने लगता है कि उनके जननांग सिकुड़ रहे हैं।
एक्सपर्ट्स इसे मास साइकैट्रिक इलनेस यानी सामूहिक मानसिक बीमारी की श्रेणी में रखते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मास हिस्टीरिया होता है। भारत में भी नवंबर 2024 में बरेली के एक स्कूल में बच्चों में अचानक इसी तरह का सामूहिक डर देखा गया था।
अफवाह फैलने की 3 बड़ी वजहें
पहली वजह है अंधविश्वास। अफ्रीका में जादू-टोने पर यकीन करने की परंपरा पुरानी है। 1990 के दशक में घाना में भी ऐसे ही आरोप में भीड़ ने 7 लोगों को मार डाला था। 2014 में पश्चिम अफ्रीका में इसी तरह की अफवाहों से करीब 300 मौतें और 3 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
दूसरी वजह सोशल मीडिया है। फ्रांसीसी मानवविज्ञानी जूलियन बोनहोम के मुताबिक लोग वीडियो में पीड़ितों को अपनी आपबीती बताते देखते हैं और आसानी से भरोसा कर लेते हैं। कुछ कंटेंट क्रिएटर्स सिर्फ व्यूज बढ़ाने के लिए भी ऐसे वीडियो शेयर करते रहे।
तीसरी वजह ठगी है। बुर्किना फासो के सोशल एक्टिविस्ट यामेओगो बैजियो के मुताबिक कई गिरोह लोगों को डराकर नपुंसकता की झूठी बीमारी बताते हैं और फिर दवा या ताबीज बेचकर पैसे ऐंठते हैं।
जियोपॉलिटिक्स से भी जुड़ा एक पहलू
2024 में सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में एक अफवाह फैली थी कि फ्रांस अफ्रीकी पुरुषों के जननांग चुराकर यूरोप की घटती जन्मदर से निपटने की साजिश रच रहा है। बाद में सामने आया कि रूस समर्थित एक वेबसाइट ने यह खबर फैलाई थी, ताकि अफ्रीकी देशों में फ्रांस की छवि खराब हो सके।
क्या यह सिर्फ अफ्रीका तक सीमित है
नहीं, दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी इसका पुराना इतिहास रहा है। 1967 में सिंगापुर में सूअर का मांस खाने से जननांग सिकुड़ने की अफवाह फैली थी। 90 के दशक में चीन में भी हजारों लोगों ने ऐसा ही दावा किया था।
भारत में 1980 के दशक में पश्चिम बंगाल और असम में भी इसी तरह की अफवाहें फैली थीं। हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक अफ्रीका के मौजूदा मामले अलग हैं, क्योंकि यहां सिर्फ डर नहीं बल्कि दूसरों पर आरोप लगाकर हत्याएं की जा रही हैं।
एक्सपर्ट कोट्स
- जूलियन बोनहोम, मानवविज्ञानी, फ्रांस: उनके मुताबिक इन इलाकों में अजनबियों से डर के चलते उन्हें आसानी से दोषी ठहरा दिया जाता है, और शहरीकरण व पहचान से जुड़ी चिंताएं भी लोगों को ऐसी अफवाहों पर जल्दी भरोसा करा देती हैं।
- डैनियल चापो, राष्ट्रपति, मोजांबिक: उन्होंने साफ कहा है कि जननांग चोरी के दावे झूठे हैं और सरकार को इसका कोई मेडिकल सबूत नहीं मिला।
- यामेओगो बैजियो, सोशल एक्टिविस्ट, बुर्किना फासो: उनके मुताबिक कई गिरोह लोगों को डराकर झूठी बीमारी का डर दिखाते हैं और फिर दवा या ताबीज बेचकर पैसा कमाते हैं।
FAQ
- जननांग चोरी की अफवाह में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच 6 अफ्रीकी देशों में जननांग चोरी की अफवाह के चलते 80 से ज्यादा लोगों की हत्या हो चुकी है। सबसे ज्यादा मौतें मोजांबिक में दर्ज हुई हैं। - क्या छूने से सच में जननांग गायब हो सकते हैं?
नहीं, यह मेडिकली संभव नहीं है। विशेषज्ञ इसे कोरो सिंड्रोम नाम की एक मानसिक बीमारी बताते हैं, जो सामूहिक भय की तरह फैलती है। - जननांग चोरी की यह अफवाह इतनी तेजी से क्यों फैली?
अंधविश्वास, टिकटॉक-फेसबुक जैसे सोशल मीडिया वीडियो और ठगों की साजिश, इन तीनों वजहों ने मिलकर जननांग चोरी की अफवाह को कई देशों तक पहुंचा दिया।
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