टैक्स छूट का खेल: पार्टियों को मिला सैकड़ों करोड़ का चंदा! फिर भी चुनाव से गायब

The Sootr | Sept 05, 2026, 20:11 IST
Share
कागजी पार्टियों को मिला सैकड़ों करोड़ का चंदा
Photograph: (thesootr)

NEW DELHI. एक पड़ताल में सामने आया कि भारत की कई रजिस्टर्ड, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों को सैकड़ों करोड़ का चंदा मिलता है। फिर भी ये पार्टियां चुनाव से लगभग गायब रहती है। यहां तक की दफ्तर भी बंद मिलते हैं...

ऐसे समझें पूरा मामला...

  • सैकड़ों करोड़ का चंदा, चुनाव में सिर्फ एक उम्मीदवार।
  • कागजी पार्टियों के जरिए टैक्स चोरी का बड़ा खेल।
  • एक ही इलाके में चार पार्टियों के दफ्तर मिले बंद।
  • इनकम टैक्स को जांच में मिले 5591 करोड़ के फर्जी डोनेशन।
  • BJP के अलावा सभी पार्टियों से ज्यादा कमाई, फिर भी चुनाव नदारद।
गुजरात के आनंद शहर में एक फ्लैट का दरवाजा बंद है। न कोई बोर्ड, न कोई पोस्टर। यही सत्यवादी रक्षक पार्टी का रजिस्टर्ड दफ्तर है। हैरानी की बात यह है कि इस पार्टी को साल 2023-24 में 330 करोड़ रुपए का चंदा मिला था।

पार्टी ने 2024 लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक उम्मीदवार उतारा। रिकॉर्ड के मुताबिक पार्टी ने चुनाव प्रचार पर सिर्फ 8.48 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि जनकल्याण के नाम पर 316 करोड़ रुपए खर्च दिखाए गए।

पार्टी अध्यक्ष स्वाति बेन खुद उसी फ्लैट में रहती हैं जहां दफ्तर है। पैसे के हिसाब पर पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि रकम चैरिटी में खर्च हुई, लेकिन कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

देश में हजारों पार्टियां, मान्यता सिर्फ मुट्ठीभर को

भारत में कुल 2,800 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें से सिर्फ 73 को चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय पार्टी माना है। बाकी सभी रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां यानी RUPP कहलाती हैं।

यह पूरी पड़ताल तब शुरू हुई जब तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए थे। यह पार्टी भी एक RUPP ही है। BBC ने इसके बाद 2024 आम चुनाव से पहले सबसे ज्यादा राजनीतिक चंदा पाने वाली छह ऐसी पार्टियों की पड़ताल की।

चुनाव लड़े बिना करोड़ों की कमाई

इन छह पार्टियों की कुल आय 2023-24 में बीजेपी को छोड़कर बाकी सभी राष्ट्रीय पार्टियों की आय से ज्यादा निकली। लेकिन चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि इन छह पार्टियों ने 2024 लोकसभा चुनाव में कुल मिलाकर सिर्फ 15 उम्मीदवार उतारे।

वहीं, बीजेपी के अलावा बाकी पांच राष्ट्रीय पार्टियों ने 893 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। इनमें सबसे ज्यादा चंदा आम जनमत पार्टी को मिला, फिर भी उसने सिर्फ एक उम्मीदवार उतारा।

आम जनमत पार्टी की शुरुआत साल 2020 में पटना में हुई थी। शुरुआती दो साल तक पार्टी को 20 हजार रुपए से ज्यादा का कोई चंदा नहीं मिला। इसके बाद 2022-23 में अचानक 216 करोड़ रुपए और फिर 2023-24 में 620 करोड़ रुपए का चंदा मिला।

पार्टी की संस्थापक अध्यक्ष अनामिका पासवान अब बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि उन्होंने 2022 में ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पार्टी का बेस पटना से अहमदाबाद शिफ्ट हुआ, लेकिन वहां भी दफ्तर बंद मिला।

गरीब कल्याण पार्टी को भी 138 करोड़ रुपए का चंदा मिला और उसने सिर्फ तीन उम्मीदवार उतारे। इसका दफ्तर भी अहमदाबाद के नरोदा इलाके में आम जनमत पार्टी के दफ्तर के पास ही है। दिलचस्प बात यह है कि छह में से चार पार्टियों के दफ्तर एक ही इलाके में हैं, बाकी दो भी गुजरात में ही स्थित हैं।

टैक्स छूट के खेल में फंसा पूरा सिस्टम

विशेषज्ञों के मुताबिक इस पूरे खेल की जड़ भारत के टैक्स कानूनों में छिपी है। राजनीतिक पार्टियों की आय टैक्स से पूरी तरह मुक्त होती है। इसके अलावा कोई भी टैक्सपेयर पार्टी को दान देने का सबूत दिखाकर अपनी आय पर टैक्स छूट पा सकता है।

अहमदाबाद के चार्टर्ड अकाउंटेंट महेश छाजेड़ के मुताबिक, लोग इसी कानूनी छूट का गलत फायदा उठा रहे हैं। बताया गया है कि टैक्सपेयर्स दान की रसीद दिखाकर छूट लेते हैं, फिर पार्टियां अपना कमीशन काटकर बाकी रकम नकद में लौटा देती हैं।

दिसंबर 2025 में इनकम टैक्स विभाग की एक प्रेस रिलीज में भी यही बात सामने आई थी। विभाग ने कहा था कि इन पार्टियों का इस्तेमाल फंड ट्रांसफर, हवाला लेनदेन और फर्जी दान रसीद जारी करने के लिए हो रहा था।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिसर्चर शैली महाजन के मुताबिक, ऐसी कई पार्टियां मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी का जरिया बनकर काम कर रही हैं।

पार्टी अध्यक्षों ने भी मानी बेबसी

स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी को 2023-24 में 219 करोड़ रुपए मिले थे। पार्टी अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी का कहना है कि उन्हें इस पैसे के इस्तेमाल का कोई अधिकार नहीं था। उनके मुताबिक पार्टी के चार्टर्ड अकाउंटेंट मयूर सिंह ही सारा कामकाज संभालते थे और उन्हें अंधेरे में रखा गया।

जुलाई 2026 में पार्टी को इनकम टैक्स विभाग से नोटिस भी मिला। वहीं मयूर सिंह ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया और बताया कि वे कई ऐसी पार्टियों के लिए यही काम करते हैं।

जांच जारी, कार्रवाई अब भी अधूरी

टैक्स विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग साल 2022 से ही संदिग्ध पार्टियों की जांच कर रहा है। अब तक 5,591 करोड़ रुपये के फर्जी दान की पहचान हुई है, जिसमें से 2,749 करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं। इसके अलावा 665 करोड़ रुपए के विदेशी लेनदेन की भी पहचान हुई है।

पिछले साल चुनाव आयोग ने 800 से ज्यादा ऐसी पार्टियों को सूची से हटा दिया था, क्योंकि उन्होंने छह साल में एक भी चुनाव नहीं लड़ा था। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इस कार्रवाई की वजह वित्तीय गड़बड़ियां भी थीं या नहीं।

एक्सपर्ट कोट्स

  • अहमदाबाद के चार्टर्ड अकाउंटेंट महेश छाजेड़ के मुताबिक लोग राजनीतिक दान पर मिलने वाले टैक्स लाभ के कानूनी प्रावधानों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) रिसर्चर शैली महाजन का कहना है कि ऐसी कई पार्टियां चुनावी तौर पर सक्रिय नहीं होने के बावजूद बड़ा फंड जुटा और खर्च कर रही हैं, जिससे उनकी असली पहचान पर सवाल उठता है।
  • स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी के मुताबिक पार्टी के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने उन्हें प्रचार के लिए सीमित पैसा दिया और बाकी फैसले खुद लिए।

FAQ

  1. RUPP क्या होती हैं?
    RUPP यानी रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां। भारत में 2,800 से ज्यादा पार्टियों में से सिर्फ 73 को ही चुनाव आयोग ने मान्यता दी है, बाकी सभी RUPP हैं।
  2. इन कागजी पार्टियों को इतना चंदा क्यों मिलता है?
    राजनीतिक पार्टियों की आय टैक्स से मुक्त होती है और दानदाता भी टैक्स छूट पा सकते हैं। कई लोग इसी छूट का गलत फायदा उठाकर फर्जी दान दिखाते हैं।
  3. क्या इन कागजी पार्टियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है?
    इनकम टैक्स विभाग 2022 से जांच कर रहा है और अब तक 5,591 करोड़ रुपए के फर्जी दान की पहचान की है। पिछले साल चुनाव आयोग ने 800 से ज्यादा RUPP को सूची से हटाया था।


ये खबरें भी पढ़ें...

आईएएस दिलीप कुमार बने सागर संभाग कमिश्नर, 11 IAS के तबादले 5 को अतिरिक्त प्रभार

MP SAS Transfer: ओमप्रकाश सनोडिया बने सिंहस्थ अपर मेला अधिकारी, 5 जिला पंचायत CEO भी बदले

न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से 62 साल, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

दिशा बैठक में भड़कीं सांसद कंगना रनौत, अधिकारियों की लगाई क्लास

Tags:
  • चुनाव आयोग
  • राजनीतिक चंदा
  • इनकम टैक्स विभाग
  • टैक्स चोरी
  • मनी लॉन्ड्रिंग
  • RUPP
खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की VC पर सोशल मीडिया पोस्ट से विवाद, यूनिवर्सिटी ने आरोपों को बताया भ्रामक

By Umeshwari Baghel

खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की VC पर सोशल मीडिया पोस्ट से विवाद, यूनिवर्सिटी ने आरोपों को बताया भ्रामक
त्योहार से पहले नहीं हटेगी स्ट्रीट वेंडर्स की दुकान, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बनेगा ढाल, जानें कैसे

By Manya Jain

त्योहार से पहले नहीं हटेगी स्ट्रीट वेंडर्स की दुकान, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बनेगा ढाल, जानें कैसे
रूस ने यूक्रेन में भारतीय कारोबारी की दवा फैक्ट्री पर किया ड्रोन हमला, 400 करोड़ का नुकसान

By Ashish Bhardwaj

रूस ने यूक्रेन में भारतीय कारोबारी की दवा फैक्ट्री पर किया ड्रोन हमला, 400 करोड़ का नुकसान
विधायकों के आलीशान 4 बीएचके फ्लैट का नक्शा तैयार, भूपेश बघेल की योजना को अब मिलेगा आकार

By Arun Tiwari

विधायकों के आलीशान 4 बीएचके फ्लैट का नक्शा तैयार, भूपेश बघेल की योजना को अब मिलेगा आकार
RBSE ने लिया बड़ा फैसला, अब साल में दो बार होगी दसवीं की परीक्षा, जानें क्या किया गया है बदलाव?

By Jageshwar prasad

RBSE ने लिया बड़ा फैसला, अब साल में दो बार होगी दसवीं की परीक्षा, जानें क्या किया गया है बदलाव?
कूनो में फिर गूंजी किलकारी: भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने दिया 5 शावकों को जन्म, देश में चीतों की संख्या 60 पहुंची

By Arohi Raj

कूनो में फिर गूंजी किलकारी: भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने दिया 5 शावकों को जन्म, देश में चीतों की संख्या 60 पहुंची
संगठित अपराध और ड्रोन तस्करी पर DGP का बड़ा बयान, पुलिसिंग में बढ़ी महिला भागीदारी

By Jyoti Mahender Bhardwaj

संगठित अपराध और ड्रोन तस्करी पर DGP का बड़ा बयान, पुलिसिंग में बढ़ी महिला भागीदारी